एक और जल जीवन मिशन जैसा घोटाला, बिना काम के ही कर दिया पेमेंट
समझें क्या है पूरा मामला
- अटल भूजल योजना में गड़बड़ी के आरोप, चीफ इंजीनियर को चार्जशीट।
- धौलपुर में 1.35 करोड़ के टेंडर में बिना काम भुगतान का आरोप।
- नितानंद शिक्षा समिति पर काम नहीं करने का आरोप लगा।
- फर्म को 7 लाख रुपए से ज्यादा भुगतान किए जाने का मामला।
- सूरजभान सिंह से 15 दिन में जवाब मांगा गया है।
जल जीवन मिशन की तरह अब केंद्र सरकार की एक और योजना में घोटाला सामने आया है। आरोप है कि भू-जल विभाग के परियोजना निदेशक और चीफ इंजीनियर सूरजभान सिंह ने एक चहेती फर्म को बिना काम के ही लाखों रुपए का फायदा पहुंचाया।
केंद्र की अटल भूजल योजना के तहत एक कंपनी को धौलपुर जिले में 1 करोड़ रुपए से ज्यादा का टेंडर जारी किया गया था। लेकिन आरोप है कि फर्म ने जमीन पर कोई काम ही नहीं किया।
जिम्मेदार अफसर ने नहीं की कार्रवाई
आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी ने न तो समय रहते कंपनी को ब्लैक लिस्ट किया और न ही विभाग की ओर से भेजे गए नोटिसों का कोई जवाब दिया। इसके बाद राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया।
राज्य सरकार ने 14 जुलाई 2026 को चीफ इंजीनियर सूरजभान सिंह को चार्जशीट थमाई है। उनसे 15 दिन के भीतर जवाब मांगा गया है।
1.35 करोड़ का टेंडर, दौसा की संस्था को मिला काम
जानकारी के मुताबिक राजस्थान सरकार ने केंद्र की अटल भूजल योजना के तहत धौलपुर जिले में कुल 1 करोड़ 35 लाख 36 हजार 289 रुपए के टेंडर निकाले थे। इसका वर्क ऑर्डर दौसा की नितानंद शिक्षा समिति नाम की संस्था को जारी हुआ था।
इस टेंडर का मकसद जिले के अलग-अलग जल संसाधनों को संरक्षित करना था। फर्म को शर्तों के मुताबिक मार्च 2025 तक जिलेभर में कई काम पूरे करके देने थे।
फर्म को सौंपे गए थे ये अहम काम
टेंडर के तहत फर्म को धौलपुर की सभी ग्राम पंचायतों के लिए जल सुरक्षा योजना तैयार करनी थी। इसके साथ ही जल स्रोतों और जलाशयों की सटीक जीपीएस (GPS – Global Positioning System) लोकेशन का डेटा भी जुटाना था।
हर ग्राम पंचायत की आबादी के हिसाब से जल संसाधनों का सर्वे भी किया जाना था। इसके अलावा चेक डैम, तालाब, मेड़, कुएं और ट्यूबवेल जैसे जल स्रोतों की डिजिटल मैपिंग यानी जियो-रेफरेंसिंग करनी थी।
फर्म को जिले के लिए एक वार्षिक एक्शन प्लान भी तैयार करना था और उसे जमीनी स्तर पर लागू करना था। काम पूरा होने के बाद आए बदलावों की समीक्षा भी करनी थी, ताकि ग्रामीणों को सिंचाई और पेयजल की बेहतर सुविधा मिल सके।
ग्राउंड पर काम जीरो, फिर भी हुआ भुगतान
आरोप है कि फर्म ने कार्य आदेश की शर्तों के मुताबिक तय समय में कोई काम नहीं किया। इसके बावजूद जिम्मेदार अफसर ने फर्म पर मेहरबानी दिखाते हुए दो बार भुगतान जारी कर दिया।
पहला भुगतान दिसंबर 2022 से फरवरी 2023 के बीच 3 लाख 11 हजार 643 रुपए का किया गया। दूसरा भुगतान वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2023-24 के बीच 3 लाख 92 हजार 107 रुपए का हुआ। इस तरह कुल मिलाकर 7 लाख 3 हजार 750 रुपए का भुगतान कर दिया गया।
चीफ इंजीनियर की थी पूरी जिम्मेदारी
इस पूरे प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग से लेकर भुगतान तक की जिम्मेदारी भू-जल विभाग के परियोजना निदेशक और चीफ इंजीनियर सूरजभान सिंह के पास थी। कार्मिक विभाग ने 14 जुलाई 2026 को उनके खिलाफ चार्जशीट जारी की है।
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