आसाराम को मिली राहत, हाई कोर्ट ने अंतरिम जमानत 25 मई तक बढ़ाई
News In Short
- राजस्थान हाई कोर्ट ने आसाराम की जमानत अवधि 25 मई तक बढ़ाई।
- आसाराम की जमानत याचिका पर मेडिकल ग्राउंड पर हुई सुनवाई ।
- आसाराम को पहले 6 महीने की जमानत मिली थी, जो अब बढ़ाई गई।
- जमानत याचिका पर आसाराम ने कोर्ट में इलाज जारी होने का दिया हवाला।
- आसाराम नाबालिग से रेप मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं।
News In Detail
राजस्थान हाई कोर्ट ने आसाराम बापू की अंतरिम जमानत की अवधि को 25 मई 2026 तक बढ़ा दिया है। उनकी जमानत अवधि 6 मई को समाप्त होने वाली थी। लेकिन, उन्हें मेडिकल ग्राउंड पर राहत दे दी गई है। आसाराम बापू ने 28 अप्रैल को ही अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ाने का प्रार्थना-पत्र कोर्ट में पेश किया था।
जमानत बढ़ाने का फैसला
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसपी शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की बेंच ने बुधवार को आसाराम की जमानत अवधि बढ़ाने का आदेश दिया। आसाराम के अधिवक्ता यशपाल राजपुरोहित ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हाई कोर्ट उनकी अपील पर सुनवाई पूरी कर चुका है और अब निर्णय सुरक्षित रखा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि आसाराम का इलाज अभी जारी है, ऐसे में इलाज पूरी होने तक जमानत की अवधि बढ़ाई जाए।
पहले मिली थी जमानत
आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट से पहली बार 29 अक्टूबर 2025 को जमानत मिली थी। इस जमानत की याचिका मेडिकल आधार पर दायर की गई थी। कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की बेंच ने सुनवाई के बाद आसाराम को छह महीने की जमानत दी थी। यह जमानत 6 मई 2026 तक की थी, लेकिन अब इसे 25 मई तक बढ़ा दिया गया है।
नाबालिग से रेप मामले में सजा
आसाराम बापू नाबालिग से रेप के मामले में 2018 से आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। करीब 12 साल की सजा के बाद उन्हें पहली बार 7 जनवरी 2025 को मेडिकल कारणों से अंतरिम जमानत मिली थी। इसके बाद 30 अगस्त 2025 को उनकी जमानत अवधि समाप्त हो गई थी और उन्होंने सरेंडर कर दिया था। अब उन्हें फिर से मेडिकल आधार पर राहत मिली है और उनकी जमानत की अवधि 25 मई तक बढ़ाई गई है।
जमानत पर पहले भी हाईकोर्ट की सुनवाई
29 अक्टूबर 2025 को राजस्थान हाईकोर्ट ने आसाराम की सजा स्थगन और मेडिकल कारणों पर जमानत की याचिका पर सुनवाई की थी। इस मामले में आसाराम की ओर से दिल्ली से आए सीनियर एडवोकेट देवदत्त कामत ने पैरवी की थी, जबकि राजस्थान सरकार की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल दीपक चौधरी ने अपनी दलील रखी थी। पीड़िता की ओर से एडवोकेट पीसी सोलंकी ने भी पैरवी की थी। सभी पक्षों को सुनने के बाद बेंच ने छह महीने की जमानत दी थी।
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