एम्स जोधपुर में रेजिडेंट डॉक्टरों का आंदोलन हुआ तेज, निदेशक से मांगा इस्तीफा
समझें क्या है पूरा मामला
- एम्स जोधपुर के रेजिडेंट डॉक्टरों का प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन।
- डॉक्टरों ने निदेशक से पहले इस्तीफे की मांग रखी।
- वर्कलोड, सुविधाओं और सुरक्षा को लेकर उठाए सवाल।
- 24 घंटे ड्यूटी के बाद आराम और छुट्टी की मांग।
- मांगें पूरी नहीं होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी।
एम्स जोधपुर के रेजिडेंट डॉक्टर और छात्र प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका आरोप है कि कार्यभार बहुत ज्यादा है और बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। कार्यकारी निदेशक प्रो. डॉ. गोवर्धन दत्त पुरी डॉक्टरों से बात करने पहुंचे थे। वहां एक रेजिडेंट डॉक्टर ने माइक लेकर उनसे पहले इस्तीफा देने को कहा। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि ठोस कदम उठने तक आंदोलन जारी रहेगा।
वार्ता से पहले वे इस्तीफा
प्रदर्शन के दौरान कार्यकारी निदेशक खुद डॉक्टरों के बीच पहुंचे। वे डॉक्टरों को संबोधित कर रहे थे। तभी एक रेजिडेंट डॉक्टर आगे आया और माइक अपने हाथ में ले लिया। उस डॉक्टर ने निदेशक से साफ कहा कि वार्ता से पहले वे इस्तीफा दें। डॉक्टरों का आरोप है कि प्रशासनिक विफलता के लिए वही जिम्मेदार हैं।
वहां मौजूद डॉक्टरों ने एक सुर में इस मांग का समर्थन किया। उनका कहना था कि इस्तीफे के बाद ही बाकी मांगों पर बातचीत होगी। इसके बाद माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया।
24 घंटे ड्यूटी के बाद आराम
डॉक्टरों की पहली मांग काम के घंटों से जुड़ी है। वे चाहते हैं कि 24 घंटे लगातार ड्यूटी के बाद अनिवार्य आराम मिले। उनकी मांग है कि हर शिफ्ट के घंटे तय किए जाएं। साथ ही हफ्ते में कम से कम एक दिन की छुट्टी पक्की हो।
क्लर्क का काम बंद हो
डॉक्टरों का कहना है कि उनसे क्लर्क का काम कराया जा रहा है। डेटा एंट्री, प्रिंटिंग और फाइलिंग भी उन्हीं के जिम्मे है। वे चाहते हैं कि इसके लिए अलग डेटा एंट्री ऑपरेटर रखे जाएं। एलडीसी की भर्ती की मांग भी की गई है।
छुट्टी और सुरक्षा की मांग
डॉक्टर छुट्टियों के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल चाहते हैं। अभी छुट्टी पर जाने से पहले डॉक्टर को खुद अपना रिप्लेसमेंट ढूंढना पड़ता है। उनकी मांग है कि यह जिम्मेदारी एचओडी की हो। इससे छुट्टी की व्यवस्था पारदर्शी बनेगी।
सुरक्षा और सुविधाओं पर भी सवाल उठे हैं। डॉक्टर सभी वार्डों और ओपीडी में साफ पीने का पानी चाहते हैं। महिला डॉक्टरों के लिए सुरक्षित चेंजिंग रूम और ड्यूटी रूम की मांग है। अलग शौचालय और पर्याप्त सुरक्षा गार्ड भी मांगे गए हैं।
मरीजों की सीमा तय हो
डॉक्टर चाहते हैं कि ओपीडी में रोज देखे जाने वाले मरीजों की संख्या सीमित हो। उन्होंने वर्चुअल बेड सिस्टम खत्म करने की भी मांग की है। डॉक्टरों का आरोप है कि यह सिस्टम बिना संसाधन बढ़ाए चलाया जा रहा है। इससे वार्डों पर दबाव और बढ़ जाता है।
मेडिसिन में 700 मरीज रोज
जनरल मेडिसिन की ओपीडी में रोज 700 से ज्यादा मरीज आ रहे हैं। पहले साल के रेजिडेंट डॉक्टर्स 4 से 5 दिन तक अस्पताल से बाहर नहीं निकल पाते। डॉक्टरों के मुताबिक इस दबाव में पढ़ाई पूरी तरह रुक गई है। शैक्षणिक गतिविधियां भी ठप पड़ी हैं।
गायनी में 36 घंटे की ड्यूटी
स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग यानी ओबीजी की हालत भी खराब बताई गई है। यहां डॉक्टरों से हफ्ते में 2 से 3 बार 36 घंटे लगातार ड्यूटी ली जा रही है। डॉक्टरों ने पीजी सीटें बढ़ाने की मांग की है। कम जोखिम वाले मरीजों के सीधे दाखिले पर नियंत्रण भी मांगा गया है।
कार्डियोलॉजी में 85 घंटे काम
कार्डियोलॉजी के डॉक्टर हफ्ते में 80 से 85 घंटे काम कर रहे हैं। एलडीसी स्टाफ न होने से कागजी काम भी उन्हीं पर है।डॉक्टरों का कहना है कि उनका समय इलाज के बजाय डेटा एंट्री में जा रहा है।
ओटी और रेडियोलॉजी पर सवाल
एनेस्थिसियोलॉजी और पीडियाट्रिक सर्जरी के डॉक्टरों ने ओटी का समय तय करने की मांग की है। वे चाहते हैं कि ओटी सुबह 9 से शाम 5 बजे तक चले।
शनिवार को इलेक्टिव ओटी बंद रखने की मांग भी है। पीडियाट्रिक सर्जरी में शिफ्ट अधिकतम 12 घंटे की करने को कहा गया है।
रेडियोलॉजी में काम दोगुना हो गया है, पर स्टाफ कम है। नाइट शिफ्ट की महिला डॉक्टरों के लिए सुरक्षित ड्यूटी रूम और शौचालय तक नहीं हैं।
चार रेजिडेंट के भरोसे विभाग
ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन में पूरे साल एक भी जेआर की भर्ती नहीं हुई। पूरा विभाग सिर्फ 4 रेजिडेंट के भरोसे चल रहा है।
ईएनटी में ओपीडी मरीजों की सीमा 200 तय करने की मांग है। वहां बैठने की जगह और सुरक्षा गार्ड भी मांगे गए हैं।
अलाइड हेल्थ साइंस के छात्रों ने सस्ते हॉस्टल की मांग रखी है। पैरामेडिकल छात्र भी इसमें शामिल हैं।
आंदोलन जारी रहेगा
डॉक्टरों ने साफ चेतावनी दी है। उनका कहना है कि ठोस प्रशासनिक कदम उठने तक आंदोलन नहीं रुकेगा। एम्स प्रशासन का पक्ष अभी सामने नहीं आया है।
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