मत्स्य मेवात संस्थान में 22 लाख की हेराफेरी, पदाधिकारियों पर लगे आरोप, पुलिस ने दर्ज की FIR
News In Short
- अलवर की संस्था के बैंक खाते में हेराफेरी करने के लगे गंभीर आरोप।
- फर्जी दस्तावेज के जरिए संस्था के बैंक खाते से निकाल लिए 22 लाख रुपए।
- संस्था सचिव अशोक गुगनानी ने इस मामले में कोर्ट में परिवाद दाखिल किया।
- आरोपियों ने फर्जी हस्ताक्षर और शपथ पत्र रजिस्ट्रार में जमा कराए।
- पुलिस ने धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश सहित जांच शुरू की।
News In Detail
राजस्थान में अलवर की मत्स्य मेवात शिक्षा और विकास संस्थान के बैंक खाते से करीब 22 लाख रुपए की फर्जी दस्तावेजों से निकालने का मामला सामने आया है। इस मामले को लेकर अरावली विहार थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज करा जांच शुरू कर दी है।
शिकायतकर्ता के आरोप
संस्था सचिव रहे अशोक गुगनानी ने कोर्ट में परिवाद पेश किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मत्स्य मेवात शिक्षा और विकास संस्थान के बैंक ऑफ बड़ौदा अरावली विहार शाखा खाते में फर्जी दस्तावेज और कूटरचित हस्ताक्षरों के जरिए हेराफेरी की गई।
संस्था के कर्ताधर्ता रहे डॉ. वीरेंद्र विद्रोही के 2023 में निधन के बाद अशोक गुगनानी को सचिव के अधिकार मिले थे। लेकिन मौलाना हनीफ, अनूप दायमा और समर्थलाल मीणा ने फर्जी बैठक कर खुद को अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष घोषित कर लिया।
बैंक और रजिस्ट्रार में फर्जी दस्तावेज
आरोप है कि आरोपियों ने बैंक में फर्जी प्रस्ताव और संस्था सदस्यों के कूटरचित हस्ताक्षर पेश कर खुद को अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता बनवा लिया और खाते से करीब 22 लाख रुपए निकाल लिए। साथ ही कुछ सदस्यों के नाम से फर्जी इस्तीफे और शपथ पत्र रजिस्ट्रार संस्थाएं जयपुर में जमा कराए गए।
शिकायत के बाद कार्रवाई
अशोक गुगनानी ने कहा कि उन्होंने पहले थाने और बाद में पुलिस अधीक्षक अलवर को शिकायत दी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेज और आपराधिक साजिश सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
संस्था में आपसी विवाद
उधर, समर्थलाल मीणा का कहना है कि डॉ. वीरेंद्र विद्रोही की मृत्यु के बाद संस्था में आपसी विवाद और खींचतान चल रही है। उनका दावा है कि संस्था पर पांच बार ताला लगाया जा चुका है और अशोक गुगनानी ने कार्यकारिणी पर खुद हस्ताक्षर किए।
समर्थलाल ने कहा कि जब आपसी सहमति नहीं बनी तो अब फर्जी हस्ताक्षर और गबन के आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्हें पिछले तीन महीने से वेतन भी नहीं मिला।
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