घर में रहकर की तैयारी, पहले प्रयास में ही IAS अधिकारी बनी श्रद्धा गोमे
Jageshwar prasad | Jun 25, 2026, 17:46 IST
स्कूल-कॉलेज की टॉपर श्रद्धा गोमे पहले ही प्रयास में बनीं आईएएस अफसर
मध्य प्रदेश के इंदौर की रहने वाली 26 वर्षीय श्रद्धा गोमे ने अपने पहले ही प्रयास में देश की सबसे प्रतिष्ठित यूपीएससी परीक्षा पास कर 60वीं रैंक हासिल की। आज वे राजस्थान कैडर की आईएएस अफसर के रूप में झालावाड़ में तैनात हैं।
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को पार करना जहां लोगों के लिए वर्षों की तपस्या बन जाता है, वहीं देश में कुछ ऐसे भी बिरले मेधावी होते हैं जो अपनी असाधारण बुद्धिमत्ता और सटीक रणनीति के बल पर पहले ही प्रयास में इस चक्रव्यूह को भेद देते हैं।
ऐसी ही एक बेहद प्रेरणादायक कहानी है स्कूल और कॉलेज की हर परीक्षा में टॉप करने वाली, वर्ष 2021 बैच की राजस्थान कैडर की आईएएस अधिकारी श्रद्धा गोमे की।
उन्होंने लॉ की पढाई में 13 गोल्ड मेडल अपने नाम किए। लंदन व मुंबई जैसी महानगरीय चकाचौंध में बतौर लीगल मैनेजर काम किया। लेकिन जब देश की सेवा का संकल्प लिया, तो अपने पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 60 हासिल कर सबको हैरान कर दिया। आइए जानते हैं उनकी इस शानदार और अनुशासित सफलता के सफर को।
श्रद्धा गोमे मूल रूप से मध्य प्रदेश के इंदौर की रहने वाली हैं। उनका परिवार एक बेहद सम्मानित और शिक्षित पृष्ठभूमि से आता है। पिता श्री रमेश कुमार गोमे, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के एक रिटायर्ड अधिकारी हैं। मां श्रीमती वंदना गोमे, एक कुशल होममेकर (गृहिणी) हैं।
श्रद्धा बचपन से ही असाधारण रूप से प्रतिभावान थीं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा इंदौर के सेंट राफेल हायर सेकेंडरी स्कूल से पूरी की। वे सीबीएसई बोर्ड की 10वीं और 12वीं, दोनों ही परीक्षाओं में पूरे इंदौर जिले की टॉपर रहीं।
इतना ही नहीं, स्कूल के दिनों में उन्होंने इंटरनेशनल डिबेट (अंतरराष्ट्रीय वाद-विवाद) प्रतियोगिता जीतकर वैश्विक स्तर पर अपनी डिबेट कला का लोहा मनवाया था।
स्कूली शिक्षा के बाद श्रद्धा ने कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट यानी क्लैट (CLAT) की परीक्षा को क्रैक किया। CLAT में शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्हें देश के सबसे प्रतिष्ठित लॉ संस्थान नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु में दाखिला मिला।
साल 2018 में जब उन्होंने अपनी बीए एलएलबी (BA LLB) की डिग्री पूरी की, तो उन्होंने एक ऐसा कीर्तिमान रचा जो किसी भी छात्र के लिए एक सपना होता है। श्रद्धा ने अपने पांच साल के लॉ कोर्स के दौरान 13 गोल्ड मेडल जीते, जिसने उन्हें कॉलेज की सबसे लोकप्रिय छात्रा बना दिया।
ग्रेजुएशन पूरा होते ही श्रद्धा की असाधारण प्रतिभा को देखते हुए देश-विदेश की बड़ी कंपनियों में उनके लिए रास्ते खुल गए। उन्हें मशहूर मल्टीनेशनल कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड में बतौर लीगल मैनेजर के पद पर शानदार नौकरी मिली।
इस नौकरी के दौरान वे अक्सर भारत (मुंबई) और ब्रिटेन (लंदन) के बीच अप-डाउन करती थीं। कॉर्पोरेट जगत में उनका करियर बेहद शानदार था। लेकिन लंदन की उस चकाचौंध के बीच भी श्रद्धा के मन में हमेशा एक बात कौंधती थी।
इस कानूनी समझ और मेधा का उपयोग अपने देश के जमीनी स्तर के लोगों के कल्याण और प्रशासनिक नीतियों को सुधारने के लिए करना चाहिए। इसी उद्देश्य के साथ उन्होंने कॉर्पोरेट लाइफ को अलविदा कहा और यूपीएससी के मैदान में उतर गईं।
