अंधेरा होते ही बिजली का गहराता संकट, पावर ग्रिड के लिए क्यों सिरदर्द बनी रातों की तपिश?
Jinesh Jain | May 08, 2026, 14:43 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान समेत देश के अधिकांश हिस्सों में भीषण गर्मी ऊर्जा प्रबंधकों की नींद उड़ा रही है। संकट प्रचंड गर्मी में दिन में बिजली डिमांड का नहीं है, बल्कि गर्म हो रही रातों ने नाइट टाइम पावर गैप को अचानक बढ़ा दिया है।
News In Short
- देश में पड़ रही भीषण गर्मी ने ऊर्जा प्रबंधकों की नींद उड़ाई।
- ऊर्जा प्रबंधक अभी तक दिन की डिमांड पूरा करने को लेकर चिंतित थे।
- अब गर्म होती रातों ने छीनी ऊर्जा प्रबंधकों की नींद, नाइट टाइम पावर गैप बढ़ा।
- तापमान की स्थिति यह कि 27 अप्रैल को सोलापुर का न्यूनतम तापमान 41.9°C था।
- संकट के पीछे मुख्य कारण सोलर पावर और डिमांड के बीच का असंतुलन।
News In Detail
सूरज ढला और संकट बढ़ा
लेकिन चिंताजनक बात यह है कि इन्हीं 15 दिन में से 13 दिन रात के समय बिजली की भारी किल्लत दर्ज की गई। रात के समय यह कमी 5.4 गीगावाट (GW) तक जा पहुंची। यह इतनी बिजली है जिससे लगभग 27 लाख ग्रामीण घरों को रोशन किया जा सकता है।
ग्रिड मैनेजरों की नींद क्यों उड़ी है?
दिन के समय जब एसी (AC) का लोड चरम पर होता है, तब सोलर पावर उसे काफी हद तक संभाल लेती है। लेकिन जैसे ही शाम होती है और सोलर उत्पादन शून्य हो जाता है, ग्रिड पर अचानक दबाव बढ़ जाता है।
सूरज ढलने के बाद लोग घरों को लौटते हैं, जिससे इलेक्ट्रिक कुकिंग, ईवी (EV) चार्जिंग और रात भर चलने वाले एयर कंडीशनर्स का लोड ग्रिड पर एक साथ आता है। रिपोर्ट के अनुसार 24 अप्रैल को जब रात की कमी 5.4 GW पर थी, उसी समय कोयला और परमाणु आधारित लगभग 23.8 GW क्षमता के प्लांट फोर्स्ड आउटेज (तकनीकी खराबी या ईंधन की कमी) के कारण बंद थे।
तपते शहर और पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी
इतनी गर्मी का मतलब है कि बिजली की मांग 24 घंटे बनी रहती है। अप्रैल में बिजली की मांग 256 GW के ऐतिहासिक स्तर को छू गई। राजस्थान में भी अप्रैल और मई के पहले सप्ताह में रातें बहुत अधिक गर्म रही हैं।
समाधान की राह में क्या है रोड़ा?
भारत की वर्तमान स्थापित बैटरी स्टोरेज क्षमता मात्र 0.27 GW है, जो रात की मांग को पूरा करने के लिए 'ऊंट के मुंह में जीरा' समान है।
आगे की चुनौती
मई का महीना अभी बाकी है, जिसे प्री-मानसून गर्मी का चरम माना जाता है। राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और हिमालयी राज्यों में तापमान और बढ़ने के आसार हैं। टेरी (TERI) के विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक हमारे पास पर्याप्त मात्रा में बिजली भंडारण (Storage) की व्यवस्था नहीं होगी, तब तक रात के समय ग्रिड को संतुलित करना एक 'असंभव मिशन' जैसा बना रहेगा।
हमें केवल सूरज से बिजली बनाना ही नहीं, बल्कि उसे रात के लिए बचाना भी सीखना होगा।
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