7 लाख की सुपारी, स्कॉर्पियो से कुचलवाई मां, अब जमानत याचिका खारिज
समझें क्या है पूरा मामला
- मां की हत्या आरोपी बेटी आयुषी को कोर्ट से नहीं मिली जमानत।
- कोर्ट बोला, गलत फंसाए जाने की बात नहीं लगती सही।
- मां से मनमुटाव के सबूत मिलने का कोर्ट ने किया जिक्र।
- फरार चचेरे भाई की तलाश तक जमानत देना खतरनाक।
- संपत्ति और नौकरी के लालच में हुई मां की हत्या, आरोप।
जयपुर में मां नीरज शर्मा हत्याकांड के चर्चित मामले में बेटी आयुषी की जमानत खारिज हो गई है। अदालत ने कहा कि जांच और तथ्यों को देखकर यह नहीं लगता कि आरोपी को गलत फंसाया गया है।
कोर्ट के अनुसार मां और बेटी के बीच मनमुटाव के सबूत भी मिले हैं। मामले का एक अन्य आरोपी अभी भी फरार है, इसलिए जांच प्रभावित होने की आशंका है।
कोर्ट ने क्या कहा?
महानगर प्रथम की एडीजे-6 कोर्ट की जज श्वेता दाधीच ने बुधवार को यह आदेश दिया। उन्होंने कहा कि अब तक की जांच और तथ्यों के आधार पर प्रथमदृष्टया ऐसा नहीं लगता कि आरोपी को फंसाया गया है। अदालत ने अपने आदेश में मां-बेटी के बीच मनमुटाव के तथ्यों का भी उल्लेख किया।
अदालत ने कहा कि मामले का एक आरोपी बलराम उर्फ रवि अभी फरार है और जांच अभी बाकी है। कोर्ट के अनुसार इस स्टेज पर जमानत देने से जांच प्रभावित होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
बचाव पक्ष का तर्क
आयुषी की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता निशांत शर्मा, केतन धाभाई और कामिल हुसैन ने अदालत में कहा कि मृतका के परिजनों के दबाव में उसे फंसाया गया है। उनका कहना था कि आयुषी से न तो कोई बरामदगी हुई है और न ही कोई बरामदगी बाकी है।
बचाव पक्ष के अनुसार आयुषी का मामले के अन्य आरोपियों से कोई सीधा संबंध नहीं है। वकीलों ने बताया कि परिवार में अब सिर्फ आयुषी और उसका भाई बचे हैं, जो पूरी तरह उस पर आश्रित है। उनके अनुसार भाई गंभीर बीमारी से पीड़ित है और सामान्य सामाजिक व्यवहार करने में सक्षम नहीं है।
वकीलों ने यह भी कहा कि उसकी घटनास्थल पर मौजूदगी नहीं थी और आयुषी का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं है। उनके अनुसार मामले के ट्रायल में लंबा समय लगेगा, इसलिए जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए।
पुलिस और परिवादी पक्ष का विरोध
पुलिस और परिवादी पक्ष के अधिवक्ता ने जमानत का कड़ा विरोध किया। उनका कहना था कि आरोपी ने संपत्ति हड़पने और अनुकंपा नियुक्ति पाने की नीयत से मां की हत्या करवाई। उनके अनुसार यह एक बेहद गंभीर मामला है, इसलिए आरोपी को जमानत नहीं दी जानी चाहिए।
पक्ष ने यह भी कहा कि मामले का एक आरोपी अभी फरार है। उनके अनुसार उसकी गिरफ्तारी के बाद ही पूरी जांच पूरी हो सकेगी। इसी आधार पर जमानत याचिका का पुरजोर विरोध किया गया।
अब जानिए मूल घटना
प्रतापनगर के रविंद्र नगर निवासी नीरज शर्मा के पति का करीब एक साल पहले निधन हुआ था। वे कोर्ट में एलडीसी (Lower Division Clerk) के पद पर कार्यरत थे। पति के निधन के आठ महीने बाद अनुकंपा के आधार पर नीरज को उसी पद पर नौकरी मिली थी। नीरज अपने 16 साल के बेटे के साथ रहती थीं।
3 जुलाई को शाम करीब 4:45 बजे नीरज बेटे को कोचिंग छोड़कर घर लौट रही थीं। इसी दौरान एक तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने उन्हें टक्कर मार दी। पुलिस के अनुसार टक्कर की रफ्तार करीब 130 किलोमीटर प्रति घंटा थी, जिससे महिला उछलकर करीब 100 फीट दूर जा गिरीं। मौके पर ही उनकी मौत हो गई और स्कॉर्पियो चालक फरार हो गया।
हादसे से हत्याकांड तक की जांच
शुरुआत में इसे सड़क हादसा माना गया था। लेकिन पुलिस जांच में यह सुनियोजित हत्या निकली। पुलिस के अनुसार बेटी आयुषी ने अपने ताऊ के बेटे बलराम उर्फ रवि और मोहन स्वरूप और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर 7 लाख रुपए में सौदा किया था।
पुलिस का कहना है कि हत्या की वजह संपत्ति और सरकारी नौकरी से जुड़ी थी। आरोप है कि आयुषी खुद अनुकंपा नियुक्ति पाना चाहती थी और परिवार की संपत्ति पर पूरा नियंत्रण चाहती थी। पुलिस ने इस मामले में आयुषी और उसके जेठ समेत कुल सात लोगों को गिरफ्तार किया है। वारदात में इस्तेमाल स्कॉर्पियो भी बरामद कर ली गई है।
फरार आरोपी की तलाश जारी
मामले का सह-आरोपी बलराम अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है। पुलिस के अनुसार उसकी गिरफ्तारी के बाद ही पूरी जांच पूरी हो सकेगी। फिलहाल आयुषी की जमानत याचिका खारिज होने के बाद वह न्यायिक हिरासत में ही रहेगी।
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