अजमेर जेल में नशे का गोरखधंधा, एक ही नंबर पर 1283 बार कॉल और 50 लाख का लेनदेन
समझें क्या है पूरा मामला
- जेल STD से एक नंबर पर 1283 कॉल।
- बैंक खातों में 49.80 लाख का लेन-देन।
- नशे की गोलियों की सप्लाई का आरोप।
- FIR में पांच लोगों के नाम शामिल।
- जेलकर्मियों की संभावित मिलीभगत की जांच।
राजस्थान के प्रसिद्द अजमेर सेंट्रल जेल में नशे की गोलियों की कथित सप्लाई और पैसों के लेन-देन का मामला सामने आया है। जेल एसटीडी से एक मोबाइल नंबर पर 1283 बार कॉल किए गए। इस नंबर से जुड़े बैंक खातों में करीब 49.80 लाख रुपये का लेन-देन मिला है। सिविल लाइंस थाना पुलिस ने 19 अगस्त को एफआईआर दर्ज की है। इसमें पांच लोगों के नाम शामिल हैं।
अजमेर सेंट्रल जेल में नशे की गोलियों की कथित सप्लाई और जेल के बाहर पैसों के लेन-देन का मामला सामने आया है। एक बंदी की शिकायत के बाद जेल प्रशासन की जांच में जेल के एसटीडी से एक मोबाइल नंबर पर 1283 बार कॉल किए जाने और उससे जुड़े बैंक खातों में करीब 49.80 लाख रुपये के लेन-देन का खुलासा हुआ है। जेल प्रहरी महिपाल मंगलोदा की रिपोर्ट पर 19 अगस्त को सिविल लाइंस थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है।
पांच लोगों के नाम आए सामने
पुलिस में दर्ज एफआईआर में करण सिंह, कमल, जयराम, शिवराज और धनराज के नाम सामने आए हैं। ये सभी पहले अजमेर सेंट्रल जेल में बंद थे और फिलहाल जमानत पर बाहर बताए जा रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अब इन सभी की भूमिका की जांच कर रही है।
बंदी की शिकायत से खुला मामला
यह मामला उस समय सामने आया, जब हत्या के दो मामलों में जेल में बंद भीकाराम ने 22 जुलाई 2025 को जेल एसटीडी के जरिए डीजी जेल को शिकायत भेजी थी। शिकायत में उसने आरोप लगाया कि विचाराधीन बंदी करण सिंह और कमल सिंह ने उसके साथ मारपीट की और करीब 500 रुपये में नशे की गोलियां बेचने की बात कही। आरोप है कि गोलियों की रकम एक मोबाइल नंबर पर ऑनलाइन ट्रांसफर करवाई जाती थी। विरोध करने पर उसे जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।
जांच में सामने आया 1283 कॉल का रिकॉर्ड
शिकायत के बाद जेल प्रशासन ने जांच शुरू की तो जेल एसटीडी से एक ही मोबाइल नंबर पर 1283 कॉल किए जाने का रिकॉर्ड मिला। जांच में सामने आया कि कुछ दिनों में इस नंबर पर एक दिन में 3 से लेकर 29 बार तक कॉल की गईं। यह मोबाइल नंबर श्रीनगर थाना क्षेत्र के कनाखेड़ी निवासी जयराम रावत के नाम पर दर्ज मिला।
बैंक खाते में मिला बड़ा लेनदेन
इसके बाद नंबर से जुड़े बैंक खाते के स्टेटमेंट की जांच की गई। रिकॉर्ड के मुताबिक 1 जनवरी 2024 से 20 अप्रैल 2026 के बीच इस खाते में करीब 49 लाख 79 हजार 967 रुपये क्रेडिट हुए। हालांकि खाते का क्लोजिंग बैलेंस महज 13,358 रुपये मिला। यह आंकड़ा बताता है कि खाते से लगातार बड़ी रकम निकाली भी जाती रही।
चचेरे भाई का नाम भी आया सामने
जांच के दौरान जयराम के चचेरे भाई शिवराज सिंह का नाम भी सामने आया। पूछताछ में उसने बताया कि वह कभी-कभी जेल में बंद कैदियों के लिए जरूरी सामान पहुंचाता था और इसके बदले बंदियों के परिजन ऑनलाइन रुपये भेजते थे। जांच के मुताबिक जयराम का मोबाइल नंबर तीन अलग-अलग बैंक खातों से जुड़ा हुआ था।
जेल प्रशासन की रिपोर्ट में उठे सवाल
जेल प्रशासन की रिपोर्ट में इस बात पर भी सवाल उठाया गया है कि अगर बंदियों के परिजन सामान के लिए सीधे भुगतान करते थे, तो जेल के एसटीडी से लगातार एक ही नंबर पर इतनी बड़ी संख्या में कॉल क्यों की गईं। जेलकर्मियों की संभावित मिलीभगत की आशंका को लेकर भी जांच की जा रही है।
आगे क्या होगा
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि जेल के एसटीडी से इस मोबाइल नंबर पर लगातार कॉल करने की अनुमति या सुविधा कैसे मिली। साथ ही यह भी जांचा जाएगा कि इस पूरे लेन-देन में किसी जेलकर्मी को कोई आर्थिक लाभ मिला या नहीं। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही नशे की गोलियों की कथित सप्लाई, जेल एसटीडी से हुई कॉल और करीब 50 लाख रुपये के लेन-देन के बीच संबंध की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।
FAQ
- अजमेर जेल में क्या मामला सामने आया है?
अजमेर सेंट्रल जेल में नशे की गोलियों की कथित सप्लाई और जेल एसटीडी से एक मोबाइल नंबर पर हुए बड़े पैमाने के लेन-देन का मामला सामने आया है। इस नंबर से जुड़े खाते में करीब 49.80 लाख रुपये का लेनदेन मिला। पुलिस ने पांच लोगों पर एफआईआर दर्ज की है। - अजमेर जेल में नशे के कारोबार का मामला कैसे उजागर हुआ
हत्या के मामलों में बंद कैदी भीकाराम की शिकायत के बाद यह मामला सामने आया। उसने जेल एसटीडी से डीजी जेल को शिकायत भेजी थी, जिसमें नशे की गोलियों की बिक्री और मारपीट का आरोप लगाया गया था। इसके बाद जेल प्रशासन ने जांच शुरू की। - अजमेर जेल में नशे के कारोबार को लेकर पुलिस किन बिंदुओं की जांच कर रही है?
पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि जेल एसटीडी से एक ही नंबर पर 1283 बार कॉल करने की सुविधा कैसे मिली। साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि इस पूरे मामले में किसी जेलकर्मी की मिलीभगत या आर्थिक लाभ तो नहीं था।
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