केंद्रीय मंत्री के सब्सिडी खुलासे पर घमासान, कांग्रेस बोली-इसकी निष्पक्ष जांच हो
समझें क्या है पूरा मामला
- केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी के सब्सिडी मामले पर कांग्रेस का हमला।
- भागीरथ ने खुद के ही मंत्रालय से खीरे की खेती के लिए ली 99 लाख की सब्सिडी।
- कांग्रेस ने कहा - किसान दफ्तरों के चक्कर काट रहे, मंत्रियों-अफसरों पर करोड़ों की मेहरबानी।
- गहलोत, पायलट, डोटासरा व जूली ने पीएम से की सब्सिडी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग।
- मंत्री की सफाई - किसान के नाते नियमों के तहत ली सब्सिडी, कुछ भी छिपाया नहीं।
केंद्रीय कृषि मंत्री भगीरथ चौधरी का अपने ही मंत्रालय से खेती के लिए 99 लाख की सब्सिडी का खुलासा हुआ है। कांग्रेस ने इसे हितों के टकराव का गंभीर मामला बताते हुए जांच की मांग की है। दूसरी ओर, मंत्री भागीरथ चौधरी का कहना है कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है।
गहलोत बोले - पीएम जवाब दें
पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने भागीरथ को निशाना बनाते हुए 'एक्स' पर लिखा है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में भ्रष्टाचार के नए मॉडल और हितों के टकराव का एक और उदाहरण सामने आया है।
इसमें केंद्रीय मंत्री और IAS अधिकारी पर आरोप लग रहे हैं। जब कृषि राज्य मंत्री ही अपने मंत्रालय की योजना से एक करोड़ की सब्सिडी मंजूर करवा लें तो इसे आप क्या कहेंगे?
मंत्रियों - अफसरों पर करोड़ों की मेहरबानी
गहलोत ने लिखा है कि एक तरफ आम किसान सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटकर थक जाता है। दूसरी तरफ भाजपा के मंत्रियों और चहेते अफसरों के परिवारों पर मेहरबानी हो रही है।
चाहे मुख्यमंत्रियों से जुड़े मामले हों या केंद्रीय मंत्रियों के ये कारनामे। आखिर भ्रष्टाचार के इन नए और संस्थागत तरीकों पर पीएम की रहस्यमयी चुप्पी क्या दर्शाती है?
उन्होंने कहा कि ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा का नारा देने वाले आज अपने ही मंत्रियों के कदाचार पर मौन क्यों हैं? देश की जनता इस दोहरे मापदंड को देख रही है।
पायलट बोले, इसकी जांच हो
कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट ने इसे हितों का टकराव करार दिया और केंद्र सरकार से जांच की मांग की है। पायलट ने एक्स पर लिखा कि जब केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री स्वयं NHB बोर्ड के उपाध्यक्ष हैं तो क्या यह मामला हितों के टकराव से जुड़ा नहीं है?
पायलट के अनुसार इसी प्रकार एमपी के सीएम और उनके परिजनों पर बड़े पैमाने पर जमीन खरीद से जुड़े बेहद गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यह मामला भी पारदर्शिता और निष्पक्षता पर बड़े प्रश्नचिह्न खड़े करता है।
पायलट ने लिखा है कि भाजपा शासित राज्यों के सीएम, राज्यों के मंत्री और केंद्रीय मंत्रियों से जुड़े मामले लगातार उजागर हो रहे हैं। लेकिन जवाबदेही तय नहीं की जा रही है। इन सभी मामलों की उच्च स्तरीय,निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। ताकि देश की जनता के सामने सच्चाई आए।
डोटासरा बोले, सरकार में मची है लूट
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि मोदी सरकार में लूट मची है। मंदिरों में चंदे की लूट, जमीनें कौड़ियों में लेने की लूट, किसानों की सरकारी सब्सिडी हथियाने की लूट मची है। किसान दर-दर भटक रहे हैं। मोदी के मंत्री अपने ही मंत्रालय की योजना से 1 करोड़ की सब्सिडी हासिल कर रहे हैं।
जरूरतमंद किसान को सब्सिडी मिलती, डोटासरा
डोटासरा ने लिखा है कि सबसे गंभीर सवाल यह है कि कृषि राज्य मंत्री होने के नाते वे योजना को मंजूरी देने वाले उसी बोर्ड के पदेन उपाध्यक्ष भी हैं। किसानों का हक़ लूटने के साथ यह हितों के टकराव का गंभीर मामला है।
उन्होंने कहा कि मंत्री की जगह इस योजना का लाभ किसी योग्य और ज़रूरतमंद किसान को भी मिल सकता था। लेकिन उसका हक़ मारा गया। इतना ही नहीं, एक वरिष्ठ IAS अधिकारी भी इस योजना के लाभार्थी हैं। देश जवाब चाहता है। क्या सरकार इस मामले में पारदर्शिता के साथ निष्पक्ष जांच करवाएगी?