श्रद्धा जब 2020 में तैयारी के मैदान में उतरीं, तो उन्होंने दिल्ली जाकर किसी महंगी कोचिंग में एडमिशन लेने के बजाय अपने घर (इंदौर) में रहकर सेल्फ स्टडी (खुद की पढ़ाई) करने का फैसला किया। उनकी रणनीति बेहद व्यावहारिक और सटीक थी:
लॉ ऑप्शनल और नोट्स: चूंकि उनका बैकग्राउंड कानून का था, इसलिए उन्होंने मुख्य परीक्षा में लॉ (Law) को ही अपना वैकल्पिक विषय चुना। उन्होंने अपने कॉलेज के पुराने लॉ नोट्स से ही गहराई से रिवीजन किया।
25 सालों के प्रश्न पत्रों का विश्लेषण: श्रद्धा ने किसी भी भटकाव से बचने के लिए यूपीएससी के आधिकारिक सिलेबस और पिछले 25 वर्षों के प्रश्न पत्रों थोरो स्टडी किया। इससे उन्हें समझ आ गया कि परीक्षा की डिमांड क्या है।
पढ़ाई की अवधि और ऑनलाइन माध्यम: शुरुआती दौर में वे रोज़ाना 8 से 10 घंटे की फोकस्ड पढ़ाई ऑनलाइन माध्यमों की मदद से करती थीं।
आइसोलेशन की जगह फोकस: श्रद्धा की सबसे खास बात यह थी कि उन्होंने तैयारी के दौरान खुद को दुनिया से पूरी तरह काटा नहीं था। वे सामान्य जीवन जीती थीं, लेकिन जब वे पढ़ने बैठती थीं, तब वे खुद को हर तरह के डिस्ट्रैक्शन (भटकाव) से दूर कर लेती थीं।
प्रीलिम्स और मेंस परीक्षा को अपने पहले ही प्रयास में पास करने के बाद, श्रद्धा इंटरव्यू की तैयारी के लिए मात्र 15 दिनों के लिए दिल्ली आईं, जहां उन्होंने कई मॉक इंटरव्यू देकर अपनी कमियों को सुधारा। जब परिणाम आया, तो श्रद्धा गोमे ने महज़ 26 साल की उम्र में अपने पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया 60वीं रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया।
चयन के बाद श्रद्धा गोमे को राजस्थान कैडर आवंटित किया गया। उन्होंने अपनी प्रशासनिक पारी की शुरुआत सहायक कलेक्टर (ट्रेनी) के रूप में की और वर्तमान में वे राजस्थान के झालावाड़ के भवानी मंडी में उपखंड अधिकारी (SDM) / प्रशासनिक पद पर तैनात हैं, जहां वे पूरी ईमानदारी और कानूनी सूझबूझ के साथ आम जनता को राहत पहुंचाने का कार्य कर रही हैं।
![आईएएस श्रद्धा गोमे की जर्नी से अभ्यर्थियों के लिए 4 सबसे बड़े सूत्र]()
कल तक जो श्रद्धा गोमे लंदन की अदालतों और कॉर्पोरेट बोर्ड मीटिंग्स में कंपनियों के कानूनी मसले सुलझा रही थीं, आज वे राजस्थान के भवानी मंडी में बैठकर आम जनता के हक और प्रशासनिक न्याय की फाइलें निपटा रही हैं।
स्कूल की टॉपर से लेकर 13 गोल्ड मेडल और पहले ही प्रयास में आईएएस बनने तक का उनका यह सफर यह साबित करता है कि निरंतरता, एकाग्रता और खुद की क्षमताओं पर किया गया अटूट विश्वास ही आपको सफलता के सर्वोच्च शिखर पर स्थापित करता है।
पहले दो प्रयास में प्रीलिम्स फेल, तीसरे में AIR 16 लाकर IAS बनीं अंशु प्रिया
लगातार 3 बार फेल हुए निवृत्ति सोमनाथ, फिर 5वें प्रयास में IAS बनकर रचा इतिहास
स्कूल के दिनों में देखा सपना, पहले ही प्रयास में AIR 15, IAS रिया डाबी की कहानी
मां मनरेगा मजदूर, यूट्यूब से की पढाई और क्रैक किया UPSC, आईएएस सोहनलाल की कहानी
ऐसी ही एक बेहद प्रेरणादायक कहानी है स्कूल और कॉलेज की हर परीक्षा में टॉप करने वाली, वर्ष 2021 बैच की राजस्थान कैडर की आईएएस अधिकारी श्रद्धा गोमे की।
उन्होंने लॉ की पढाई में 13 गोल्ड मेडल अपने नाम किए। लंदन व मुंबई जैसी महानगरीय चकाचौंध में बतौर लीगल मैनेजर काम किया। लेकिन जब देश की सेवा का संकल्प लिया, तो अपने पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 60 हासिल कर सबको हैरान कर दिया। आइए जानते हैं उनकी इस शानदार और अनुशासित सफलता के सफर को।
