AIIMS जोधपुर में रेजिडेंट डॉक्टर की संदिग्ध मौत, पुराने रैगिंग विवाद पर फिर सवाल
समझें क्या है पूरा मामला
- AIIMS जोधपुर: रेजिडेंट डॉक्टर राजनरेश यादव की संदिग्ध मौत।
- ओटी ड्यूटी के दौरान डॉक्टर की मौत, जांच जारी।
- एम्स में फिर उठे रेजिडेंट डॉक्टरों पर दबाव का सवाल।
- एम्स जोधपुर में मौत के बाद रैगिंग केस भी चर्चा में।
नरेश रमेश @ जोधपुर
जोधपुर एम्स के ऑपरेशन थिएटर में ड्यूटी कर रहे रेजिडेंट डॉक्टर राजनरेश यादव यादव की संदिग्ध मौत ने संस्थान को फिर सवालों के घेरे में ला दिया। 31 साल के डॉक्टर राज एनस्थीसिया विभाग में फर्स्ट ईयर पीजी स्टूडेंट थे। मंगलवार को ड्यूटी के दौरान ब्रेक में वे वॉशरूम गए थे। काफी देर तक वापस नहीं लौटे तो उनकी तलाश की गई। वे वॉशरूम में बेहोश मिले। उन्हें इमरजेंसी ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
पुलिस को मौके से एक सिरिंज भी मिली। शुरुआती तौर पर आत्महत्या की आशंका जताई जा रही, लेकिन इसकी वजह अभी साफ नहीं हुई।
एम्स जोधपुर में रेजिडेंट डॉक्टर की संदिग्ध मौत
इस घटना के बाद AIIMS के डॉक्टरों के बीच काम के दबाव, मानसिक तनाव और रेजिडेंट डॉक्टर्स के साथ व्यवहार को लेकर चर्चा शुरू हो गई। इसी के साथ दो महीने पहले दीक्षांत समारोह में सामने आया डॉ. विक्रांत शर्मा का मामला भी फिर चर्चा में है। उन्होंने एम्स जोधपुर में रैगिंग और उसके बाद अकादमिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि मौजूदा मौत और रैगिंग के बीच अभी कोई संबंध सामने नहीं आया।
पुलिस ने जांच शुरू की
बासनी थाना पुलिस के मुताबिक डॉक्टर राजनरेश यादव मंगलवार को ऑपरेशन थिएटर में ड्यूटी पर थे। दोपहर करीब एक बजे ब्रेक के दौरान वे वॉशरूम गए। काफी देर तक वापस नहीं आने पर उनकी तलाश की गई। वॉशरूम में वे बेहोश मिले। उन्हें तुरंत एम्स की इमरजेंसी में ले जाया गया, लेकिन बचाया नहीं जा सका। पुलिस आत्महत्या की आशंका को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही।
रेजिडेंट डॉक्टर की मौत को लेकर उठे सवाल
रेजिडेंट डॉक्टर राजनरेश यादव मूल रूप से अलवर के रहने वाले थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि घटना के पीछे क्या वजह थी। अभी काम का दबाव, रैगिंग या किसी तरह के उत्पीड़न को उनकी मौत की वजह बताने वाला कोई आधिकारिक तथ्य सामने नहीं आया।
डॉक्टरों के बीच काम के दबाव की चर्चा
घटना के बाद एम्स के मेडिकल डॉक्टरों के व्हाट्सऐप ग्रुप में भी मामले को लेकर चर्चा होने की बात सामने आई। रेजिडेंट डॉक्टरों के लंबे ड्यूटी आवर्स, काम के दबाव और मानसिक तनाव जैसे मुद्दे उठाए जा रहे। पुलिस जांच के बाद ही पता चलेगा कि उन्होंने आत्महत्या की या मौत की कोई दूसरी वजह थी और अगर आत्महत्या थी तो उसके पीछे क्या कारण रहे।
डॉक्टर विक्रांत ने लगाए थे रैगिंग के आरोप