जूली बोले, भाजपा राज में भ्रष्टाचार व्यवस्था का हिस्सा
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी सोशल मीडिया पर इस मामले को उठाया है। उन्होंने लिखा है कि पहले प्रभु श्रीराम के मंदिर में चंदा चोरी, फिर महाकाल की नगरी में लैंड स्कैम और अब केंद्रीय कृषि मंत्री का खीरा सब्सिडी महाहाघोटाला।
ये घटनाएं बताती हैं कि भाजपा शासित राज्यों में भ्रष्टाचार अब अपवाद नहीं है, बल्कि सत्ता की संरक्षित व्यवस्था का हिस्सा बन चुका है।
जूली ने लिखा है कि राजस्थान से लेकर पूरे देश में भाजपा नेताओं के रोज नए चेहरे बेनकाब हो रहे हैं। खेल एक ही है - सत्ता के संरक्षण में लूट, भ्रष्टाचार और वसूली। देश को ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा का वादा करने वाले नॉन-बायोलॉजिकल महामानव आज मौन क्यों हैं? क्या यह मौन भ्रष्टाचार की स्वीकृति और संरक्षण का प्रमाण नहीं है?
भागीरथ बोले, छिपाकर नहीं किया
खुद के मंत्रालय से सब्सिडी लेने के बाद उठे विवाद पर केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी का बयान आया है। उनका कहना है कि उन्होंने कुछ छिपाकर नहीं किया है।
हजारों किसान पॉलीहाउस और फार्म पॉन्ड पर सब्सिडी ले रहे हैं। उसी तरह किसान के नाते उन्होंने भी सब्सिडी ली है। मंत्री का कहना है कि उन्होंने 2018 से आवेदन कर रखा था। मैंने वहां बाकायदा बोर्ड लगाया है, जिसमें लोन से लेकर सब्सिडी का पूरा ब्यौरा है।
मंत्री के अनुसार मैं मेरे फार्म पर किसानों को लेकर जाता हूं। वहां उन्नत और प्राकृतिक खेती की ट्रैनिंग देता हूं। मेरे वहां कलेक्टर, एसडीएम फार्म विजिट पर आए हैं।
हम दो कृषि राज्य मंत्री
चौधरी का दावा है कि पॉलीहाउस और कोल्ड स्टोरेज की सब्सिडी वाला विभाग दूसरे राज्य मंत्री रामनाथ ठाुकर के पास है। मेरे पास यह विभाग नहीं है।
उन्होंने कहा कि वह किसान हैं, बचपन से ही खेती करते आए हैं। योजना की गाडलाइन के आधार पर अपने फार्म पर पॉलीहाउस लगाया था। जहां मैंने पॉलीहाउस लगाया, वहां जमीन में पानी नहीं है।
दो करोड़ लीटर क्षेमता के चार फार्म पोंड बनाकर पॉलीहाउस की छत से पानी इकट्ठा किया। इस बारिश के पानी से साल भर उन्न्त खेती कर रहा हूं। पॉलीहाउस में खीरा, टमाटर, शिमला मिर्च, धनिया की फसल लेता हूं।
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