पुलिस हिरासत में धर्मांतरण के आरोपी पर हमला, पूर्व विधायक ने जड़ा थप्पड़
News In Short
- अलवर में धर्मांतरण मामले के आरोपी राजकुमार को किया कोर्ट में पेश।
- पूर्व विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने गुस्से में आरोपी को थप्पड़ मार दिया।
- ज्ञानदेव के गुस्से को देख पुलिस तुरंत आरोपी को सुरक्षित स्थान पर ले गई।
- विहिप ने प्रार्थना सभा में धर्मांतरण और आपत्तिजनक साहित्य का आरोप लगाया।
- इस समूचे मामले की जांच डीएसपी अंगद शर्मा को सौंपी गई है।
News In Detail
राजस्थान के अलवर में धर्मांतरण के मामले को लेकर शुक्रवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई, जब कोर्ट परिसर में सुनवाई के लिए लाए गए आरोपी पादरी राजकुमार को देखते ही पूर्व भाजपा विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने अपना आपा खो दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आहूजा ने पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में आरोपी राजकुमार को थप्पड़ जड़ दिया। इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें आरोपी अपना गाल सहलाता दिख रहा है। आहूजा आरोपी के लिए कह रहे हैं कि हिंदू होकर पादरी बन रहा है, हरामजादे...इसे रिमांड पर लेना है।
स्थिति को देख पुलिस तुरंत आरोपी पादरी को अपने साथ ले गई। इस घटना से पूरे अदालत परिसर में अफरातफरी मच गई।
पुलिस ने स्वीकारा, कहा-हुआ हमला
अलवर सिटी के पुलिस उपाधीक्षक अंगद शर्मा ने इस घटना की पुष्टि की। उन्होंने शुक्रवार को धर्मांतरण के आरोपी राजकुमार को अदालत में पेश किया गया था।
पुलिस उपाधीक्षक के अनुसार पूर्व विधायक ज्ञानदेव कोर्ट परिसर पहुंचे। आरोपी राजकुमार पर हमला कर दिया। अब इस संबंध में मामले की जांच की जा रही है, जो भी नतीजे सामने आएंगे, उसे देखते हुए पूर्व विधायक पर एक्शन लिया जाएगा। इस समूचे मामले की जांच डीएसपी अंगद शर्मा को सौंपी गई है।
प्रार्थना सभा की आड़ में खेल, विहिप का आरोप
इस पूरे विवाद की शुरुआत गुरुवार को अलवर की तंवर कॉलोनी से हुई थी। पुलिस को सूचना मिली थी कि कॉलोनी के एक मकान में प्रार्थना सभा की आड़ में कुछ संदिग्ध गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
विश्व हिंदू परिषद (VHP) के प्रांत संयोजक प्रेम सिंह राजावत ने इस मामले में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वहां भोले-भाले लोगों को उनकी बीमारियां ठीक करने का झांसा दिया जा रहा था और अंधविश्वास फैलाकर उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए उकसाया जा रहा था।
विहिप नेताओं का दावा है कि मौके से भारी मात्रा में आपत्तिजनक धार्मिक साहित्य भी बरामद हुआ है। इसके साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि इस कथित सभा के दौरान हिंदू देवी-देवताओं को लेकर बेहद अपमानजनक और अमर्यादित टिप्पणियां की गई थीं, जिससे स्थानीय लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं।
शिकायत के बाद दिल्ली का आरोपी गिरफ्तार
इस मामले के सामने आने के बाद स्थानीय नागरिक नितिन कुमार सैनी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अलवर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और दिल्ली के रहने वाले मुख्य आरोपी राजकुमार को हिरासत में ले लिया।
शुरुआती पूछताछ में आरोपी राजकुमार ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज किया है। उसका कहना है कि वह किसी का जबरन या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन नहीं करा रहा था, बल्कि केवल ईसा मसीह की प्रार्थना सभा आयोजित कर रहा था।
आरोपी का तर्क है कि प्रार्थना सभा में आना और अपनी मर्जी से प्रार्थना करना लोगों की निजी आस्था का विषय है।
कोर्ट परिसर में भारी तनाव, जांच में जुटी पुलिस
शुक्रवार को जब पुलिस आरोपी राजकुमार को कोर्ट में पेश करने के लिए लेकर पहुंची तो वहां पहले से ही भाजपा से निष्कासित पूर्व विधायक ज्ञानदेव आहूजा मौजूद थे।
आरोपी को देखते ही आहूजा ने पुलिस की मौजूदगी में उससे सवाल-जवाब करने का प्रयास। इसी दौरान उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।
पुलिस के अनुसार पूर्व विधायक ने आरोपी पर हमला किया। वहां मौजूद पुलिस कर्मियों ने हाथ आगे करके ज्ञानदेव को रोका। घटना के बाद आरोपी राजकुमार अपने गाल पर हाथ रखे बेहद डरा और घबराया हुआ नजर आया।
पुलिस के हाथ-पांव फूले
इस घटना के बाद थाना प्रभारी महेश तिवारी के नेतृत्व में पुलिस की टीम बेहद सतर्क हो गई है। पुलिस अब न केवल कथित धर्मांतरण के मामले की गहराई से जांच कर रही है, बल्कि उस मकान मालिक और कार्यक्रम से जुड़े अन्य सहयोगियों से भी पूछताछ कर रही है जहां यह सभा हो रही थी।
फिलहाल, शहर में किसी भी संभावित तनाव या अप्रिय स्थिति को टालने के लिए पुलिस प्रशासन ने कोर्ट परिसर सहित अलवर के अन्य संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और लगातार निगरानी रखी जा रही है।
थप्पड़ पर नहीं बोले आहूजा
बाद में पूर्व विधायक आहूजा ने मीडिया से बातचीत में आरोपी पर हमले को लेकर तो कुछ नहीं बोला, लेकिन उन्होंने कहा कि धर्मांतरण संबंधी आरोपों की निष्पक्ष और व्यापक जांच होनी चाहिए। यह पता लगाया जाना चाहिए कि आरोपी कब से इस गतिविधि में संलिप्त था। उसके पीछे कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं।
उन्होंने बताया कि संबंधित थाना प्रभारी से आरोपी का एक सप्ताह का पुलिस रिमांड लेने का आग्रह किया है, जिससे पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ा जा सके। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी व्यक्ति या संस्था की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
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