गहलोत बोले मराठी केंद्रों का स्वागत, लेकिन पहले राजस्थानी भाषा को मिले मान्यता

Jageshwar prasad | Jul 16, 2026, 23:05 IST
गहलोत बोले मराठी केंद्रों का स्वागत, लेकिन पहले राजस्थानी भाषा को मिले मान्यता
राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे द्वारा सभी विश्वविद्यालयों में मराठी भाषा अध्ययन केंद्र खोले जाने के आदेश दिए। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसका स्वागत किया लेकिन सभी विश्वविद्यालयों में राजस्थानी भाषा विभाग स्थापित करने की मांग की।

समझें क्या है पूरा मामला

  • राजस्थानी भाषा को पहले मान्यता दो, गहलोत ने उठाई मांग।
  • सभी विश्वविद्यालयों में राजस्थानी भाषा विभाग खोलने की भी मांग।
  • मराठी अध्ययन केंद्रों का स्वागत, पहले राजस्थानी को मिले अधिकार।
  • गहलोत ने कहा राजस्थानी को 8वीं अनुसूची में शामिल करे मोदी सरकार।
  • केवल 4 यूनिवर्सिटी में राजस्थानी विभाग, पूर्व CM ने जताई चिंता।

राज्यपाल हरिभाऊ बागडे की ओर से सभी विश्वविद्यालयों में मराठी भाषा के अध्ययन केंद्र खोले जाने को अनिवार्य किए जाने का आदेश चर्चा का विषय बना हुआ है। इस मामले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की प्रतिक्रिया सामने आई है।



उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए इसका स्वागत है, लेकिन पहले सभी विश्वविद्यालयों में राजस्थानी भाषा विभाग स्थापित करने की मांग की है। गहलोत ने केंद्र सरकार से राजस्थानी भाषा को 8वीं अनुसूची में शामिल करने का आग्रह भी किया है।



मराठी अध्ययन का स्वागत, लेकिन राजस्थानी पहले

गहलोत ने लिखा कि राजस्थान में अन्य भारतीय भाषाओं का सम्मान और उनका अध्ययन स्वागत योग्य है। विश्वविद्यालयों में मराठी के साथ-साथ तमिल, तेलुगु, कन्नड़ जैसी समृद्ध भाषाओं के केंद्र खुलेंगे तो भाषाई विविधता मजबूत होगी और राष्ट्रीय एकता को बल मिलेगा।



उन्होंने चिंता जताई कि आज प्रदेश के मात्र 4 विश्वविद्यालयों में ही राजस्थानी भाषा का अलग विभाग है। गहलोत ने राज्य सरकार और राजभवन से आग्रह किया कि बाहरी भाषाओं से पहले प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में राजस्थानी भाषा के विभाग और अध्ययन केंद्र स्थापित किए जाएं।



राजस्थानी को संवैधानिक मान्यता देने की मांग

पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से भी अपील की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने 25 अगस्त 2003 को विधानसभा से प्रस्ताव पारित कर राजस्थानी भाषा को संवैधानिक दर्जा दिलाने की मुहिम शुरू की थी।



गहलोत ने कहा कि केंद्र सरकार राजस्थानी भाषा को अविलंब 8वीं अनुसूची में शामिल कर संवैधानिक मान्यता दे। मायड़ भाषा का सम्मान और इसका संरक्षण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।



क्या है 8वीं अनुसूची?

भारतीय संविधान की 8वीं अनुसूची में 22 भाषाओं को मान्यता प्राप्त है। इसमें राजस्थानी भाषा शामिल नहीं है। संवैधानिक मान्यता मिलने पर राजस्थानी भाषा को सरकारी कामकाज, शिक्षा और परीक्षाओं में प्रयोग करने का अधिकार मिल जाता है। यह भाषा के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।



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