जेल में कैदियों तक मोबाइल, तंबाकू-बीड़ी पहुंचाने की कोशिश, पुलिस ने की जांच शुरू
समझें क्या है पूरा मामला
- अलवर केंद्रीय जेल की दीवार पर संदिग्ध थैली मिली।
- थैली से पांच कीपैड मोबाइल और डेटा केबल बरामद हुए।
- तंबाकू पाउच और बीड़ी के बंडल भी मिले।
- सामान जेल के अंदर फेंके जाने की आशंका है।
- पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
सुनील जैन@अलवर
राजस्थान के अलवर केंद्रीय जेल की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों में है। मंगलवार दोपहर जेल की बाहरी दीवार पर लगे बिजली के तारों में एक सफेद थैली फंसी मिली। जांच करने पर उसमें मोबाइल फोन, डेटा केबल, तंबाकू पाउच और बीड़ी के बंडल निकले। जेल प्रशासन ने तुरंत कोतवाली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह सामग्री किसने भेजी थी।
दीवार पर कैसे मिली थैली
मंगलवार दोपहर करीब ढाई बजे की बात है। हल्का नंबर-2 के इंचार्ज मुख्य प्रहरी अमरचंद शर्मा गश्त पर तैनात थे। उसी दौरान उनकी नजर उत्तर दिशा की दीवार पर पड़ी।
बिजली के तारों में एक सफेद थैली अटकी हुई दिखी। उन्होंने तुरंत इसकी सूचना ऊपर दी। सूचना मिलते ही कारापाल पवन डउकिया और प्रहरी सुरेश सामोता मौके पर पहुंच गए।
सीढ़ी की मदद से थैली को नीचे उतारा गया। इसके बाद जेल प्रशासन ने थैली की तलाशी ली।
थैली में क्या-क्या मिला
तलाशी के दौरान थैली से कई प्रतिबंधित चीजें बरामद हुईं। इनमें 5 बिना सिम वाले कीपैड मोबाइल फोन शामिल थे। साथ ही 5 डेटा केबल भी मिलीं।
इसके अलावा थैली में 14 कुबेर तंबाकू के पाउच निकले। 14 बीड़ी के बंडल भी बरामद हुए। जेल प्रशासन ने सारा सामान जब्त कर सीलबंद कर दिया।
निशाना चूकने की आशंका
प्रारंभिक जांच में एक अहम आशंका सामने आई है। माना जा रहा है कि यह सामग्री जेल के अंदर बंदियों तक पहुंचाने के लिए बाहर से फेंकी गई थी।
लेकिन निशाना सही जगह नहीं लगा। इसी वजह से थैली दीवार पर लगे बिजली के तारों में फंस गई और अंदर नहीं पहुंच पाई।
पुलिस ने कारागार (संशोधन) अधिनियम-2015 की धारा 42 के तहत मामला दर्ज किया है। अब यह जांचा जा रहा है कि थैली किसने फेंकी और यह किस बंदी के लिए थी।
बार-बार सामने आ रहे ऐसे मामले
अलवर केंद्रीय जेल में यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई बार मोबाइल और नशे का सामान बरामद हो चुका है।
इन घटनाओं ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार हो रही बरामदगी के बावजूद ऐसी घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रहीं।
कुछ जानकारों का मानना है कि सिर्फ बाहर से थैली फेंककर इतना बड़ा नेटवर्क चलाना आसान नहीं है। इसलिए जांच एजेंसियां यह भी देख सकती हैं कि कहीं जेल के भीतर किसी की मिलीभगत तो नहीं है।
हालांकि अभी तक किसी जेल कर्मचारी की संलिप्तता आधिकारिक रूप से साबित नहीं हुई है। जांच जारी है और आगे की कार्रवाई पुलिस की रिपोर्ट पर निर्भर करेगी।
अगर सुरक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो ऐसी कोशिशें और बढ़ सकती हैं। अब सबकी नजरें पुलिस और जेल प्रशासन की जांच पर टिकी हैं।
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