राजस्थान निकाय चुनाव में धनबल का खेल, गहलोत बोले- भाजपा नहीं लक्ष्मी जी के मेयर बन रहे

Jageshwar prasad | Sept 17, 2026, 20:02 IST
अशोक गहलोत का बड़ा आरोप, पार्षदों को 2 करोड़ का प्रलोभन दे रही भाजपा
राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने भाजपा पर निकाय चुनाव में खरीद फरोख्त का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पार्षदों को 2-2 करोड़ रुपए का प्रलोभन दिया जा रहा है। पुलिस और प्रशासन पर दबाव बनाकर बोर्ड बनाने की कोशिश हो रही है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • गहलोत का बड़ा आरोप, 2-2 करोड़ का ऑफर।
  • निकाय चुनाव में खरीद फरोख्त का चल रहा खेल।
  • भाजपा 6065 वार्डों में हारी, गहलोत का दावा।
  • सीएम के गृह क्षेत्र में भी बहुमत से दूर रही भाजपा।
  • बीजेपी पर लोकतंत्र पर डाका और धनबल का आरोप लगाया।

पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने 17 सितंबर को प्रेस वार्ता की। उन्होंने भाजपा सरकार पर लोकतंत्र से खिलवाड़ का आरोप लगाया। कहा कि पार्षदों को 2 करोड़ तक का ऑफर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री के भरतपुर सहित कई बड़े नेताओं के गृह क्षेत्रों में भाजपा बहुमत से दूर है। फिर भी बोर्ड बनाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।



पार्षदों को 2 करोड़ का ऑफर

अशोक गहलोत ने कहा कि प्रदेश में इक्वल लेवल प्लेइंग फील्ड नहीं है। पुलिस की एकतरफा कार्रवाई हो रही है। पार्षदों को डराया जा रहा है। मंत्रियों को बैठाकर डेढ़ करोड़, दो करोड़ और ढाई करोड़ तक का ऑफर दिया जा रहा है।



उन्होंने कहा कि देश में भाजपा के पास पैसे की कमी नहीं है। देशभर में सरकारें गिराने का जो खेल हुआ। वही प्रेरणा अब जिलों और ब्लॉकों तक पहुंच गई है। यह धनबल का तमाशा है।



लक्ष्मी जी के मेयर बन रहे

गहलोत ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा नहीं, लक्ष्मी जी के मेयर और चेयरमैन बन रहे हैं। जो करोड़ों खर्च करके बनेंगे। वे जनता की सेवा नहीं करेंगे। वे अपनी लागत वसूलेंगे। इसका बोझ आम जनता पर पड़ेगा।



उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र पर डाका है। धनबल से बोर्ड बनाए जा रहे हैं। यह भ्रष्टाचार का नया रिकॉर्ड है।



बड़े नेताओं के गढ़ में हार

पूर्व मुख्यमंत्री ने आंकड़े भी रखे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के भरतपुर में भाजपा बहुमत से दूर है। केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी के अजमेर में भी यही हाल है। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के अलवर में बहुमत नहीं मिला।



केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के जोधपुर में भाजपा पिछड़ी। प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के पाली में भी बहुमत नहीं। पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के झालावाड़ में भी भाजपा बहुमत से चूकी। यह जनता का असली फैसला है।



वोट ज्यादा, सीट कम का खेल

गहलोत ने परिसीमन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में वोटों का अंतर सिर्फ 0.94 प्रतिशत है। भाजपा को 35.19 प्रतिशत और कांग्रेस को 34.25 प्रतिशत वोट मिले। लेकिन सीटों का फासला 5.5 प्रतिशत हो गया।



जोधपुर नगर निगम का उदाहरण दिया। जोधपुर में कांग्रेस को भाजपा से 14,282 वोट ज्यादा मिले। कांग्रेस को 42.22 प्रतिशत और भाजपा को 39.41 प्रतिशत वोट मिले। फिर भी दोनों को 44-44 सीटें मिलीं।



उन्होंने कहा कि वार्ड 99 में कांग्रेस समर्थक चार वार्डों को मिलाकर एक बना दिया। भाजपा समर्थक क्षेत्रों में एक वार्ड को दो-तीन में बांट दिया। जयपुर में भी कांग्रेस को 14,620 वोट ज्यादा मिले। फिर भी परिसीमन की वजह से भाजपा ज्यादा वार्ड जीत गई।



6065 वार्डों में भाजपा हारी

चुनाव परिणामों का विश्लेषण भी पेश किया। प्रदेश में कुल 10,244 वार्ड थे। भाजपा 6,065 वार्डों यानी 59 प्रतिशत में चुनाव हार गई। प्रदेश के 309 निकायों में से 223 यानी 72 प्रतिशत में भाजपा को बहुमत नहीं मिला।



10 नगर निगमों में से भाजपा सिर्फ 4 में बहुमत ला सकी। ये निगम भीलवाड़ा, जयपुर, कोटा और उदयपुर हैं। यह पिछले चुनाव से एक निगम कम है। इसके बाद भी प्रधानमंत्री द्वारा भाजपा की जीत की बधाई देना दुर्भाग्यपूर्ण है।



पुलिस और प्रशासन पर दबाव

गहलोत ने कहा कि हार मानने के बजाय दबाव बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय से एक आईएएस अधिकारी कलेक्टर और एसडीएम पर दबाव बना रहे हैं।



झुंझुनूं के मंडावा, नीमराना, टोंक, जोधपुर, कोटपूतली-बहरोड़, सीकर, धौलपुर, जालौर, अजमेर और बूंदी में दबाव की घटनाएं हुई हैं। निर्दलीय और कांग्रेस पार्षदों को डराया जा रहा है। बाड़ेबंदी पर दबिश दी जा रही है। परिजनों पर दबाव बनाया जा रहा है।



खैरथल में निर्वाचित पार्षद विक्रम चौधरी को तोड़कर दिल्ली में पार्टी में शामिल कराया गया। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने उन्हें ज्वाइन करवाया। इससे साबित होता है कि यह अभियान शीर्ष नेतृत्व की देखरेख में चल रहा है।



सीएम का रोड शो भी काम नहीं आया

गहलोत ने कहा कि सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग हुआ। मनमाना परिसीमन किया गया। मुख्यमंत्री ने खुद रोड शो किए। भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री ने मॉनिटरिंग की। फिर भी 64 प्रतिशत वोट भाजपा के खिलाफ पड़े। यह आंकड़ा बताता है कि जनता ने क्या फैसला दिया है।



अब ज्यादा से ज्यादा बोर्ड बनाने का दबाव है। इसलिए खरीद फरोख्त का खेल चल रहा है।



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