एक सड़क की गजब कहानी: स्पीकर के क्षेत्र में आधी सड़क ‘स्मार्ट’, विधायक के इलाके में आधी ‘बीमार’
News In Short
- राजस्थान के अजमेर में एक सड़क के भाग्य की अजब-गजब कहानी।
- यह सड़क देवनानी और अनिता भदेल के विधानसभा क्षेत्र को जोड़ती है।
- देवनानी के हिस्से में आधी सड़क चमकदार, पर भदेल के हिस्से में आधी सड़क बदहाल।
- देवनानी के हिस्से की सड़क को चमकीली बनाने के लिए दूसरों का बजट भी काम ले लिया।
- विधायक भदेल ने पीडब्ल्यूडी की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल।
News In Detail
Ajmer: राजस्थान के अजमेर में एक सड़क की अजब कहानी है। इस सड़क का आधा हिस्सा शीशे की तरह चमक रहा है, जो विधानसभा स्पीकर वासुदेव देवनानी के विधानसभा क्षेत्र में आती है। सड़क का दूसरा आधा हिस्सा धूल और गड्ढों के आंसू रो रहा है। यह हिस्सा भाजपा विधायक अनित भदेल के विधानसभा क्षेत्र में आता है।
सड़क वही है, टैक्स देने वाली जनता वही है, लेकिन विधानसभा की सीमा बदलते ही विकास का मिजाज बदल गया। एक तरफ सफेद लाइनिंग वाली पक्की डामर है, तो दूसरी तरफ वाहन चालकों की किस्मत में सिर्फ हिचकोले हैं।
सियासत का बजट गणित
इस भेदभाव के पीछे की कहानी बड़ी दिलचस्प है। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की सिफारिश पर सार्वजनिक निर्माण विभाग ने उत्तर विधानसभा क्षेत्र के हिस्से वाली सड़क को उखाड़कर नए सिरे से बनाया। इस पर करीब 1.36 करोड़ रुपए खर्च किए गए। मजेदार बात यह है कि यह पैसा पहले दो अन्य सड़कों के लिए मंजूर हुआ था, जिसे कैंसिल कर इस वीआईपी सड़क के खाते में डाल दिया गया।
दूसरी ओर, दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से बजट की हरी झंडी नहीं मिली। नतीजा यह हुआ कि ठेकेदार ने ठीक डिवाइडर के बीच से अपनी लकीर खींच दी। एक तरफ डामर बिछाया और दूसरी तरफ का हिस्सा वैसा ही छोड़ दिया। अब सड़क के बीच में ऊंचाई का अंतर इतना हो गया है कि दोपहिया वाहन चालकों के फिसलने का खतरा बढ़ गया है।
अपनों में ही तकरार, दोनों ही एक पार्टी के
इस मामले ने अब राजनीतिक मोड़ ले लिया है। अपनी ही पार्टी की सरकार होने के बावजूद अजमेर दक्षिण की विधायक अनीता भदेल ने पीडब्ल्यूडी की इस कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। भदेल ने कहा, मैं विवाद नहीं चाहती, लेकिन जब मेरे विधायक कोटे से केसरगंज में काम हुआ था तो मैंने उत्तर और दक्षिण दोनों ओर की सड़क बनवाई थी। अब जिन्होंने यह (आधी) सड़क बनाई है, यह उनकी अपनी सोच है।
वहीं, 2023 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रहीं द्रौपदी कोली ने भी इस पर चुटकी ली है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य दोनों जगह बीजेपी है, विधायक भी बीजेपी के हैं, फिर भी जनता को उत्तर और दक्षिण के नाम पर बांटा जा रहा है। सड़कों का बंटवारा करना विकास नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी है। लेकिन डबल इंजन की सरकार का क्या करें।
50 हजार लोग रोज होते हैं परेशान
यह सिर्फ दो विधायकों की लड़ाई नहीं है, बल्कि 50 हजार से ज्यादा उन लोगों की समस्या है, जो रोज यहां से गुजरते हैं। यह सड़क ब्यावर और नसीराबाद जैसे शहरों को भी जोड़ती है।
गंभीर बात यह है कि एक तरफ 50 एमएम की नई लेयर चढ़ने से सड़क ऊंची हो गई है। डिवाइडर और सड़क का लेवल एक हो गया है। रात के समय स्ट्रीट लाइटें बंद रहती हैं। ऊबड़-खाबड़ रास्ते के कारण वाहन अक्सर दूसरी लेन में अनियंत्रित होकर घुस जाते हैं। दक्षिण वाले हिस्से में उखड़ा हुआ डामर फेफड़ों के लिए मुसीबत बना हुआ है।
पीडब्ल्यूडी एक्सईएन का कहना है कि लेफ्ट साइड का काम योजना के तहत स्वीकृत था, इसलिए पूरा हो गया। राइट साइड यानी दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के लिए किसी योजना में स्वीकृति नहीं थी। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई है कि 2026-27 के नए बजट में अब इस हिस्से का भी उद्धार हो जाएगा। यानी जनता को अभी एक साल और धूल फांकनी पड़ सकती है।
कब तक विकास पर चढ़ाएंगे सियासी चश्मा
अजमेर की यह सड़क हमारे सिस्टम का पोस्टमार्टम करती दिखती है। लोगों को कहना है कि यह बताती है कि विकास की प्राथमिकताएं जनहित से ज्यादा सियासी रसूख पर टिकी हैं। जब तक सड़कों को उत्तर और दक्षिण के चश्मे से देखा जाएगा, तब तक जनता ऐसे ही गड्ढों में हिचकोले खाती रहेगी। क्या एक सड़क को पूरा बनाने के लिए दो अलग-अलग बजट और दो अलग-अलग इच्छाशक्ति की जरूरत है, यह सवाल इस सड़क से गुजरने वाले लोगा पूछ रहे हैं।
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