ठेका कर्मचारियों पर गहलोत ने CM भजनलाल को घेरा, पूछा- RLSDC क्यों नहीं बना

Saurabh Mishra | Sept 25, 2026, 18:44 IST
अशोक गहलोत
जोधपुर में केमिकल फैक्ट्री ब्लास्ट में गंभीर रूप से जले फायरकर्मियों से मिलने SMS अस्पताल पहुंचे अशोक गहलोत ने ठेकाकर्मियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने भजनलाल सरकार से 2023 में मंजूर RLSDC पर रुख साफ करने को कहा।

समझें क्या है पूरा मामला

  • अशोक गहलोत ने फिर उठाया ठेकाकर्मियों का मुद्दा।
  • 20-25 साल बाद भी मिल रही सिर्फ 7-8 हजार सैलरी।
  • RLSDC पर भजनलाल सरकार से मांगा साफ जवाब।
  • जोधपुर अग्निकांड के फायरकर्मियों से मिलने पहुंचे गहलोत।
  • 2023 में कैबिनेट ने दी थी RLSDC योजना को मंजूरी।

जयपुर के SMS अस्पताल में जोधपुर के केमिकल फैक्ट्री ब्लास्ट में झुलसे फायरकर्मियों से मिलने पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर ठेकाकर्मियों का मुद्दा उठाया। घायलों में कुछ नगर निगम में ठेके पर काम करने वाले कर्मचारी भी हैं। इसी दौरान ठेका प्रथा पर बात करते हुए गहलोत ने भजनलाल सरकार से पूछा कि आखिर ठेकाकर्मियों को लेकर उसका आगे का प्लान क्या है?



गहलोत ने फिर उठाया संविदा कर्मचारियों का मुद्दा

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में लोग सालों से ठेके (संविदा कर्मचारी) पर काम कर रहे, लेकिन उनकी आमदनी बेहद कम है। कई कर्मचारी 20 से 25 साल से काम करने के बावजूद 7 से 8 हजार रुपए महीने में गुजारा कर रहे। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने करीब एक लाख संविदाकर्मियों को स्थायी करने की दिशा में फैसला किया था, लेकिन सरकार बदलने के बाद यह काम आगे नहीं बढ़ा।



भजनलाल सरकार ठेका कर्मचारियों पर रुख साफ करे: गहलोत

इसी मुद्दे को लेकर गहलोत ने भजनलाल सरकार से अपना रुख साफ करने को कहा। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से आग्रह किया कि जनहित से जुड़े फैसलों को सिर्फ इसलिए नहीं रोका जाना चाहिए कि वे पिछली सरकार ने किए थे। सरकार को बताना चाहिए कि संविदा और ठेकाकर्मियों को नियमित करने और उनकी नौकरी को सुरक्षित बनाने के लिए वह क्या करने जा रही है।



गहलोत ने कहा- 7-8 हजार में गुजारा कर रहे ठेका कर्मचारी

गहलोत ने ठेकाकर्मियों की आर्थिक स्थिति का मुद्दा उठाते हुए कहा कि लंबे समय से काम करने के बावजूद कई कर्मचारियों को बेहद कम पैसा मिलता है। उनका कहना था कि ठेकेदार और प्लेसमेंट एजेंसियों के बीच कर्मचारियों को पूरा पैसा और दूसरी सुविधाएं नहीं मिल पातीं।



गहलोत ने पूछा क्यों नहीं RLSDC बना

इसी समस्या को दूर करने के लिए पिछली कांग्रेस सरकार ने राजस्थान लॉजिस्टिक्स सर्विस डिलीवरी कॉर्पोरेशन (RLSDC) बनाने का फैसला किया था। गहलोत के मुताबिक इसका मकसद ठेकेदार या प्लेसमेंट एजेंसी के बजाय सरकारी व्यवस्था के जरिए कर्मचारियों को काम उपलब्ध कराना और उनका शोषण रोकना था।



