आमेर में गाइड की हत्या पर उबाल: बाजार-महल बंद, सड़क पर धरना; 50 लाख की मदद पर बनी सहमति
सौरभ मिश्रा/राघवेंद्र राठौड़ @ जयपुर. राजस्थान की राजधानी के प्रमुख पर्यटन केंद्र आमेर में टूरिस्ट गाइड मनीष सोनी की हत्या के बाद मंगलवार को जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। सुबह मनीष की मौत की खबर आमेर पहुंचते ही बाजार के शटर गिर गए। आमेर महल में पर्यटन गतिविधियां प्रभावित हुईं, हाथी सवारी तक रोक दी गई और जो भी पर्यटक मौके पर थे, उन्हें वापस लौटने को कह दिया गया।
गाइड की हत्या की खबर मिलते ही स्थानीय लोग सड़क पर धरना देकर बैठ गए। हालात को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
आमेर में गाइड की हत्या से उबाल
मामला सिर्फ गाइड मनीष की हत्या तक सीमित नहीं रहा। आमेर पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए। मनीष और आरोपी के बीच 2 सितंबर को भी विवाद हुआ था। मनीष ने इसकी शिकायत आमेर पुलिस को दी थी, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की।
5 दिन बाद फिर विवाद हुआ और मनीष पर जानलेवा हमला कर दिया गया। ऐसे में धरने पर बैठे लोगों का सबसे बड़ा सवाल था कि अगर पहली शिकायत पर भी पुलिस एक्शन ले लेती तो ये विवाद बढ़ता नहीं और मनीष की जान बच सकती थी?
पर्यटकों को रास्ता बताने से शुरू हुआ था विवाद
आमेर पुलिस के मुताबिक सोमवार 7 सितंबर की सुबह करीब साढ़े 9 से 10 बजे मावठा क्षेत्र में कुछ पर्यटक निजी गाड़ी से आमेर महल पहुंचे थे। जीप चालक आजम ने कथित तौर पर उन्हें बताया कि निजी वाहन ऊपर नहीं जा सकता और जीप लेने की बात कही। वहां मौजूद टूरिस्ट गाइड मनीष सोनी ने पर्यटकों को रास्ता बताया, जिसके बाद वे निजी वाहन से आगे निकल गए।
इसी बात को लेकर मनीष और आजम के बीच विवाद शुरू हो गया। पुलिस का कहना है कि क्षेत्र में जीप चालकों और टूरिस्ट गाइडों के बीच पहले से भी विवाद चला आ रहा था। कहासुनी के दौरान विवाद हिंसक हो गया और मनीष के पेट में चाकू मार दिया गया।
गंभीर हालत में मनीष को जयपुर के SMS अस्पताल ले जाया गया। करीब 23 घंटे तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद मंगलवार सुबह उसकी मौत हो गई। हमले की घटना CCTV कैमरे में भी कैद हुई है।
2 सितंबर को पुलिस को शिकायत, 7 सितंबर को हमला
इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस की कथित लापरवाही पर सवाल खड़े हो रहे हैं। 2 सितंबर को जीप पार्किंग स्टैंड पर मनीष और आरोपी आजम के बीच पहले भी विवाद हुआ था। इसके बाद मनीष ने आमेर थाने में लिखित शिकायत दी थी।
आरोप है कि शिकायत के बावजूद ऐसी प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिससे विवाद को आगे बढ़ने से रोका जा सके। 5 दिन बाद दोनों फिर आमने-सामने आए और इस बार विवाद मनीष की जान लेकर खत्म हुआ।
इसी कारण परिवार और प्रदर्शनकारी हत्या के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ संबंधित पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग भी करते रहे। आमेर थाने के स्टाफ के साथ SHO और जांच अधिकारी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए।
गाइड की मौत की खबर आई और थम गया आमेर
मंगलवार सुबह गाइड मनीष की मौत की खबर फैलते ही आमेर में माहौल बदल गया। व्यापारी, स्थानीय लोग और टूरिस्ट गाइड सड़क पर उतर आए। आमेर का बाजार पूरी तरह बंद हो गया और लोग सड़क पर धरना देकर बैठ गए।
आमेर महल में भी इसका बड़ा असर दिखाई दिया। पर्यटन गतिविधियां प्रभावित हुईं, हाथी सवारी रोक दी गई और पर्यटकों की आवाजाही पर असर पड़ा। आसपास के स्कूल भी एहतियात के तौर पर बंद किए गए।
आमतौर पर पर्यटकों से गुलजार रहने वाले आमेर में मंगलवार को पुलिस का भारी जाप्ता और प्रदर्शनकारी नजर आए। हालात संभालने के लिए वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और सुबह से शाम तक आमेर किला पर्यटकों के लिए बंद रहा।
मृतक गाइड के परिवार ने 1 करोड़, सरकारी नौकरी की मांग की
मृतक गाइड मनीष के परिवार और प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के सामने कई मांगें रखीं। इनमें पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और डेयरी बूथ आवंटित करने की मांग प्रमुख थी।
इसके अलावा आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई, आरोपी के मकान पर बुलडोजर कार्रवाई, फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाने और आमेर क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित जीपों के खिलाफ अभियान चलाने की मांग भी उठी। कुछ प्रदर्शनकारियों ने आरोपी के एनकाउंटर की मांग भी की।
