रेप मामले में एमपी पुलिस के तत्कालीन एआईजी अनिल मिश्रा को उम्रकैद

Mukesh Sharma | Jul 30, 2026, 22:39 IST
एआईजी अनिल मिश्रा को उम्रकैद
राजस्थान में जयपुर की पॉस्को कोर्ट ने एमपी के पूर्व एआईजी अनिल मिश्रा को उम्रकैद की सजा सुनाई है। पति की मदद के नाम पर महिला से रेप किया गया था।

समझें क्या है पूरा मामला

  • पूर्व एमपी AIG अनिल मिश्रा को दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा
  • जयपुर पॉक्सो कोर्ट का बड़ा फैसला, 11 साल बाद पीड़िता को न्याय
  • पति की मदद के बहाने शोषण का आरोप, कोर्ट ने दोषी माना
  • नाबालिग बेटी से अश्लीलता मामले में भी 3 साल की सजा
  • वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के पद के दुरुपयोग पर अदालत सख्त

जयपुर की पॉक्सो मामलों की विशेष अदालत क्रम-2 ने आपराधिक मामले में मध्य प्रदेश पुलिस के तत्कालीन एआईजी अनिल मिश्रा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जयपुर की एक महिला ने 2014 में पूर्व एआईजी अनिल मिश्रा के खिलाफ दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।



महिला ने आरोप लगाया कि पति की मदद का झांसा देकर उसका शोषण किया गया। पीड़िता की नाबालिग बेटी से जुड़े मामले में भी तीन साल की सजा दी गई है।



जयपुर की अदालत का फैसला

जयपुर की पॉक्सो मामलों की विशेष अदालत क्रम-दो ने यह अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने मध्य प्रदेश पुलिस के तत्कालीन एआईजी अनिल मिश्रा को दोषी माना। कोर्ट ने माना कि आरोपी ने पीड़िता के पति की मदद का झांसा देकर उसका बार-बार शोषण किया। इसी मामले में अदालत ने आजीवन कारावास की सजा तय की। साथ ही पीड़िता की नाबालिग बेटी के साथ अश्लीलता के मामले में तीन साल की अलग सजा भी सुनाई गई।



अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा कि आरोपी उस समय मध्य प्रदेश में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी था। आम नागरिकों की सुरक्षा करना उसकी जिम्मेदारी थी। इसके बावजूद उसने अपने पद का दुरुपयोग किया। कोर्ट के मुताबिक उसने पीड़िता को अलग-अलग शहरों में ले जाकर शोषण किया।



कैसे शुरू हुआ पूरा मामला

अभियोजन पक्ष की तरफ से विशेष लोक अभियोजक संदीप वाजपेयी और पीड़ित पक्ष के वकील मुकेश पाठक ने अदालत में पूरा घटनाक्रम रखा। दोनों ने बताया कि पीड़िता ने 11 जुलाई 2014 को जयपुर के महिला थाना दक्षिण में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि उसके पति के खिलाफ फरवरी 2012 में मध्य प्रदेश में एक शिकायत दर्ज हुई थी। इसी दौरान पति ने महिला को बताया कि एडिशनल इंस्पेक्टर जनरल के पद पर तैनात अनिल मिश्रा उसके व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। पति ने उसे मिश्रा से मिलने के लिए कहा था।



रिपोर्ट के अनुसार महिला मार्च 2012 में भोपाल गई और वहां मिश्रा से मुलाकात की। आरोप है कि इसी दौरान मिश्रा ने पति की मदद का प्रलोभन देकर उसके साथ ऑफिसर मेस में दुष्कर्म किया। इसके बाद यह सिलसिला लंबे समय तक चलता रहा।



आरोपों का सिलसिला और गिरफ्तारी

पीड़िता के मुताबिक आरोपी ने उससे कई बार अपने बैंक खाते में रुपये भी ट्रांसफर करवाए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि आरोपी ने उसके साथ जोधपुर और मुंबई सहित कई अन्य शहरों में भी शोषण किया। इसके अलावा अप्रैल 2014 में आरोपी ने पीड़िता की नाबालिग बेटी के साथ भी अश्लीलता की। इस रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया था। इसके बाद जांच पूरी कर अदालत में आरोप पत्र पेश किया गया। लंबी सुनवाई के बाद अब अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है।



कौन हैं अनिल मिश्रा

अनिल मिश्रा मध्य प्रदेश के विवादित पुलिस अधिकारियों में गिने जाते रहे हैं। वे भोपाल में डीएसपी के पद से प्रमोट होकर सीआईडी में एआईजी के पद तक पहुंचे थे। वे करीब तीन साल तक एआईजी के पद पर पदस्थ रहे। इसी दौरान भोपाल के चर्चित मन्नापुरम डकैती मामले में सोना खुर्द-बुर्द करने के गंभीर आरोप भी उन पर लगे थे। इसके अलावा वे इससे पहले एसटीएफ में डीएसपी के पद पर भी काम कर चुके हैं। इस दुष्कर्म मामले ने उनके करियर पर पहले से मौजूद विवादों में एक और गंभीर अध्याय जोड़ दिया है।



फैसले का महत्व

यह फैसला उन मामलों में एक अहम मिसाल माना जा रहा है जहां प्रभावशाली पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ न्याय मिलने में लंबा वक्त लगता है। पीड़िता को रिपोर्ट दर्ज कराने के करीब 11 साल बाद यह फैसला आया है। कानूनी जानकारों का मानना है कि इस तरह के मामलों में सख्त सजा से पीड़ितों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा बढ़ता है।



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