पौधरोपण घोटाले में सीबीआई जांच की मांग, कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

Jageshwar prasad | Jul 06, 2026, 20:06 IST
17.5 करोड़ के पौधारोपण घोटाले में CBI जांच की मांग, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
राजस्थान हाई कोर्ट ने अलवर में हुए 17.5 करोड़ रुपए के पौधारोपण घोटाले की सीबीआई जांच की मांग पर सरकार से जवाब मांगा है। याचिका के अनुसार मशीनों से काम कराकर मजदूरों के नाम पर फर्जी दस्तखतों से करोड़ों का गबन किया गया है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • 17.5 करोड़ का पौधारोपण घोटाला, हाई कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब।
  • याचिका में इस घोटाले की जाचं सीबीआई से कराने की गुहार की गई है।
  • आरोप - कागजों में मजदूर, जमीन पर मशीनें और मोटी राशि की अवैध निकासी।
  • वन समितियों के नकली हस्ताक्षर कर बैंक खातों से अवैध पैसे निकाले गए।
  • भ्रष्टाचार के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग करने वाले जांच अधिकारी को ही हटाया।

राजस्थान हाई कोर्ट ने अलवर के राजगढ़ रेंज में पौधारोपण में 17.5 करोड़ रुपए के घोटाले की सीबीआई जांच करवाने पर सरकार से जवाब मांगा है।



एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा व जस्टिस मनीष शर्मा ने यह अंतरिम निर्देश वरदा फाउंडेशन की जनहित याचिका पर दिए।



मशीन से किया काम बताया मजदूरों का

याचिका में कहा है कि वर्ष 2023-24 के दौरान 650 हेक्टेयर वन भूमि पर पौधारोपण और मिट्टी संरक्षण के कार्य किए जा रहे थे।



यह पूरा प्रोजेक्ट कैम्पा फंड, राजस्थान वानिकी एवं जैव विविधता विकास परियोजना और फ्रांसीसी विकास एजेंसी से मिले लोन से संचालित था।



पौधारोपण के लिए गड्ढे खोदने तथा दूसरे कामों के लिए भारी अर्थ-मूविंग मशीनों का इस्तेमाल किया गया। लेकिन सरकारी दस्तावेजों में इसे स्थानीय मजदूरों से करवाना बताया।



याचिका में सात ग्राम वन रक्षा एवं प्रबंध समितियों के पदाधिकारियों के कथित फर्जी दस्तखतों करके बैंक खातों से अवैध तरीके से पैसा निकालने का भी आरोप है।



विभाग की आंतरिक रिपोर्ट ने ही खोली है पोल

याचिकाकर्ता ने बताया है कि इस घोटाले की पोल वन विभाग की आंतरिम जांच रिपोर्ट ने ही खोली है। जयपुर के तत्कालीन मुख्य वन संरक्षक राजीव चतुर्वेदी ने सबसे पहले अनियमितताओं की आशंका जताई थी। इसके बाद विभाग ने जांच करवाई थी।



विभागीय रिपोर्ट के अनुसार धरातल पर बिना काम किए या गलत तरीके से 2 करोड़ रुपए से अधिक का सीधा गबन किया है। वर्ष 2015-16 से 2024-25 के बीच विभिन्न समिति खातों से 15.5 करोड़ रुपए की अवैध निकासी भी हुई है।



पर्यावरण को फायदा नहीं, बल्कि किया नुकसान

याचिका में कहा गया है कि यह पौधारोपण भौगोलिक रूप से अनुपयुक्त स्थानों पर किया गया। वन क्षेत्र के भीतर प्रतिबंधित भारी मशीनों के उपयोग के कारण वहां की प्राकृतिक मिट्टी और मूल वनस्पति को ऐसा नुकसान पहुंचा है जिसकी भरपाई कठिन है।



याचिकाकर्ता का आरोप है कि विभाग के ही कुछ अधिकारी दोषियों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। दिसंबर 2024 में तत्कालीन पीसीसीएफ अरिजीत बनर्जी ने राजीव चतुर्वेदी को ही इस मामले का प्रारंभिक जांच अधिकारी नियुक्त किया था।



चतुर्वेदी ने फरवरी 2025 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17-ए के तहत मामले में लिप्त अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज करने की स्वीकृति मांगी। लेकिन,इस प्रस्ताव को महीनों तक विभागीय स्तर पर लटकाए रखा गया।



अंततः दिसंबर 2025 में वन विभाग के उप सचिव ने इस पर तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए। लेकिन कार्रवाई करने के स्थान पर 16 मार्च, 2026 को कार्यवाहक पीसीसीएफ पवन कुमार उपाध्याय ने एक जांच अधिकारी राजीव चतुर्वेदी को हटा दिया। उनकी जगह एक नए अधिकारी को नियुक्त कर दिया।



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