2 गर्भवतियों की मौत पर सवाल, स्वास्थ्य स स्टम कटघरे में
समझें क्या है पूरा मामला
- अलवर के गोविंदगढ़ क्षेत्र में दो गर्भवती महिलाओं की मौत हुई है।
- एक मामले में रेफरल सिस्टम पर लापरवाही के आरोप लगे हैं।
- दूसरे मामले में झोलाछाप इलाज से मौत का दावा किया गया है।
- घटनाओं के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू कर दी है।
- मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं।
सुनील जैन@अलवर
राजस्थान के अलवर जिले के गोविंदगढ़ उपखंड क्षेत्र में दो गर्भवती महिला की मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्था को सवालों के घेरे में ला दिया है। दोनों घटनाएं अलग-अलग गांवों की हैं। इनमें परिजनों ने इलाज में देरी और लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब प्रदेश में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर लगातार निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। कोटा में सामने आए गर्भवती महिलाओं की मौत के मामलों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ाने की बात कही थी।
गर्भवती की मौत
पहला मामला गोविंदगढ़ क्षेत्र के कैमासा गांव का है। यहां 26 वर्षीय रचना पत्नी विजय सिंह की मौत हो गई।परिजनों के अनुसार रचना को पेट दर्द और ज्यादा रक्तस्राव की शिकायत हुई थी। इसके बाद उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोविंदगढ़ लाया गया। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों ने उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया था। लेकिन समय पर 108 एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी।
इसके बाद परिवार निजी एंबुलेंस से महिला को लेकर गया। परिजनों का कहना है कि महिला को पहले निजी अस्पताल ले जाया गया। वहां से दोबारा रेफर होने के बाद अलवर और जयपुर में इलाज चला।इलाज के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग के कारण महिला की मौत हो गई। परिजनों ने रेफरल व्यवस्था और समय पर उपचार नहीं मिलने को लेकर सवाल उठाए हैं।
झोलाछाप पर आरोप
दूसरा मामला आगरा की गांव का है। यहां 28 वर्षीय माफिया पत्नी सलीम की मौत हुई। परिजनों के अनुसार महिला आठ महीने की गर्भवती थी। उन्हें आयरन इंजेक्शन लगाने की सलाह दी गई थी। परिजनों का आरोप है कि न्याणा क्षेत्र के एक कथित झोलाछाप ने महिला को पथरी के दर्द का इंजेक्शन लगा दिया।
इंजेक्शन लगाने के बाद महिला की हालत बिगड़ गई। इसके बाद उपचार मिलने से पहले ही उसकी मौत हो गई। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि जिस क्लीनिक में इलाज हुआ, उसे पहले स्वास्थ्य विभाग ने सील किया था। इसके बावजूद क्लीनिक दोबारा चल रहा था।
स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की जांच
दोनों घटनाओं के बाद स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो गया है। कैमासा मामले में अधिकारियों ने संबंधित चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मचारियों को रिकॉर्ड के साथ बुलाया है। खंड मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने चिकित्सकों, एएनएम और नर्सिंग स्टाफ से जानकारी मांगी है। जांच के दौरान उपचार से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा की जाएगी। विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि महिला को समय पर इलाज मिला या नहीं। साथ ही रेफरल प्रक्रिया की भी जांच की जाएगी।
रेफरल सिस्टम पर उठे सवाल
इन घटनाओं के बाद सबसे बड़ा सवाल रेफरल व्यवस्था को लेकर है। अगर मरीज गंभीर स्थिति में था तो उसे समय पर बेहतर इलाज क्यों नहीं मिल पाया। एंबुलेंस सुविधा में देरी हुई या नहीं, इसकी भी जांच जरूरी है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार गर्भावस्था के दौरान ज्यादा रक्तस्राव जैसी स्थिति में तुरंत इलाज मिलना बेहद जरूरी होता है। वहीं झोलाछाप इलाज का मामला भी चिंता बढ़ाने वाला है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिना अनुमति चल रहे क्लीनिक लोगों की जान के लिए खतरा बन सकते हैं।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
गोविंदगढ़ की घटनाओं ने स्वास्थ्य विभाग के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। 108 एंबुलेंस व्यवस्था, सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों की तैयारी और अवैध क्लीनिकों पर निगरानी जैसे मुद्दे फिर चर्चा में हैं। अब जांच रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा कि दोनों मामलों में किस स्तर पर लापरवाही हुई।
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