जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी पर हुई बहस, बाहर आते ही चले लात-घूंसे
News In Short
- राजस्थान के अनूपगढ़ जिला कलेक्ट्रेट में PMO और PHC के बीच हाथापाई।
- कलेक्ट्रेट में स्वास्थ्य समिति की बैठक के बाद बहस हुई और बढ़ गया विवाद।
- PMO अन्य PHC से डॉक्टरों की नाइट ड्यूटी अपने यहां लगवाना चाहते थे।
- PHC के डॉक्टर ने कहा कि उनके खुद के अस्पताल पर मरीजों का भारी लोड है।
- जिला अस्पताल में डॉक्टरों के 33 पद स्वीकृत, लेकिन काम सिर्फ 5 ही संभाल रहे।
News In Detail
राजस्थान (Rajasthan) के अनूपगढ़ जिला कलेक्ट्रेट परिसर शनिवार देर शाम उस समय जंग का मैदान बन गया जब स्वास्थ्य विभाग के दो बड़े अधिकारी और डॉक्टर आपस में भिड़ गए। जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में शुरू हुई प्रशासनिक बहस कलेक्ट्रेट के बाहर आते-आते इतनी व्यक्तिगत हो गई कि डॉक्टरों के बीच मर्यादा तार-तार हो गई।
कलेक्टर की बैठक में शुरू हुई थी बहस
जानकारी के अनुसार, कलेक्ट्रेट में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में स्वास्थ्य समिति की बैठक चल रही थी। बैठक के दौरान अनूपगढ़ जिला अस्पताल के पीएमओ (PMO) डॉ. रघुवीर सिंह ने कलेक्टर से मांग की कि जिला अस्पताल में डॉक्टरों की भारी कमी है, इसलिए ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) से डॉक्टरों की ड्यूटी जिला अस्पताल में लगाई जाए।
इस पर रामसिंहपुर PHC के प्रभारी डॉ. जितेंद्र रणवा ने कहा कि रामसिंहपुर में मरीजों का दबाव बहुत ज्यादा है, वे वहां से किसी डॉक्टर की ड्यूटी नाइट शिफ्ट के लिए जिला अस्पताल में नहीं लगवा सकते। बैठक में भी दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई।
बाहर निकलते ही कॉलर तक पहुंचे हाथ
जैसे ही बैठक समाप्त हुई, रामसिंहपुर PHC के प्रभारी डॉ. जितेंद्र रणवा और PMO डॉ. रघुवीर सिंह कलेक्ट्रेट भवन से बाहर आए। कलेक्ट्रेट परिसर में दोनों के बीच इसी मुद्दे को लेकर दोबारा बहस शुरू हो गई। बातचीत इतनी बिगड़ी कि दोनों डॉक्टरों के बीच गाली-गलौज और देखते ही देखते हाथापाई शुरू हो गई। मौके पर मौजूद बीसीएमओ डॉ. दिनेश कुमार और अन्य स्टाफ ने बीच-बचाव कर दोनों को अलग किया।
इस मांग का ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी (BCMO) डॉ. दिनेश कुमार ने भी विरोध किया था। बीसीएमओ ने कहा कि आपके पास पहले से 5 डॉक्टर हैं। हमारे पास 5 पीएचसी पर कुल मिलाकर केवल 3 डॉक्टर हैं, ऐसे में ग्रामीण इलाकों से डॉक्टर हटाना संभव नहीं है।
33 पद स्वीकृत, काम कर रहे सिर्फ 5 डॉक्टर
इस पूरे फसाद की जड़ अनूपगढ़ जिला अस्पताल में डॉक्टरों की भारी कमी है। अस्पताल को जिला स्तर का दर्जा तो मिल गया, लेकिन संसाधन और स्टाफ ढांढस बंधाने लायक भी नहीं हैं:
कुल स्वीकृत पद: 33
कार्यरत डॉक्टर: 05 (इनमें से भी एक डॉक्टर प्रतिनियुक्ति यानी डेपुटेशन पर है)
रोजाना की ओपीडी: 700 से अधिक मरीज
मुख्य कमी: अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) जैसा बेहद महत्वपूर्ण पद भी लंबे समय से खाली चल रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
अनूपगढ़ कलेक्ट्रेट में किन डॉक्टरों के बीच हाथापाई हुई?
यह हाथापाई अनूपगढ़ जिला अस्पताल के PMO डॉ. रघुवीर सिंह और रामसिंहपुर PHC के डॉ. जितेंद्र रणवा के बीच हुई।
डॉक्टरों के बीच विवाद का मुख्य कारण क्या था?
विवाद का कारण जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए ग्रामीण पीएचसी (PHC) से डॉक्टरों की नाइट ड्यूटी जिला अस्पताल में लगाने की मांग थी, जिसका PHC प्रभारी और BCMO विरोध कर रहे थे।
अनूपगढ़ जिला अस्पताल में डॉक्टरों के कितने पद खाली हैं?
अस्पताल में डॉक्टरों के कुल 33 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 5 डॉक्टर ही कार्यरत हैं, जिनमें से भी एक प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) पर है। यानी 29 पद
अभी भी खाली हैं।
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