पीएम का अपमान देश की तौहीन, गहलोत ने ट्रंप की टिप्पणियों को बताया शर्मनाक
News In Short
- गहलोत ने पीएम मोदी पर ट्रंप की टिप्पणियों को शर्मनाक करार दिया।
- गहलोत बोले, पार्टी अलग हो सकती है, पर प्रधानमंत्री पूरे देश के।
- वैश्विक युद्ध के बीच केवल गांधी दर्शन ही शांति का एकमात्र विकल्प।
- नई पीढ़ी सच को सच और गलत को गलत कहना सीखे।
- न्यायपालिका,चुनाव आयोग और जांच एजेंसियों का घोंटा जा रहा दम।
News In Detail
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार की विदेश नीति और देश के वर्तमान लोकतांत्रिक हालातों पर निशाना साधा है। जयपुर में आयोजित दांडी मार्च समापन की शांति सभा को संबोधित करते हुए गहलोत ने पीएम नरेंद्र मोदी पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कथित टिप्पणियों को बेहद शर्मनाक करार दिया। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि यदि वे सही को सही और गलत को गलत नहीं कहेंगे तो आने वाले समय में देश को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
ट्रंप के बयानों पर नाराजगी
विदेश नीति के मुद्दे पर केंद्र को घेरते हुए गहलोत ने कहा कि आज हमारी कूटनीति किस दिशा में जा रही है, इसका कोई स्पष्ट अंदाजा नहीं है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री मोदी के बारे में दिए गए बयानों पर गहरा दुख व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी हमारे देश के गौरव के प्रतीक हैं। हमारी पार्टियां अलग हो सकती हैं, विचारधाराएं भिन्न हो सकती हैं, लेकिन वह पूरे देश के प्रधानमंत्री हैं। विदेशी राष्ट्र प्रमुख हमारे प्रधानमंत्री की बेइज्जती करे तो यह बर्दाश्त के बाहर है। ट्रंप का यह कहना कि मोदी उन्हें खुश करने में लगे हैं या वे मोदी का राजनीतिक करियर खत्म कर सकते हैं, बेहद आपत्तिजनक है। किसी राष्ट्रपति की ऐसी हिम्मत कैसे हुई और हम इस पर चुप क्यों हैं, यह चिंता का विषय है।
मौन धारण करना आत्मघाती
गहलोत ने नई पीढ़ी को संबोधित करते हुए कहा कि देश में हो रही घटनाओं पर प्रतिक्रिया देना अनिवार्य है। उन्होंने आश्चर्य जताया कि आखिर जनता ने मौन क्यों धारण कर रखा है। पूर्व सीएम ने कहा कि लोकतंत्र तभी जीवित रहता है, जब लोग निर्भीक होकर सच बोलें।
उन्होंने राहुल गांधी द्वारा संविधान बचाने की मुहिम का समर्थन करते हुए कहा कि यदि संविधान कमजोर हुआ तो नागरिकों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। युवाओं को विचारधारा के आधार पर आगे आकर भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहना चाहिए।
खतरे में लोकतंत्र और संस्थाओं की स्वायत्तता
लोकतंत्र की स्थिति पर चिंता जताते हुए गहलोत ने आरोप लगाया कि देश की महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थाएं आज दबाव में काम कर रही हैं। लोग न्याय की अंतिम उम्मीद लेकर अदालत जाते हैं। लेकिन आज न्यायपालिका पर भारी दबाव महसूस किया जा रहा है।
केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग हो रहा है। फैसले निष्पक्ष होने के बजाय मनमर्जी से लिए जा रहे हैं। चुनाव आयोग जैसी स्वतंत्र संस्था भी आज स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने में सक्षम नहीं दिख रही है।
अमेरिका की भूमिका पर सवाल
अशोक गहलोत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर वेनेजुएला के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए अमेरिका की आलोचना की। उन्होंने कहा कि एक देश के राष्ट्रपति द्वारा दूसरे देश के राष्ट्राध्यक्ष के साथ किया गया व्यवहार निंदनीय है। फिर भी पूरी दुनिया इस पर चुप रही।
उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान-इजरायल संघर्ष का उदाहरण देते हुए कहा कि युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है। ईरान में मासूम बच्चियों के स्कूल पर हुए हमले का जिक्र करते हुए वे भावुक हुए और विश्व शांति के लिए प्रार्थना की।
गांधीवाद का रास्ता ही एकमात्र विकल्प
संबोधन के अंत में गहलोत ने स्पष्ट किया कि वर्तमान वैश्विक संकटों का समाधान केवल महात्मा गांधी के शांति और अहिंसा के मार्ग में ही निहित है। शांति और अहिंसा विभाग पर उन्होंने कहा कि राजस्थान देश का पहला राज्य था जिसने गांधीवादी मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए अलग विभाग बनाया। देशभर में राजस्थान में गांधीवादी कार्यकर्ता सर्वाधिक सक्रिय हैं।
गहलोत ने जोर देकर कहा कि दो अक्टूबर को पूरा विश्व अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस मनाता है। यह इस बात का प्रमाण है कि गांधी आज भी प्रासंगिक हैं। हमें गांधी दर्शन को फैलाकर समाज में प्रेम और सद्भाव को जीवित रखना होगा।
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