आमेर-जयगढ़-नाहरगढ़ रोपवे प्रोजेक्ट पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक; टेंडर में गड़बड़ी को बनाया आधार

Mukesh Sharma | May 08, 2026, 20:04 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान हाई कोर्ट ने जयपुर में आमेर-जयगढ़-नाहरगढ़ को जोड़ने वाले रोपवे प्रोजेक्ट पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह रोपवे पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए बनाई जानी है।

News In Short

जयपुर के आमेर-जयगढ़-नाहरगढ़ रोपवे प्रोजेक्ट पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक।


रोपवे के टेंडर में गड़बड़ी के आरोप, एक फर्म ने दायर की थी याचिका।


याचिका में इस रोपवे प्रोजेक्ट में आरटीपीपी एक्ट के उल्लंघन का है आरोप।


याचिका में 80 करोड़ के काम का ठेका 350 करोड़ में देने का लगाया आरोप।


इस रोपपे प्रोजेक्ट के लिए राजस्थान बजट में की गई थी घोषणा।



News In Detail

Jaipur: राजस्थान हाई कोर्ट ने जयपुर में आमेर-जयगढ़-नाहरगढ़ को जोड़ने वाले रोपवे प्रोजेक्ट पर रोक लगा दी है। जस्टिस समीर जैन ने शुक्रवार को रोपवे प्रोजेक्ट के लिए 2 फरवरी को दी गई सरकारी मंजूरी पर रोक लगाने के आदेश दिए। कोर्ट ने यह अंतरिम आदेश शिवम प्राइम इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड की याचिका पर दिए। इस मामले में अगली सुनवाई 19 मई को होगी।



पयर्टन को बढ़ावा देने के प्रयास

राजस्थान सरकार ने केंद्र सरकार की मंशा के अनुरूप धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर रोपवे बनाने की घोषणा की थी। बजट में घोषणा करने के बाद इसके लिए बाकायदा बजट अलॉट हुआ था। करीब 6.5 किलोमीटर रोपवे के ​जरिए आमेर-जयगढ़-नाहरगढ़ किलों को एक साथ दिखाने की योजना थी।



याचिकाकर्ता की तरफ से एडवोकेट अभि गोयल और हार्दिक मिश्रा ने कोर्ट को बताया कि उनकी फर्म 80 करोड़ में रोपवे बनाने को तैयार थी। लेकिन 350 करोड़ की लागत वाले को काम दिया गया। इस मामले में टेंडर देने के लिए बने राजस्थान पारदर्शिता लोक उपापन अधिनियम के नियमों का उल्लंघन हुआ है।



विज्ञापन तक नहीं दिया

याचिकाकर्ता फर्म की ओर से कहा गया है कि इस रोपवे प्रोजेक्ट के लिए टेंडर आमंत्रित करने का कोई विज्ञापन जारी नहीं किया गया। याचिकाकर्ता फर्म सहित तीन फर्मों ने रोपवे प्रोजेक्ट के टेंडर के लिए अप्लाई किया था।



याचिका में बताया गया कि यह प्रोजेक्ट आरटीपीपी एक्ट-2012 की धारा 2(13) के तहत खरीद के दायरे में आता है। इसलिए अधिकतम प्रतियोगी टेंडर आमंत्रित करने के लिए विज्ञापन देना जरुरी है, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया।



80 करोड़ की जगह 350 करोड़ वाली फर्म को सौंपा काम

कोर्ट को बताया गया कि दो सितंबर, 2025 की बैठक से साफ है कि याचिकाकर्ता फर्म लगभग 80 करोड़ रुपए की लागत में रोपवे बना रही थी। इसमें वन भूमि और पेड़-पौधों को शून्य या न्यूनतम नुकसान पहुंच रहा था।



वहीं, दूसरी आवेदक फर्म जीआर इंफ्रा ने रोपवे बनाने के लिए 350 करोड़ रुपए की लागत बताई। इसमें वन क्षेत्र और पेड़ों को नुकसान होना शामिल था। इसके बावजूद दूसरी फर्म को दो फरवरी, 2026 को रोपवे का काम देने की शुरुआती मंजूरी दे दी गई।



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