बीड़ पापड़ वन भूमि पर RIICO का कब्जा अवैध, NGT ने दिए 30 दिन में वापसी के आदेश
समझें क्या है पूरा मामला
- जयपुर में वन भूमि पर बने औद्योगिक क्षेत्र को लेकर NGT का बड़ा फैसला।
- NGT ने इस जमीन पर RIICO का कब्जा अवैध माना है।
- राजस्थान सरकार को 30 दिन के भीतर जमीन वापस अपने कब्जे में लेने के निर्देश।
- मामला नाहरगढ़ वन्यजीव अभयारण्य और आमेर-54 वन खंड से जुड़ी जमीन का है।
जयपुर के बीड़ पापड़ में करीब 31 बीघा आरक्षित वन भूमि पर बने औद्योगिक क्षेत्र को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने बड़ा फैसला दिया। NGT की सेंट्रल जोन बेंच भोपाल ने इस जमीन पर RIICO का कब्जा अवैध माना। वन विभाग और राजस्थान सरकार को 30 दिन के भीतर जमीन वापस अपने कब्जे में लेने के निर्देश दिए हैं।
मामला नाहरगढ़ सेंचुरी और आमेर-54 वन खंड से जुड़ी 2.9087 हेक्टेयर जमीन का है। जस्टिस शेव कुमार सिंह और एक्सपर्ट मेंबर सुधीर कुमार चतुर्वेदी की बेंच ने कमलकांत तिवाड़ी की अपील पर यह आदेश दिया। ट्रिब्यूनल ने इस मामले में वन अधिकारियों की भूमिका की जांच के निर्देश भी दिए हैं।
आखिर क्या है बीड़ पापड़ का पूरा मामला?
जयपुर निवासी कमलकांत तिवाड़ी ने NGT में अपील दायर की थी। इसमें कहा गया कि बीड़ पापड़ गांव के खसरा नंबर 7/2 की 2.9087 हेक्टेयर जमीन आरक्षित वन भूमि है। इसके बावजूद यहां RIICO की ओर से औद्योगिक क्षेत्र विकसित कर दिया गया। याचिकाकर्ता के मुताबिक राजस्व रिकॉर्ड और जमाबंदी में यह जमीन वन विभाग के नाम दर्ज है। यह इलाका नाहरगढ़ वाइल्डलाइफ सेंचुरी के इको-सेंसिटिव जोन का भी हिस्सा है।
मौके पर वन और राजस्व विभाग को क्या मिला था?
अक्टूबर 2024 में वन और राजस्व विभाग के अधिकारियों ने जमीन का संयुक्त निरीक्षण किया था। सर्वे में सामने आया कि संबंधित जमीन पर बड़ी संख्या में फैक्ट्रियां और दूसरी औद्योगिक इकाइयां बन चुकी। निर्माण इतना ज्यादा हो चुका था कि जमीन की पारंपरिक तरीके यानी जरीब से पैमाइश करना भी संभव नहीं था।
याचिकाकर्ता ने क्या दलील दी?
कमलकांत तिवाड़ी की ओर से एडवोकेट वैभव पंचोली और कृष्ण शर्मा ने NGT के सामने पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 की धारा 2 के तहत केंद्र सरकार की पहले से अनुमति लिए बिना आरक्षित वन भूमि का इस्तेमाल गैर-वानिकी काम के लिए नहीं किया जा सकता।
याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट के टीएन गोदावर्मन थिरुमुलपाद मामले के 2025 के फैसले का भी हवाला दिया गया। उनका कहना था कि दूसरे विभागों के कब्जे वाली वन भूमि वापस वन विभाग को सौंपने के निर्देश पहले ही दिए जा चुके। इसी आधार पर बीड़ पापड़ की जमीन भी वन विभाग को वापस मिलनी चाहिए।
RIICO ने अपने बचाव में क्या कहा?
RIICO ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में दावा किया कि 1971 में राज्यपाल के आदेश के जरिए बीड़ पापड़ की 572 बीघा जमीन औद्योगिक इस्तेमाल के लिए राजस्व विभाग को ट्रांसफर की गई थी। RIICO की तरफ से यह भी कहा गया कि राजस्व रिकॉर्ड में वन विभाग का नाम दर्ज होना केवल लिपिकीय गलती है। जमीन पर समय के साथ तीसरे पक्ष के अधिकार भी बन चुके हैं।
NGT ने RIICO की दलील क्यों नहीं मानी?
ट्रिब्यूनल ने रिकॉर्ड देखने के बाद माना कि RIICO यह साबित नहीं कर पाया कि खसरा नंबर 7/2 की संबंधित जमीन कभी कानूनी रूप से उसे आवंटित की गई थी। NGT ने कहा कि वन भूमि को गैर-वानिकी काम में लेने के लिए कानून के तहत केंद्र सरकार की पहले से मंजूरी जरूरी थी। ऐसी मंजूरी के बिना किया गया ट्रांसफर शुरुआत से ही वैध नहीं माना जा सकता। बाद में मंजूरी मिलने से भी पहले किए गए गैरकानूनी ट्रांसफर को वैध नहीं बनाया जा सकता।
30 दिन में वापस वन विभाग को लेनी होगी जमीन
NGT ने वन विभाग और राज्य सरकार को 30 दिन के भीतर 2.9087 हेक्टेयर जमीन का कब्जा वापस लेने के निर्देश दिए हैं। यानी जिस जमीन पर RIICO का कब्जा पाया गया, उसे दोबारा वन विभाग के नियंत्रण में लाना होगा।
इसके साथ ही ट्रिब्यूनल ने अतिक्रमण के मामले में अनदेखी करने वाले वन अधिकारियों की भूमिका की जांच करने के निर्देश दिए हैं। जांच में जिम्मेदारी सामने आने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी। NGT ने RIICO और वन विभाग को याचिकाकर्ता कमलकांत तिवाड़ी को कानूनी खर्च के रूप में कुल 50 हजार रुपए देने का भी आदेश दिया है।
यह खबरें भी पढ़ें...
यूपी में जयपुर रियासत की 135 बीघा जमीन! राजस्थान सरकार ने वापस मांगी
आमेर-जयगढ़-नाहरगढ़ रोपवे प्रोजेक्ट पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक; टेंडर में गड़बड़ी को बनाया आधार
भैराणा धाम आंदोलन के बाद सरकार ने रोका RIICO प्रोजेक्ट, संतों की मांगों पर सहमति
जयपुर में वैश्य समाज से मेयर बनाने की चर्चा तेज, ब्राह्मण-राजपूत भी दौड़ में शामिल