आसाराम ने जेल जाने से बचने के लिए फिर लगाई हाई कोर्ट में गुहार, अंतरिम जमानत हो रही कल खत्म

Ashish Bhardwaj | Apr 28, 2026, 17:38 IST
Photograph: (the sootr)
आसाराम बापू की 6 महीने की अंतरिम जमानत अवधि 29 अप्रैल को समाप्त हो रही है। उन्होंने अपनी जमानत अवधि बढ़ाने के लिए राजस्थान हाई कोर्ट में नया प्रार्थना पत्र पेश किया है।

News In Short

  • आसाराम बापू की 6 महीने की अंतरिम जमानत अवधि 29 अप्रैल को हो रही है समाप्त।
  • आसाराम ने जमानत अवधि बढ़ाने के लिए राजस्थान हाई कोर्ट में पेश किया नया प्रार्थना पत्र।
  • आसाराम के वकील ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति और इलाज का हवाला देते हुए जमानत बढ़ाने की मांग।
  • राजस्थान हाईकोर्ट में आसाराम की जमानत बढ़ाने पर कल होगी अहम सुनवाई।

News In Detail

यौन उत्पीड़न के आरोप में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम बापू के लिए जेल से बाहर रहने का समय खत्म हो रहा है। 29 अक्टूबर 2025 को राजस्थान हाई कोर्ट से मिली छह महीने की अंतरिम जमानत की मियाद 29 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रही है। ऐसे में आसाराम की ओर से जमानत अवधि को बढ़ाने के लिए 28 अप्रैल 2026 मंगलवार को एक नया प्रार्थना पत्र राजस्थान हाई कोर्ट में पेश किया गया है। इस आवेदन में आसाराम के इलाज का हवाला दिया गया है और उनकी जमानत अवधि को आगे बढ़ाने की मांग की गई है।



बीमारी और इलाज का हवाला

आसाराम के वकीलों ने अपने आवेदन में यह तर्क दिया कि 86 वर्षीय आसाराम अभी पूरी तरह से स्वस्थ नहीं हैं। उनका इलाज चल रहा है और उन्हें कुछ समय और जमानत की आवश्यकता है। वकील ने अदालत से अनुरोध किया है कि उन्हें इलाज के लिए और वक्त दिया जाए। इस आवेदन पर बुधवार, 29 अप्रैल को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ में सुनवाई होगी, जो आसाराम के लिए अहम साबित हो सकती है।



क्यों दी गई थी 6 महीने की जमानत

राजस्थान हाई कोर्ट ने पिछले साल 29 अक्टूबर 2025 को आसाराम को 6 महीने की अंतरिम जमानत दी थी। अदालत ने यह फैसला उनकी बढ़ती उम्र (86 वर्ष) और प्रोस्टेट कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को ध्यान में रखते हुए लिया था। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने उन्हें इलाज के लिए यह राहत दी थी।



आसाराम के मामले का अंतिम फैसला

29 अप्रैल को होने वाली सुनवाई आसाराम के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अदालत उन्हें इलाज के लिए और वक्त देती है, या फिर उन्हें जोधपुर सेंट्रल जेल की सलाखों के पीछे लौटना पड़ेगा।



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