9 साल की मासूम ने 3 लोगों को दी नई जिंदगी, ब्रेनडेड घोषित होने पर किए अंगदान

Jageshwar prasad | Aug 29, 2026, 17:04 IST
9 साल की मासूम अंजलि ने जाते-जाते 3 लोगों को दिया नया जीवन
बाड़मेर के पचपदरा की 9 वर्षीय अंजलि ने ब्रेनडेड होने के बाद तीन लोगों को नई जिंदगी दी। सड़क हादसे का शिकार हुई अंजलि को जोधपुर एम्स में 27 अगस्त को डॉक्टरों ने ब्रेनडेड घोषित किया था। इसके बाद परिजनों की सहमति से उसकी दोनों किडनी और लिवर डोनेट किए।

समझें क्या है पूरा मामला

  • 9 साल की मासूम अंजलि ने जाते-जाते 3 लोगों को दिया नया जीवन।
  • एम्स जोधपुर में डॉक्टरों ने किया ब्रेनडेड घोषित, परिजनों ने किए अंगदान।
  • ग्रीन कॉरिडोर बनाकर जयपुर के SMS अस्पताल भेजी गई किडनी और लिवर।
  • शादी के 12 साल बाद पैदा हुई थी अंजलि, परिजनों ने भारी मन से लिया फैसला।
  • एम्स जोधपुर में अब तक 37 अंग किए जा चुके हैं डोनेट, समाज को बड़ा संदेश।

राजस्थान के जोधपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में एक 9 वर्षीय मासूम बच्ची के परिजनों ने अंगदान का साहसिक फैसला लेकर मानवता की अनूठी मिसाल पेश की है।



बाड़मेर जिले के पचपदरा की रहने वाली अंजलि सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गई थी, जिसके बाद उसे इलाज के लिए जोधपुर एम्स लाया गया था।



27 अगस्त को डॉक्टरों ने अंजलि को ब्रेनडेड घोषित कर दिया। डॉक्टरों की समझाइश और काउंसलिंग के बाद, शोक में डूबे परिजनों ने अंजलि के अंग दान करने का फैसला किया, जिससे तीन गंभीर मरीजों को नया जीवन मिला है।



ग्रीन कॉरिडोर बनाकर जयपुर भेजे गए अंग

शनिवार सुबह 11 बजे एम्स जोधपुर से जयपुर स्थित सवाई मानसिंह अस्पताल के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। पुलिस और प्रशासन के समन्वय से ट्रैफिक को सुचारू रखते हुए अंजलि की एक किडनी और लिवर को बेहद कम समय में जयपुर पहुंचाया गया।



वहीं, अंजलि की दूसरी किडनी को एम्स जोधपुर में ही एक जरूरतमंद मरीज में प्रत्यारोपित (Transplant) किया जा रहा है।



शादी के 12 साल बाद हुई थी अंजलि

अंजलि के पिता अशोक दास ने नम आंखों से बताया कि वे पेशे से ड्राइवर हैं और उनकी पत्नी गृहणी हैं। शादी के 12 साल बाद उनके घर में बच्चों की किलकारी गूंजी थी। 19 अगस्त को अंजलि जब स्कूल जा रही थी, तब सड़क पार करते समय एक बेकाबू डंपर ने उसे टक्कर मार दी थी।



सिर में गंभीर चोट लगने के कारण वह कोमा में चली गई थी। उन्होंने कहा कि शुरुआत में अंगदान का फैसला बेहद कठिन था, लेकिन यह सोचकर दिल को तसल्ली मिली कि उनकी बेटी किसी और के रूप में जीवित रहेगी।



एम्स जोधपुर का मृतक अंगदान कार्यक्रम

एम्स जोधपुर के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. अभिषेक भारद्वाज ने बताया कि जब मरीज ब्रेनडेड होता है, तो उसका दिमाग काम करना बंद कर देता है, लेकिन वेंटिलेटर की मदद से शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाई जाती है ताकि उन्हें सुरक्षित रखा जा सके।



एम्स जोधपुर ने मार्च 2024 में मृतक अंगदान कार्यक्रम की शुरुआत की थी और तब से लेकर अब तक यहां 37 अंग डोनेट किए जा चुके हैं।



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