उन्होंने राजस्थान सरकार से कहा कि ठेकाकर्मियों को नियमित कैसे किया जाएगा, उन्हें बेहतर मानदेय कैसे मिलेगा और उनकी नौकरी को लेकर क्या व्यवस्था होगी, इन सवालों पर सरकार को अपना विजन लोगों के सामने रखना चाहिए।



फरवरी में भी गहलोत ने उठाया था RLSDC का मुद्दा

यह पहला मौका नहीं है जब गहलोत ने भजनलाल सरकार के सामने RLSDC का मुद्दा उठाया फरवरी 2026 में भी उन्होंने इस योजना को लेकर सरकार पर सवाल खड़े किए थे।



तब गहलोत ने कहा था कि उनकी सरकार ने प्लेसमेंट एजेंसियों के जरिए काम करने वाले कर्मचारियों को पूरा मानदेय और EPF-ईएसआई जैसी सामाजिक सुरक्षा देने के लिए RLSDC बनाने का फैसला किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि सरकार बदलने के बाद इस पर आगे काम नहीं हुआ।



गहलोत ने उस समय भी राज्य सरकार से RLSDC के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की मांग की थी। उनका कहना था कि इससे कम आय वाले कर्मचारियों और उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी।



अब करीब सात महीने बाद गहलोत ने एसएमएस अस्पताल से यही मुद्दा दोबारा उठाया। इस बार उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से ठेकाकर्मियों को लेकर सरकार का विजन साफ करने को कहा है।



2023 में कैबिनेट ने RLSDC को दी थी मंजूरी

RLSDC का प्रस्ताव पिछली गहलोत सरकार के आखिरी महीनों में सामने आया था। 1 अक्टूबर 2023 को हुई कैबिनेट बैठक में राजस्थान लॉजिस्टिक्स सर्विस डिलीवरी कॉर्पोरेशन बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। इससे पहले 2023-24 के बजट में भी इसका ऐलान किया गया था।



योजना का मकसद सरकारी विभागों और संस्थाओं में प्लेसमेंट एजेंसियों के जरिए कर्मचारी लेने की व्यवस्था को बदलना था। इसके लिए राज्य सरकार के स्वामित्व वाली कंपनी बनाने की योजना थी।



कॉर्पोरेशन को पूर्व सैनिकों के लिए काम करने वाली REXCO की तर्ज पर तैयार करने की बात कही गई थी। इसके जरिए सरकारी विभागों और अर्ध-सरकारी संस्थाओं के लिए जरूरत के हिसाब से कर्मचारियों को उपलब्ध कराया जाना था।



क्या है RLSDC, ठेकाकर्मियों को क्या फायदा होता?

RLSDC बनाने के पीछे सबसे बड़ी वजह प्लेसमेंट एजेंसियों पर निर्भरता कम करना था। पुरानी व्यवस्था में सरकारी विभागों को कर्मचारी उपलब्ध कराने का काम निजी एजेंसियां करती थीं। नई व्यवस्था में यह काम सरकारी कंपनी के जरिए करने की योजना बनाई गई थी।



इसमें कुशल और अकुशल कर्मचारियों का रजिस्ट्रेशन और चयन पारदर्शी तरीके से करने की व्यवस्था प्रस्तावित थी। इससे कर्मचारी और सरकारी विभाग के बीच निजी प्लेसमेंट एजेंसी की भूमिका खत्म या कम होती।



इसका एक बड़ा फायदा मानदेय से जुड़ा था। योजना के तहत कर्मचारियों को बिना गैर-जरूरी कटौती के पूरा पारिश्रमिक देने की बात कही गई थी। साथ ही ईपीएफ और ESI जैसी सामाजिक सुरक्षा का लाभ पक्का करना भी इसके मकसदों में शामिल था।



2023-24 के बजट भाषण में कहा गया था कि 1 जनवरी 2021 से पहले से काम कर रहे ठेकाकर्मियों को जरूरत के आधार पर RLSDC के जरिए लेने और बिना कटौती पूरा वेतन देने की व्यवस्था की जाएगी।



