मंत्री और आईएएस के बीच छिड़ी जंग, कोचिंग सीलिंग मामले में आए आमने-सामने
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान के वन मंत्री संजय शर्माऔर आईएएस अधिकारी स्नेहल धायगुड़े के बीच ठनी।
- कोचिंग संस्थानों को सील करने के मामले में अब दोनों आमने-सामने।
- अलवर शहर में 17 कोचिंग और लाइब्रेरी संस्थानों को सील कर दिया था।
- मंत्री ने अधिकारियों को कोचिंग संस्थानों की सील हटाने के दिए निर्देश।
- नगर निगम ने आदेश माना, लेकिन यूआईटी सचिव ने ठंडे बस्ते में डाल दिया।
Alwar: राजस्थान के अलवर में कोचिंग संस्थानों को सील करने का मामला अब प्रशासनिक और राजनीतिक रस्साकशी में तब्दील हो चुका है।
वन राज्य मंत्री संजय शर्मा और अलवर नगर विकास न्यास (UIT) की सचिव IAS अधिकारी स्नेहल धायगुड़े के बीच की तल्खी अब खुलकर सामने आ गई है।
मंत्री के आदेशों के बावजूद यूआईटी सचिव द्वारा सील नहीं हटाने के फैसले ने प्रशासनिक गलियारों में ईगो क्लैश की चर्चाओं को हवा दे दी है।
क्या है पूरा मामला?
बीती 24 जून को प्रशासन ने नियमों की अनदेखी और सुरक्षा मानकों की कमी का हवाला देते हुए अलवर शहर में 17 कोचिंग और लाइब्रेरी संस्थानों को सील कर दिया था। अचानक हुई इस बड़ी कार्रवाई से हड़कंप मच गया।
अगले ही दिन 25 जून को वन राज्य मंत्री संजय शर्मा ने इस मामले में दखल दिया। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने का हवाला देते हुए मंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किया।
उन्होंने कहा कि कोचिंग संचालकों से शपथ पत्र (Affidavit) लिया जाए और तुरंत सील हटाई जाए। मंत्री ने यह भी कहा कि संचालकों को नियमों को पूरा करने के लिए एक महीने का समय दिया जाना चाहिए।
निगम ने माना आदेश, यूआईटी सचिव ने ठंडे बस्ते में डाला
मंत्री संजय शर्मा के आदेश मिलते ही अलवर नगर निगम ने तत्परता दिखाई। कमिश्नर सोहन सिंह नरूका ने 25 जून को ही अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली चार कोचिंग संस्थानों की सील हटा दी।
दूसरी तरफ, यूआईटी सचिव स्नेहल धायगुड़े ने मंत्री के आदेश को ठंडे बस्ते में डाल दिया। कोचिंग संचालकों का दावा है कि उन्होंने मंत्री के निर्देश पर यूआईटी कार्यालय में शपथ पत्र भी जमा करा दिया इसके बावजूद यूआईटी अधिकारियों ने सील खोलने से साफ इनकार कर दिया।
पुराना है मंत्री और आईएएस के बीच का विवाद
मंत्री संजय शर्मा और यूआईटी सचिव स्नेहल धायगुड़े के बीच यह टकराव नया नहीं है। इसकी जड़ें पुरानी हैं। इससे पहले यूआईटी के ही एक इंजीनियर को सेवा विस्तार देने के मामले में दोनों के बीच ठन गई थी।
मंत्री संजय शर्मा की सिफारिश पर यूआईटी के एक्सईएन कुमार संभव अवस्थी को सेवा विस्तार दिया गया था। आईएएस स्नेहल धायगुड़े इस सेवा विस्तार के सख्त खिलाफ थीं।
मंत्री के इस फैसले से नाराज होकर सचिव लंबी छुट्टी पर चली गई थीं। तभी से दोनों के बीच प्रशासनिक खींचतान चल रही थी।
नियमों और जुर्माने के बिना नहीं खुलेगी सील
इस पूरे विवाद पर यूआईटी सचिव का अपना तर्क है। उनका कहना है कि वह नियमों से समझौता नहीं करेंगी।
सचिव के मुताबिक जो कोचिंग बिना किसी अनुमति के चल रहे हैं, उन्हें 500 रुपये प्रति
वर्गमीटर की दर से जुर्माना देना होगा।
जिनके पास अनुमति है, लेकिन नियमों का उल्लंघन किया है, उन्हें 300 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से राशि जमा करानी होगी। इसके बाद संचालकों को 45 दिन में अन्य सभी शर्तें पूरी करनी होंगी, तभी अनुमति दी जाएगी।
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