भैराणा धाम आंदोलन में संतों का अलग रुख, सरकारी कमेटी से बाहर रहने का ऐलान
News In Short
- भैराणा धाम संघर्ष समिति ने प्रशासन की बन रही कमेटी में शामिल होने से किया इनकार।
- समिति ने जयपुर कूच के दौरान मंच से की गई राजनीतिक बयानबाजी से खुद को किया अलग।
- 27 मई को रीको का काम स्थगित करने के ऐलान को समिति ने बेमानी बताया, काम पहले से था बंद।
- कमेटी के अधिकारों और संतों की भूमिका को लेकर स्पष्टता न होने पर लिया यह निर्णय।
- समिति ने सीएम भजनलाल शर्मा की प्रशंसा करते हुए कहा- सरकार पर पूरा भरोसा है।
News In Detail
दादूपालका भैराणा धाम में रीको के विरोध में आंदोलन अब एक नया मोड़ आ गया है। दादूपालका भैराणा धाम बचाओ संघर्ष समिति ने प्रशासन द्वारा बनाई जा रही कमेटी में शामिल होने से इनकार कर दिया है। वहीं, संघर्ष समिति ने जयपुर कूच के दौरान मंच से की गई राजनीतिक बयानबाजी से भी अपने आप को अलग कर लिया है।
प्रेस वार्ता में किए बड़े एलान
संघर्ष समिति की ओर से दादूपीठ नरायणा के पीठाधीश्वर ओमदास महाराज की मौजूदगी में आज सोमवार को जयपुर में एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई।
इसमें व्यवस्थापक हरिओम स्वामी ने कहा कि 27 मई को प्रशासन ने भैराणा में रीको (RIICO)का काम स्थगित करने करने की घोषणा की थी, जबकि रीको का काम पहले से ही बंद था। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक औपचारिक घोषणा थी जिसका कोई व्यावहारिक महत्व नहीं है।
जयपुर कूच से पहले ही बन गई थी सहमति
हरिओम स्वामी ने कहा कि संत शिरोमणि दादूदयाल महाराज की तपोस्थली के संरक्षण, संवर्धन और सुरक्षा के लिए 5 अप्रैल को मौजमाबाद उपखंड अधिकारी को ज्ञापन देकर आंदोलन का आगाज किया गया था। इसके बाद 15 अप्रैल से भीषण गर्मी के बीच संतों ने अग्नितप साधना शुरू कर दी।
संघर्ष समिति ने 26 मई को जिला प्रशासन के माध्यम से सरकार को सात सूत्रीय ज्ञापन दिया। इन बिंदुओं पर अधिकारियों के साथ सकारात्मक बातचीत हुई और अधिकांश बिंदुओं पर सहमति भी बन गई थी।
प्रशासन की कमेटी में शामिल नहीं होंगे संत
उन्होंने कहा कि 27 मई को महापंचायत और जयपुर कूच के बाद सात बिंदुओं पर व्यावहारिक समाधान निकालने पर सहमति बनी थी, लेकिन उन पर बिंदुवार चर्चा नहीं हुई। उसी समय प्रशासन ने रीको का काम स्थगित करने की घोषणा की।
रीको औद्योगिक क्षेत्र विवाद के आगे के काम की समीक्षा के लिए प्रशासन ने एक कमेटी बनाने का आश्वासन दिया था, लेकिन इस कमेटी के क्या अधिकार होंगे, उसकी अध्यक्षता कौन करेगा और संतों की इसमें क्या भूमिका होगी, इसे लेकर कोई स्पष्टता नहीं है। इसलिए संघर्ष समिति ऐसी किसी कमेटी में शामिल नहीं होगी।
राजनीतिक बयानों से अलग किया खुद को
हरिओम स्वामी ने जोर देकर कहा कि 27 मई को भैराणा धाम संघर्ष समिति के मंच से साधु-संतों के बीच से जो भी राजनीतिक बातें बोली गई हैं, संत समाज उससे सहमत नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संतों का कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है और न ही वे किसी राजनीतिक दल के नुमाइंदे हैं।
संत समाज केवल भैराणा धाम की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए आंदोलित है। किसी भी राजनीतिक दल द्वारा इस मुद्दे को अपना राजनीतिक रंग देने की कोशिश की गई है, उससे संत समाज का कोई लेना-देना नहीं है।
पर्यावरण संरक्षण के समर्थक, विकास के विरोधी नहीं
संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि वह पर्यावरण संरक्षण की समर्थक है लेकिन विकास के विरोधी नहीं है। उनका कहना है कि विकास होना चाहिए, लेकिन धार्मिक स्थलों और पर्यावरण की कीमत पर नहीं।
संघर्ष समिति इस पूरे मामले का संतुलित समाधान निकालने की दिशा में प्रयास करेगी। उन्होंने बताया कि समिति ने आज जिला प्रशासन से वार्ता के लिए समय लिया है। वार्ता में 26 मई को दिए गए ज्ञापन के बिंदुओं पर चर्चा होगी।
सीएम भजनलाल शर्मा पर जताया भरोसा
समिति ने कहा कि प्रशासन से बातचीत के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से भी मुलाकात की जाएगी। सीएम भजनलाल शर्मा की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि राजस्थान में साधु-संतों का सम्मान करने वाली सरकार है। सीएम भजनलाल शर्मा धार्मिक प्रवृत्ति के बड़े दिल वाले इंसान हैं। संघर्ष समिति को सरकार और मुख्यमंत्री पर पूरा भरोसा है कि वे जो भी निर्णय लेंगे, वह भैराणा धाम और पर्यावरण के हित में ही लिए जाएंगे।
FAQ
- भैराणा धाम आंदोलन क्या है?
भैराणा धाम आंदोलन राजस्थान के जयपुर (दूदू) क्षेत्र में स्थित दादू पंथ की पवित्र तपोस्थली भैराणा धाम की भूमि को बचाने के लिए संत समाज, स्थानीय ग्रामीणों और किसानों द्वारा चलाया जा रहा एक प्रमुख विरोध प्रदर्शन है। यह विवाद मुख्य रूप से RIICO द्वारा औद्योगिक क्षेत्र के विकास के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण और वहां लगे हजारों पेड़ों की कटाई के विरोध में शुरू हुआ।
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