विधायक बनावत के खिलाफ चुनाव याचिका खारिज, लगा दिया एक लाख का हर्जाना
समझें क्या है पूरा मामला
- बयाना विधायक रितु बनावत के खिलाफ चुनाव याचिका खारिज।
- कोर्ट ने 10 माह तक सम्मन नहीं लेने पर लगाया 1 लाख का हर्जाना।
- विधानसभा सचिव के जरिए बनावत को तामील करवाने पड़े थे सम्मन।
- मामूली तकनीकी कमियों पर जनता का फैसला नहीं बदला जा सकता।
- बैंक खाते में मौजूद 1,458 की रकम छुपाने के दावों को माना मामूली।
राजस्थान हाई कोर्ट ने 2023 के विधानसभा चुनावों में बयाना से जीती निर्दलीय विधायक रितु बनावत के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दी है।
अदालत ने बानावत पर 10 महीने तक अदालत के सम्मन से जानबूझकर बचने के लिए एक लाख रुपए का हर्जाना लगाया है। जस्टिस सुदेश बंसल ने यह आदेश पुरुषोत्तमलाल की चुनाव याचिका को खारिज करते हुए दिए।
689 वोट लेने वाले ने दी थी चुनौती
याचिकाकर्ता पुरुषोत्तम लाल ने 2023 में बयाना विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था। उन्हें केवल 689 वोट मिले थे।
बनावत ने 105,749 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। पुरुषोत्तम ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत चुनाव याचिका दायर की। इसमें बनावत के चुनाव को शून्य घोषित करने की मांग की थी।
पुरुषोत्तम ने याचिका में आरोप लगाया था कि बनावत ने अपने फॉर्म-26 हलफनामे में महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाकर भ्रष्ट आचरण किया है।
इसमें उन्होंने न ही फेसबुक और ट्विटर (X) खातों का खुलासा किया, साथ ही एसबीआई बैंक खाते और बंद हो चुके केनरा बैंक खाते की जानकारी भी नहीं दी। पति के वाहनों के मूल्यांकन में विसंगतियां, कृषि भूमि के खसरा नंबरों की कमी और कुछ कॉलमों को खाली छोड़ा गया।
याचिका में यह भी अनुरोध किया था कि अन्य सभी 9 पराजित उम्मीदवारों के नामांकन भी रद्द किए जाएं। यदि अन्य सभी उम्मीदवार अयोग्य घोषित होते हों तो उन्हें निर्विरोध विजेता घोषित किया जाए।
तकनीकी कारणों से परिणाम पर कोई फर्क नहीं
बानावत की ओर से सीनियर एडवोकेट आरएन माथुर ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता की बताई गई कमियां मामूली, तकनीकी या प्रक्रियात्मक प्रकृति की थीं। इनसे चुनाव के परिणाम पर कोई असर नहीं पड़ा। न ही मतदाताओं के सूचना के मौलिक अधिकार का उल्लंघन हुआ।
बानावत के सोशल मीडिया खातों को उनके दिए गए नाम और ईमेल आईडी का उपयोग करके आसानी से खोजा जा सकता था। एसबीआई बैंक खाते में मात्र 1,458 रुपये की मामूली राशि थी।
यह पहले से ही उनके आयकर रिटर्न (ITR) में दिखाई दे रही थी। वाहनों के मूल्यांकन में विसंगतियों का दावा गलत है। क्योंकि याचिकाकर्ता ने समय के साथ वाहनों के डेप्रिसिएशन को ध्यान में नहीं रखा है।
कुछ कॉलम को अधूरा छोड़ने का मतलब स्वतः ही शून्य या लागू नहीं माना जाता है। यह मतदाताओं को धोखा देने के इरादे को नहीं दर्शाता।
मामूली कमियों के आधार पर पलट नहीं सकते जनादेश
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जनादेश को मामूली तकनीकी खामियों के आधार पर पलटा नहीं जा सकता।
अदालत ने कहा कि मतपेटी के माध्यम से व्यक्त की गई जनता की इच्छा और उनके सामूहिक विवेक का सम्मान किया जाना चाहिए।
निर्वाचित उम्मीदवार की संपत्तियों के मामूली तकनीकी और महत्वहीन गैर-खुलासे पर जनता की पसंद को रद्द करने के लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
याचिकाकर्ता संदेह से परे किसी भी भ्रष्ट आचरण को साबित करने में पूरी तरह विफल रहा। अदालत ने बनावत के खिलाफ याचिका को खारिज कर दिया। अन्य उम्मीदवारों को दी गई चुनौतियों को भी निरर्थक माना।
पकड़म-पकड़ाई का खेल नहीं है यह
कानूनी लड़ाई जीतने के बावजूद कोर्ट ने विधायक रितु बनावत को अदालत की अवहेलना के लिए कड़ी फटकार लगाई है।
दिसंबर 2023 में याचिका दायर होने के बाद बानावत ने करीब 10 महीने तक जानबूझकर सम्मन नहीं लिया। अदालत को अंततः अक्टूबर 2024 में राजस्थान विधानसभा के सचिव के जरिए सम्मन तामील करवाने पड़े थे।
कोर्ट ने उनके व्यवहार पर नाराजगी व्यक्त की। साथ ही कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों से कानूनी प्रणाली के साथ पकड़म-पकड़ाई का खेल खेलने की उम्मीद नहीं की जाती।
अदालत ने बानावत के इस आचरण को कानून की प्रक्रिया का अनादर और उपेक्षा करने वाला माना। अदालत ने कहा कि किसी भी कीमत पर इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती।
अदालत ने बनावत को 30 दिन में याचिकाकर्ता पुरुषोत्तम लाल को 1,00,000 रुपए (एक लाख रुपये) की कानूनी लागत का भुगतान करने के आदेश दिए हैं।
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