100% सरकारी कंपनी बनाने की थी योजना

RLSDC को पूरी तरह राज्य सरकार के स्वामित्व वाली कंपनी के रूप में बनाने का प्रस्ताव था। इसका मकसद अलग-अलग सरकारी विभागों और संस्थाओं में जरूरत के हिसाब से कर्मचारियों की उपलब्धता पक्का करना था।



योजना के तहत कर्मचारियों का रिकॉर्ड एक सरकारी सिस्टम में आने से भर्ती और भुगतान की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने का दावा किया गया था। सरकार का तर्क था कि इससे कर्मचारियों को एजेंसियों की मनमानी कटौती से राहत मिलेगी और विभागों को भी जरूरत के मुताबिक प्रशिक्षित कर्मचारी मिल सकेंगे।



संविदाकर्मी और प्लेसमेंट एजेंसी के कर्मचारी में फर्क

इस पूरे मामले में संविदाकर्मियों और प्लेसमेंट एजेंसियों के जरिए लगे ठेकाकर्मियों के बीच फर्क भी अहम है। पिछली सरकार ने संविदा पर लगे कर्मचारियों के लिए राजस्थान कॉन्ट्रैक्चुअल हायरिंग टू सिविल पोस्ट्स रूल्स, 2022 के तहत अलग व्यवस्था बनाई थी।



इसके बाद 2023-24 के बजट में पहले से काम कर रहे संविदाकर्मियों को इन नियमों के दायरे में लाकर स्थायी रोजगार की दिशा में रास्ता बनाने की बात कही गई। वहीं प्लेसमेंट एजेंसियों के जरिए लगे कर्मचारियों के लिए अलग से RLSDC की घोषणा की गई थी। यानी RLSDC का मुख्य फोकस प्लेसमेंट एजेंसियों के जरिए सरकारी विभागों में काम कर रहे कर्मचारियों पर था।



अब गहलोत ने भजनलाल सरकार से मांगा जवाब

SMS अस्पताल में घायल फायरकर्मियों से मुलाकात के बाद गहलोत ने इसी पुराने फैसले को फिर सामने रखा। उन्होंने कहा कि सरकार बदलने पर जनहित के फैसलों को रोकने के बजाय यह देखना चाहिए कि उनका फायदा जरूरतमंद लोगों तक कैसे पहुंचाया जा सकता।



गहलोत का कहना है कि ठेकाकर्मियों की नौकरी, मानदेय और नियमित करने जैसे मुद्दों पर राज्य सरकार को स्थिति साफ करनी चाहिए। फरवरी में RLSDC को आगे बढ़ाने की मांग के बाद अब उन्होंने एक बार फिर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से इस पर फैसला लेने की मांग की है।



ऐसे में सवाल फिर वही है कि अक्टूबर 2023 में कैबिनेट से पास RLSDC को लेकर मौजूदा सरकार आगे क्या रुख अपनाती है और प्लेसमेंट एजेंसियों के जरिए वर्षों से काम कर रहे कर्मचारियों के लिए क्या व्यवस्था करती है।



FAQ

  1. अशोक गहलोत ने ठेका कर्मचारियों को लेकर क्या कहा?
    राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने ठेकाकर्मियों के कम मानदेय और उन्हें नियमित करने का मुद्दा उठाया। उन्होंने सरकार से RLSDC योजना पर स्पष्ट रुख बताने को कहा।
  2. राजस्थान का RLSDC क्या है?
    RLSDC यानी राजस्थान लॉजिस्टिक्स सर्विस डिलीवरी कॉर्पोरेशन एक प्रस्तावित सरकारी कंपनी है, जिसका मकसद प्लेसमेंट एजेंसियों की जगह सरकारी व्यवस्था से कर्मचारी उपलब्ध कराना था।
  3. RLSDC को मंजूरी कब मिली थी?
    RLSDC को 1 अक्टूबर 2023 को तत्कालीन गहलोत सरकार की कैबिनेट बैठक में मंजूरी दी गई थी, लेकिन सरकार बदलने के बाद इस पर आगे काम नहीं बढ़ा।

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