इंदौर की माटी और पढ़ा-लिखा परिवार
श्रद्धा बचपन से ही असाधारण रूप से प्रतिभावान थीं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा इंदौर के सेंट राफेल हायर सेकेंडरी स्कूल से पूरी की। वे सीबीएसई बोर्ड की 10वीं और 12वीं, दोनों ही परीक्षाओं में पूरे इंदौर जिले की टॉपर रहीं।
इतना ही नहीं, स्कूल के दिनों में उन्होंने इंटरनेशनल डिबेट (अंतरराष्ट्रीय वाद-विवाद) प्रतियोगिता जीतकर वैश्विक स्तर पर अपनी डिबेट कला का लोहा मनवाया था।
क्लैट में टॉप और बेंगलुरु एनएलयू में 13 गोल्ड मेडल
साल 2018 में जब उन्होंने अपनी बीए एलएलबी (BA LLB) की डिग्री पूरी की, तो उन्होंने एक ऐसा कीर्तिमान रचा जो किसी भी छात्र के लिए एक सपना होता है। श्रद्धा ने अपने पांच साल के लॉ कोर्स के दौरान 13 गोल्ड मेडल जीते, जिसने उन्हें कॉलेज की सबसे लोकप्रिय छात्रा बना दिया।
लंदन की आलीशान नौकरी
इस नौकरी के दौरान वे अक्सर भारत (मुंबई) और ब्रिटेन (लंदन) के बीच अप-डाउन करती थीं। कॉर्पोरेट जगत में उनका करियर बेहद शानदार था। लेकिन लंदन की उस चकाचौंध के बीच भी श्रद्धा के मन में हमेशा एक बात कौंधती थी।
इस कानूनी समझ और मेधा का उपयोग अपने देश के जमीनी स्तर के लोगों के कल्याण और प्रशासनिक नीतियों को सुधारने के लिए करना चाहिए। इसी उद्देश्य के साथ उन्होंने कॉर्पोरेट लाइफ को अलविदा कहा और यूपीएससी के मैदान में उतर गईं।
बिना किसी कोचिंग के, घर पर रहकर की स्मार्ट स्टडी
लॉ ऑप्शनल और नोट्स: चूंकि उनका बैकग्राउंड कानून का था, इसलिए उन्होंने मुख्य परीक्षा में लॉ (Law) को ही अपना वैकल्पिक विषय चुना। उन्होंने अपने कॉलेज के पुराने लॉ नोट्स से ही गहराई से रिवीजन किया।
25 सालों के प्रश्न पत्रों का विश्लेषण: श्रद्धा ने किसी भी भटकाव से बचने के लिए यूपीएससी के आधिकारिक सिलेबस और पिछले 25 वर्षों के प्रश्न पत्रों थोरो स्टडी किया। इससे उन्हें समझ आ गया कि परीक्षा की डिमांड क्या है।
पढ़ाई की अवधि और ऑनलाइन माध्यम: शुरुआती दौर में वे रोज़ाना 8 से 10 घंटे की फोकस्ड पढ़ाई ऑनलाइन माध्यमों की मदद से करती थीं।
आइसोलेशन की जगह फोकस: श्रद्धा की सबसे खास बात यह थी कि उन्होंने तैयारी के दौरान खुद को दुनिया से पूरी तरह काटा नहीं था। वे सामान्य जीवन जीती थीं, लेकिन जब वे पढ़ने बैठती थीं, तब वे खुद को हर तरह के डिस्ट्रैक्शन (भटकाव) से दूर कर लेती थीं।
पहले ही प्रयास में AIR 60
राजस्थान कैडर में पोस्टिंग
आईएएस श्रद्धा गोमे की जर्नी से अभ्यर्थियों के लिए 4 सबसे बड़े सूत्र
आईएएस श्रद्धा गोमे की जर्नी से अभ्यर्थियों के लिए 4 सबसे बड़े सूत्र
कल तक जो श्रद्धा गोमे लंदन की अदालतों और कॉर्पोरेट बोर्ड मीटिंग्स में कंपनियों के कानूनी मसले सुलझा रही थीं, आज वे राजस्थान के भवानी मंडी में बैठकर आम जनता के हक और प्रशासनिक न्याय की फाइलें निपटा रही हैं।
स्कूल की टॉपर से लेकर 13 गोल्ड मेडल और पहले ही प्रयास में आईएएस बनने तक का उनका यह सफर यह साबित करता है कि निरंतरता, एकाग्रता और खुद की क्षमताओं पर किया गया अटूट विश्वास ही आपको सफलता के सर्वोच्च शिखर पर स्थापित करता है।
ये भी पढ़ें:-
लगातार 3 बार फेल हुए निवृत्ति सोमनाथ, फिर 5वें प्रयास में IAS बनकर रचा इतिहास
स्कूल के दिनों में देखा सपना, पहले ही प्रयास में AIR 15, IAS रिया डाबी की कहानी
मां मनरेगा मजदूर, यूट्यूब से की पढाई और क्रैक किया UPSC, आईएएस सोहनलाल की कहानी
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari