अस्पताल में टला हादसा, शिशु वार्ड में छत का गिरा प्लास्टर
समझें क्या है पूरा मामला
- अलवर के गीतानंद शिशु अस्पताल में छत का प्लास्टर गिरा, बड़ा हादसा टला।
- शिशु वार्ड में हादसे के बाद 10 नवजातों को सुरक्षित दूसरे वार्ड में शिफ्ट किया गया।
- दो दिन पहले सैटेलाइट अस्पताल में भी छत का प्लास्टर गिरने से डॉक्टर और मरीज घायल हुए थे।
- लगातार हादसों से सरकारी अस्पतालों की जर्जर व्यवस्था पर उठे सवाल।
- निरीक्षण के कुछ घंटों बाद ही हुआ हादसा, प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े हुए।
सुनील जैन@अलवर
राजस्थान में अलवर के गीतानंद शिशु अस्पताल के शिशु वार्ड की छत से प्लास्टर गिर गया। गनीमत रही कि उस समय वहां कोई मौजूद नहीं था। अस्पताल प्रशासन ने तुरंत 10 नवजातों को दूसरे वार्ड में शिफ्ट किया। इससे दो दिन पहले भी एक अस्पताल में ऐसी ही घटना हुई थी। निरीक्षण के कुछ घंटों बाद ही यह हादसा हुआ है।
अलवर शहर के सरकारी अस्पतालों की जर्जर इमारतें अब मरीजों और नवजातों की जान पर भारी पड़ने लगी हैं। बार-बार हो रहे हादसों ने अस्पताल प्रशासन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दो दिन पहले काला कुआं स्थित सैटेलाइट अस्पताल में छत का प्लास्टर गिरने से डॉक्टर और महिला मरीज घायल हो गए थे। इसके बाद बुधवार देर शाम एक और बड़ा हादसा होते-होते टल गया।
शिशु वार्ड में गिरा प्लास्टर
इस बार शहर के गीतानंद शिशु अस्पताल के शिशु वार्ड की छत से अचानक प्लास्टर का हिस्सा भरभराकर नीचे गिर गया। गनीमत रही कि जिस स्थान पर प्लास्टर गिरा, वहां कोई मरीज, नवजात या परिजन मौजूद नहीं था।अगर उस समय वहां कोई होता तो बड़ा हादसा हो सकता था। घटना के बाद पूरे वार्ड में अफरा-तफरी मच गई।
10 नवजातों को किया शिफ्ट
अस्पताल प्रशासन ने एहतियात के तौर पर वार्ड में भर्ती करीब 10 नवजात शिशुओं को तत्काल दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर दिया। अस्पताल में तैनात गार्ड सुरेंद्र यादव ने बताया कि बुधवार देर शाम अचानक छत का प्लास्टर टूटकर नीचे आ गिरा।
उस समय वार्ड में कई नवजात भर्ती थे। लेकिन जिस हिस्से में प्लास्टर गिरा, वहां कोई मौजूद नहीं था।
घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने तत्काल सभी शिशुओं को सुरक्षित दूसरे वार्ड में पहुंचाया।संबंधित वार्ड को मरम्मत के लिए खाली करा दिया गया है।
प्रसूताओं और परिजनों में दहशत
लगातार हो रही ऐसी घटनाओं के बाद अस्पताल में भर्ती प्रसूताओं और उनके परिजनों में भय का माहौल है। लोगों का कहना है कि अगर अस्पताल की छतें ही सुरक्षित नहीं हैं, तो मरीजों का इलाज कैसे सुरक्षित माहौल में हो पाएगा।
दो दिन पहले भी हुआ था हादसा
दो दिन पहले काला कुआं स्थित सैटेलाइट अस्पताल में एक ही दिन में दो बार छत का प्लास्टर गिरा था। इस हादसे में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर सीताराम के सिर में गंभीर चोट लगी थी।
एक महिला मरीज भी मलबे की चपेट में आकर घायल हो गई थी। उस दौरान छत का बड़ा हिस्सा पंखे समेत नीचे आ गिरा था।
पहले भी गिर चुका है प्लास्टर
यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले सीएमएचओ (CMHO – Chief Medical and Health Officer) कार्यालय में भी कई बार छत का प्लास्टर गिरने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
इसके बावजूद अस्पताल भवनों की मरम्मत और सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
निरीक्षण के कुछ घंटों बाद ही हादसा
सबसे हैरानी की बात यह है कि बुधवार को ही अतिरिक्त जिला कलेक्टर योगेश डागुर ने अलवर शहर के तीन अस्पतालों का निरीक्षण किया था। उन्होंने भवनों की मरम्मत को लेकर आवश्यक निर्देश भी दिए थे।
इसके कुछ ही घंटों बाद गीतानंद शिशु अस्पताल में प्लास्टर गिरने की घटना हो गई। इस घटना ने सरकारी अस्पतालों की जर्जर व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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