जोहड़ की तीन बीघा जमीन पर अवैध कब्जे, 12 मकान मालिकों को निगम ने दिए नोटिस
News In Short
- अलवर में जोहड़ की जमीन पर भूमाफिया ने कब्जा कर बनवा दिए पक्के मकान।
- शिकायतों के बाद नगर निगम की टीम भारी बल के साथ मौके पर पहुंची।
- निगम ने 12 आलीशान मकानों के मालिकों को बेदखली के दिए कानूनी नोटिस।
- 10 दिन के भीतर स्वामित्व के वैध दस्तावेज पेश नहीं करने पर चलेगा बुलडोजर।
- अधिकारियों ने कहा कि अतिक्रमण मानते हुए की जाएगी दंडात्मक कार्रवाई।
News In Detail
सुनील जैन@अलवर
राजस्थान के अलवर में सूरसागर जोहड़ की जमीन पर अवैध रूप से मकान बनाकर रह रहे लोगों के खिलाफ अब नगर निगम एक्शन में आया है। शहर में प्रताप स्कूल के पीछे स्थित इस प्राचीन जोहड़ की 10,400 वर्ग गज (लगभग साढ़े तीन बीघा से अधिक) भूमि पर लोगों ने कब्जा कर पक्के मकान बना लिए थे।
लगातार मिल रही शिकायतों के बाद नगर निगम की सतर्कता और अतिक्रमण निरोधक टीम ने भारी जाब्ते के साथ मौके पर पहुंची। जमीन की पैमाइश के बाद निगम ने जोहड़ की भूमि पर बने 12 आलीशान मकानों के मालिकों को कानूनी नोटिस जारी कर दिए हैं।
10 दिन की मोहलत, अन्यथा होगी बेदखली
नगर निगम के उच्चाधिकारियों ने कहा है कि नोटिस मिलने के 10 दिन के भीतर सभी संबंधित मकान मालिकों को अपनी जमीन के स्वामित्व (मलिकाना हक) से जुड़े वैध और प्रमाणित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।
यदि निर्धारित समयावधि के भीतर कोई भी व्यक्ति वैध पट्टा, रजिस्ट्री या अन्य कोई सरकारी दस्तावेज पेश करने में विफल रहता है, तो उनके निर्माण को पूरी तरह से अवैध अतिक्रमण माना जाएगा। इसके बाद बिना किसी पूर्व सूचना के निगम प्रशासन इन अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने और भूमि को वापस अपने कब्जे में लेने की कार्रवाई शुरू कर देगा।
गायब हो गई जोहड़ की मूल फाइल
राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार यह कीमती भूमि खसरा नंबर 674 और 676 में दर्ज है। सरकारी कागजों में पूरी जमीन सूरसागर जोहड़ के नाम से ही दर्ज चली आ रही है।
इस पूरे मामले में यह तथ्य सामने आया है कि इस जमीन से जुड़ी मूल फाइल (ओरिजिनल रिकॉर्ड) ही सरकारी दफ्तरों से रहस्यमयी ढंग से गायब है। इस खेल में अधिकारियों की मिलीभगत सामने आ रही है।
वर्ष 2010 में नगर विकास न्यास (UIT) ने अलवर के कई क्षेत्रों और संपत्तियों का हस्तांतरण नगर निगम को किया गया था। इस हस्तांतरण सूची में सूरसागर जोहड़ का क्षेत्र भी प्रमुखता से शामिल था। लेकिन मिलीभगत की बू इस बात से आती है कि इस भूमि से संबंधित मूल पत्रावली न तो वर्तमान में यूआईटी (UIT) के पास उपलब्ध है और न ही नगर निगम के रिकॉर्ड रूम में मिल रही है।
सूत्रों का दावा है कि यूआईटी स्तर पर ही साजिश के तहत इस फाइल को गायब कर दिया गया है। रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण मामले की गहन जांच और स्वामित्व की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने में पेच फंस रहा है, जिसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग भी उठने लगी है।
पानी का मुख्य स्रोत था सूरसागर, कब्जों ने बिगाड़ा स्वरूप
पर्यावरणविदों के अनुसार सूरसागर जोहड़ कभी केवल एक खाली जमीन नहीं थी, बल्कि यह अलवर शहर के लिए प्रकृति का एक वरदान थी। यह क्षेत्र कभी प्राकृतिक जल संग्रहण (वाटर हार्वेस्टिंग) का एक प्रमुख और ऐतिहासिक स्रोत हुआ करता था।
इसके चारों ओर स्थित अरावली की पहाड़ियों से वर्षा का पानी बहकर प्राकृतिक रूप से इसी जोहड़ में एकत्रित होता था। इस विशाल जोहड़ के कारण न केवल आसपास के पूरे इलाके का ग्राउंड वाटर लेवल संतुलित रहता था, बल्कि गर्मियों के दिनों में भी क्षेत्र के कुओं और नलों में पानी की कोई कमी नहीं होती थी।
पिछले दो-तीन दशकों में भू-माफियाओं की गिद्ध दृष्टि इस जमीन पर पड़ी। लगातार हुए अवैध कब्जों, मलबे की डंपिंग और कंक्रीट के अवैध निर्माणों के कारण इस विशाल और ऐतिहासिक जोहड़ का वजूद अब पूरी तरह समाप्त होने की कगार पर पहुंच गया है।
2006 और 2011 में भी हुई थी कोशिश
यह मामला नया नहीं है। इससे पहले भी वर्ष 2006 और वर्ष 2011 में जिला प्रशासन और स्थानीय निकाय ने इस जोहड़ को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया था।
उस दौरान कुछ निर्माण तोड़े भी गए थे, लेकिन राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक ढीलाशाही के चलते मामला कुछ समय बाद ठंडे बस्ते में चला गया।
प्रशासन के सुस्त पड़ते ही भू-माफियाओं और कब्जाधारियों के हौसले फिर बुलंद हो गए और उन्होंने धीरे-धीरे दोबारा से पक्के निर्माण शुरू कर दिए। देखते ही देखते पिछले कुछ वर्षों में यहां दर्जनों नए मकान और व्यावसायिक ढांचे खड़े हो गए।
इस बार होगी निर्णायक कार्रवाई
नगर निगम की सहायक अतिक्रमण निरोधक अधिकारी निशा लाखानी ने कहा कि पूर्व में भी इस क्षेत्र के निवासियों को अतिक्रमण हटाने और दस्तावेज दिखाने के लिए नोटिस जारी किए गए थे। लेकिन उस समय कई रसूखदार लोगों ने नोटिस लेने से साफ इनकार कर दिया था या उन्हें स्वीकार ही नहीं किया था।
अधिकारी ने बताया कि इस बार प्रशासन किसी भी प्रकार के दबाव में नहीं आने वाला है। इस बार सभी 12 चिन्हित मकान मालिकों को व्यक्तिगत रूप से नोटिस तामील करवाकर उनसे लिखित में जवाब मांगा गया है।
यदि दस्तावेज फर्जी पाए गए या मालिकाना हक साबित नहीं हुआ, तो निगम द्वारा बिना किसी पक्षपात के पूरी जमीन पर बुलडोजर चलाकर उसे मुक्त कराया जाएगा।
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