परिवार-SDM के बीच घंटों चली बातचीत
धरना खत्म कराने और परिवार की मांगों का समाधान निकालने के लिए प्रशासन की कोशिश दिनभर जारी रही। SDM और परिवार के सदस्यों के बीच आमेर के तहसील कार्यालय में लंबी बातचीत चली। परिवार शुरुआत में एक करोड़ रुपए की सहायता, सरकारी नौकरी, डेयरी बूथ और आरोपी के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई की मांग पर अड़ा रहा।
कई दौर की बातचीत के बाद आखिरकार प्रशासन और परिवार के बीच सहमति का रास्ता निकला।
50 लाख की सहायता पर सहमति, धरना खत्म
परिवार और प्रशासन के बीच लंबी बातचीत के बाद आखिरकार मांगों पर सहमति बन गई। इसके बाद परिजनों और समर्थकों ने शाम 6 बजे के आसपास खत्म कर दिया।
सहमति के मुताबिक मनीष सोनी के परिवार को कुल 50 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसमें 31 लाख रुपए प्रशासन और 19 लाख रुपए स्थानीय व्यापारियों व भामाशाहों की ओर से दिए जाएंगे। इसके अलावा परिवार के एक सदस्य को संविदा पर नौकरी और एक डेयरी बूथ देने पर भी सहमति बनी है। वहीं, आरोपी के खिलाफ केस ऑफिसर स्कीम के तहत मुकदमा चलाया जाएगा।
विधायक बालमुकुंद बोले- परिवार के साथ खड़े हैं
धरनास्थल पर हवामहल से BJP MLA बालमुकुंदआचार्य भी पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और कहा कि वे परिवार के साथ खड़े हैं। बालमुकुंद आचार्य ने कहा कि मामले की जानकारी सरकार के शीर्ष स्तर तक है और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा तथा सतीश पूनिया पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।
उन्होंने पुलिस-प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस मामले में गंभीर लापरवाही हुई है। उन्होंने परिवार को न्याय दिलाने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही। उन्होंने कहा कि इस मामले में एक पुलिस अधिकारी को एपीओ कर दिया। धरनास्थल पर प्रदर्शनकारियों ने आरोपी के खिलाफ तत्काल बुलडोजर कार्रवाई की मांग भी उठाई।
मुख्य आरोपी आजम गिरफ्तार, नाजिश से भी पूछताछ
आमेर पुलिस ने घटना के बाद मुख्य आरोपी जीप ड्राइवर आजम को गिरफ्तार कर लिया। मामले में उसके साथी नाजिश को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पुलिस के मुताबिक आजम के खिलाफ आमेर थाने में पहले से दो आपराधिक मामले दर्ज हैं। मनीष की मौत के बाद मामले में हत्या की धाराएं जोड़ी गई हैं।
परिवार का इकलौता कमाने वाला था मनीष
मनीष सोनी की मौत ने उसके परिवार के सामने आजीविका का संकट भी खड़ा कर दिया है। परिवार के मुताबिक मनीष घर का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। उसके परिवार में पत्नी और तीन बच्चे हैं। इसी कारण परिजन आर्थिक सहायता के साथ परिवार के एक सदस्य के रोजगार की मांग भी प्रमुखता से कर रहे थे।
सबसे बड़ा सवाल-पहली शिकायत पर कार्रवाई क्यों नहीं?
प्रशासन की काफी मान-मनौव्वल धरना खत्म हो गया और परिवार व प्रशासन के बीच आर्थिक सहायता समेत कई मांगों पर सहमति भी बन गई, लेकिन पुलिस की कथित लापरवाही का सवाल अभी बाकी है।
डीसीपी करण शर्मा ने बताया कि प्रशासनिक अधिकारियों से आश्वासन के बाद प्रदर्शन कार्यो ने रास्ता खोल दिया गया। मृतक का पोस्टमार्टम करवा कर शव परिजनों को सौंप दिया है।
अगर 2 सितंबर को मनीष की ओर से दी गई शिकायत पर तत्काल और प्रभावी कार्रवाई हुई होती तो क्या 7 सितंबर का हमला रोका जा सकता था? अब यह सवाल पुलिस की कार्यप्रणाली और जांच, दोनों के केंद्र में है।
इसके साथ ही आमेर जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल पर जीप चालकों और टूरिस्ट गाइडों के बीच चल रहे विवाद और व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठे हैं। गाइड संगठनों ने पर्यटन स्थलों पर पुलिस गश्त बढ़ाने, शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई और आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों के खिलाफ सख्ती की मांग की है।
एक टूरिस्ट गाइड की हत्या ने मंगलवार को पूरे आमेर की रफ्तार रोक दी। महल की गतिविधियां प्रभावित हुईं, बाजार बंद रहा और लोग सड़क पर धरने पर बैठ गए। 50 लाख रुपए की मदद, संविदा नौकरी और डेयरी बूथ पर सहमति के बाद धरना तो खत्म हो गया, लेकिन 2 सितंबर की शिकायत के बावजूद मामला हत्या तक कैसे पहुंचा है, इस सवाल का जवाब अभी बाकी है।
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