एम्स जोधपुर में रैगिंग का मुद्दा करीब दो महीने पहले भी सुर्खियों में आया था। MCh न्यूरोसर्जरी बैच 2020-23 के डॉ. विक्रांत शर्मा ने आरोप लगाया था कि उन्होंने रैगिंग की शिकायत की तो इसके बाद उन्हें अकादमिक स्तर पर परेशान किया गया। उनका आरोप था कि उन्हें लगातार तीन बार परीक्षा में फेल किया गया। बाद में चौथे प्रयास में वे पास हुए थे।
डॉक्टर विक्रांत ने जानबूझकर फेल करने के आरोप लगाए थे
विक्रांत का कहना था कि स्वतंत्र तरीके से हुई परीक्षा में वे पास हुए। उन्होंने अपने पहले परीक्षा परिणाम की निष्पक्ष जांच की मांग भी की थी। उनका परीक्षा और मूल्यांकन से जुड़ा विवाद रिकॉर्ड पर भी है। 2023 में उन्होंने सूचना के अधिकार के जरिए अपनी MCh न्यूरोसर्जरी की आंसर शीट, इंटरनल असेसमेंट और मूल्यांकन से जुड़ी जानकारी मांगी थी। यह मामला बाद में केंद्रीय सूचना आयोग तक पहुंचा था।
दीक्षांत समारोह में उठा था मामला
26 जुलाई 2026 को AIIMS जोधपुर के पांचवें दीक्षांत समारोह में विक्रांत शर्मा ने यह मामला सार्वजनिक रूप से उठाया था। कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल मुख्य अतिथि थीं।
डिग्री लेने के बाद विक्रांत ने मंच से अपनी बात रखने की कोशिश की थी। इसी दौरान उनका माइक बंद होने और संस्थान के निदेशक के हस्तक्षेप की बात सामने आई थी। विक्रांत ने कहा था कि उन्हें डिग्री मिल गई, लेकिन न्याय मिलना अभी बाकी। उन्होंने मांग की थी कि उनके परीक्षा रिकॉर्ड की समीक्षा की जाए और रैगिंग की शिकायत के बाद कथित तौर पर हुए अकादमिक उत्पीड़न की निष्पक्ष जांच हो।
AIIMS ने आरोपों से किया था इनकार
विक्रांत शर्मा के आरोपों पर AIIMS जोधपुर ने कहा था कि उसके यहां मजबूत एंटी-रैगिंग सिस्टम है। एम्स के मुताबिक विक्रांत ने अपने कार्यकाल के दौरान रैगिंग की शिकायत नहीं दी थी और यह आरोप जुलाई 2023 में अंतिम MCh परीक्षा का रिजल्ट आने के बाद पहली बार उठाया गया।
AIIMS ने परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बताया था। संस्थान का कहना था कि इसमें दूसरे संस्थानों के बाहरी परीक्षक शामिल होते हैं। विक्रांत की शिकायत के बाद उनकी पूरी परीक्षा की वीडियोग्राफी भी कराई गई थी। संस्थान ने यह भी कहा था कि मामला राजस्थान हाईकोर्ट में विचाराधीन है।
अब फिर उठे कई सवाल
डॉक्टर राजनरेश यादव की मौत और विक्रांत शर्मा का मामला अलग-अलग हैं। अभी ऐसा कोई सबूत सामने नहीं आया है, जो दोनों घटनाओं को आपस में जोड़ता हो, लेकिन ताजा घटना के बाद AIIMS में रेजिडेंट डॉक्टरों के काम के घंटे, मानसिक दबाव, शिकायतों की सुनवाई और संस्थान के अंदर संवाद की व्यवस्था जैसे मुद्दे जरूर फिर चर्चा में आ गए हैं।
AIIMS की वेबसाइट पर एंटी-रैगिंग कमेटी, एंटी-रैगिंग स्क्वॉड, तनाव के समय संपर्क और शिकायत दर्ज कराने जैसी व्यवस्थाएं उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है।
अब सबसे अहम सवाल राजनरेश यादव की मौत की वजह का है। पुलिस जांच के बाद ही यह साफ होगा कि उनकी मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे कोई निजी, पेशेवर या दूसरी वजह थी या नहीं।
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