बाबूलाल बैरवा का निधन, 9 चुनाव लड़े, चार बार पहुंचे विधानसभा
News In Short
- राजस्थान में चार बार विधायक रहे बाबूलाल बैरवा का निधन।
- बाबूलाल बैरवा लंबे समय से चल रहे थे अस्वस्थ्स।
- जयपुर के एसएमएस अस्पताल में चल रहा था इलाज।
- बाबूलाल बैरवा ने अपने जीवन में नौ बार चुनाव लड़ा।
- बैरवा ने कई बार पार्टियां बदली, अब वे कांग्रेस में थे।
News In Detail
सुनील जैन@अलवर
राजस्थान की राजनीति विशेषकर मेवात क्षेत्र के कद्दावर नेता बाबूलाल बैरवा का शनिवार तड़के निधन हो गया। कठूमर विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक रहे बैरवा काफी समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनका जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल (SMS) में उनका उपचार जारी था। उन्होंने अस्पताल में ही अंतिम सांस ली।
राजनीतिक गलियारों में शोक
दो दिन पूर्व ही नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने जयपुर के एसएमएस अस्पताल पहुंचकर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली थी और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की थी। उनके पार्थिव शरीर को खेड़ली लाया जा रहा है। उनके समर्थक और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में अंतिम दर्शन के लिए खेड़ली पहुंच रहे हैं, जहां आज ही उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
विधानसभा का सफर
बाबूलाल बैरवा का राजनीतिक सफर बेहद उतार-चढ़ाव भरा और संघर्षशील रहा। उन्होंने 1977 से 2018 के बीच कुल 9 बार विधानसभा चुनाव लड़ा, जिसमें से 4 बार उन्हें क्षेत्र की जनता ने अपना प्रतिनिधि चुनकर जयपुर भेजा। उनका विधायी कार्यकाल इस प्रकार रहा:
1980-85: सातवीं राजस्थान विधानसभा के सदस्य।
1985-90: आठवीं राजस्थान विधानसभा के सदस्य।
2008-13: तेरहवीं राजस्थान विधानसभा के सदस्य।
2018-23: पंद्रहवीं राजस्थान विधानसभा के सदस्य।
वे 1977 से लेकर 2023 तक विधानसभा की विभिन्न महत्वपूर्ण समितियों के सदस्य भी रहे, जहां उन्होंने प्रदेश के विकास और क्षेत्र की समस्याओं को प्रमुखता से रखा।
दलों से ऊपर जननेता की छवि
बैरवा की राजनीति किसी एक विचारधारा तक सीमित नहीं रही। वे अपनी बेबाक कार्यशैली और मिलनसार स्वभाव के लिए जाने जाते थे। अपने करियर में उन्होंने चार बार पार्टियां बदलीं। वे दो बार कांग्रेस के टिकट पर, एक बार भारतीय जनता पार्टी से और एक बार निर्दलीय विधायक के रूप में चुने गए। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में इनेलो और राजपा जैसी पार्टियों का भी साथ दिया, लेकिन अंतिम समय में वे कांग्रेस परिवार का हिस्सा थे।
व्यक्तिगत जीवन और पृष्ठभूमि
5 नवंबर 1953 को अलवर जिले की कठूमर तहसील के ग्राम रोनीजाथान में जन्मे बाबूलाल बैरवा एक साधारण किसान परिवार से आते थे। उनके पिता स्व. श्री छुट्टन लाल बैरवा और माता स्व. श्रीमती धापा देवी थीं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के बाद जयपुर के प्रतिष्ठित महाराजा कॉलेज से स्नातक पूर्व (बी.एससी प्रथम वर्ष) की पढ़ाई की थी।
उनका विवाह 21 नवंबर 1972 को श्रीमती राजन्ती देवी के साथ हुआ था। वे अपने पीछे तीन पुत्रों, एक पुत्री और पोते-पोतियों से भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। वर्तमान में वे खेड़ली कस्बे में निवास कर रहे थे।
मिलनसार व्यक्तित्व के धनी
बाबूलाल बैरवा को क्षेत्र में एक सरल और मिलनसार व्यक्तित्व के रूप में याद किया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि वे पद पर रहे हों या न रहे हों, आमजन के लिए उनके घर के दरवाजे हमेशा खुले रहते थे। उनके निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, समाजसेवियों और क्षेत्रवासियों ने गहरी संवेदना व्यक्त की है। उनका अंतिम संस्कार आज उनके निवास स्थान खेड़ली में राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।
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