बिहारीजी मंदिर में दान किया हीरा गायब!, परिवार कर रहा है जांच की मांग
समझें क्या है पूरा मामला
- भरतपुर के बिहारीजी मंदिर में चढ़ाया गया हीरा गायब होने का परिवार ने दावा किया है।
- मीरा बंसल ने दिसंबर 2024 में करीब 3.64 लाख रुपए का हीरा दान करने की बात कही।
- परिवार का आरोप है कि हीरे की जगह मूर्ति पर कांच का टुकड़ा लगा दिया गया।
- देवस्थान विभाग ने हीरा दान की स्लिप देने से इनकार किया और जांच कमेटी बनाई है।
- परिवार ने सीएम और विधायक को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
राजस्थान में भरतपुर के बिहारीजी मंदिर में दान किया गया हीरा गायब होने का दावा किया गया है। मीरा बंसल ने दिसंबर 2024 में मंदिर में यह हीरा चढ़ाया था। छह महीने बाद परिवार को शक हुआ कि हीरे की जगह कांच लगा है। देवस्थान विभाग ने हीरा दान की स्लिप देने से इनकार किया है। अब सीएम और विधायक को पत्र लिखकर जांच की मांग की गई है।
भरतपुर के रंजीत नगर निवासी मीरा बंसल के परिवार का दावा है कि उन्होंने बिहारीजी को श्रद्धा से एक कीमती हीरा भेंट किया था। अब परिवार का आरोप है कि वह हीरा मूर्ति पर नहीं है और उसकी जगह कांच का टुकड़ा लगा दिया गया है। मामला अब प्रशासन और देवस्थान विभाग तक पहुंच चुका है।
क्या है पूरा मामला
मीरा बंसल के पति प्रवीण बंसल की भरतपुर में ऑयल मिल है। मीरा बंसल ने दिसंबर 2024 में बिहारीजी मंदिर में हीरा दान किया था। उस समय मंदिर में पुजारी मनोज भारद्वाज थे। बहू कृपाली के अनुसार, हीरा मनोज भारद्वाज को ही सौंपा गया था। यह हीरा बिहारीजी को नाक के नीचे लौंग के रूप में पहनाया गया था।
छह महीने बाद मंदिर आने वाले भक्तों और परिचितों ने परिवार को बताया कि मूर्ति पर लगे हीरे में पहले जैसी चमक नहीं है। इसी के बाद परिवार को शक हुआ और उन्होंने मामला उठाना शुरू किया।
दिल्ली से खरीदा गया हीरा
कृपाली के अनुसार, मीरा बंसल बिहारीजी की गहरी भक्त हैं। उनकी इच्छा थी कि मूर्ति पर एक हीरा जरूर हो। परिवार का दावा है कि यह हीरा दिसंबर 2024 में दिल्ली के करोल बाग स्थित कुंदन लाल एंड संस से खरीदा गया था। इसकी कीमत करीब तीन लाख 64 हजार रुपए बताई गई है। परिवार का कहना है कि उनके पास हीरे का बिल, नंबर और सर्टिफिकेट मौजूद है।
चमक में आया फर्क
कृपाली का कहना है कि जून 2025 से मंदिर आने वाले लोगों ने कहा कि यह हीरा उनका दिया हुआ नहीं लगता। परिवार ने खुद जाकर मूर्ति पर लगे हीरे को देखा। उन्हें भी लगा कि पहले जैसी चमक अब नहीं है। इसके बाद परिवार ने देवस्थान विभाग के आयुक्त मुकेश मीणा से संपर्क किया, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। परिवार का आरोप है कि हीरा दान की स्लिप मांगने पर भी उन्हें कभी स्लिप नहीं दी गई।
मामला दबाने की कोशिश?
कृपाली ने आरोप लगाया कि इसी दौरान देवस्थान विभाग के दो कर्मचारी सूरजभान और पुष्पेंद्र उनके घर आए। परिवार का दावा है कि उन्होंने मामला रफा-दफा करने की बात कही। परिवार ने इसके बजाय हीरे की जांच पर जोर दिया। इसके बाद परिवार ने देवस्थान विभाग उदयपुर, भरतपुर विधायक सुभाष गर्ग और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को लिखित शिकायत भेजी।
विभाग पर लगे आरोप
कृपाली का आरोप है कि अब देवस्थान विभाग के अधिकारी कह रहे हैं कि परिवार ने शायद कांच का टुकड़ा ही चढ़ाया होगा। परिवार का कहना है कि हीरा दान के समय विभाग ने कोई जांच नहीं की थी। परिवार का मानना है कि जांच उसी वक्त हो जानी चाहिए थी। परिवार ने स्पष्ट किया कि उन्होंने पुलिस में शिकायत नहीं की है, वे केवल हीरे की निष्पक्ष जांच चाहते हैं।
आयुक्त का जवाब
देवस्थान विभाग के आयुक्त मुकेश मीणा ने कहा कि हीरा दान के समय वे कहीं और तैनात थे। उन्होंने कहा कि वे यह नहीं बता सकते कि मूर्ति पर लगी वस्तु हीरा है या कांच का टुकड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि उस समय कौन अधिकारी या कर्मचारी तैनात था, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है।
आयुक्त के अनुसार, विभाग के रिकॉर्ड में हीरा दान की तारीख 15 नवंबर दर्ज है, जबकि मीरा बंसल 10 दिसंबर की तारीख बता रही हैं। आयुक्त ने कहा कि हीरे की अब तक पुष्टि नहीं हुई है और जांच के लिए एक कमेटी बनाई गई है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि कोई कर्मचारी बंसल परिवार के घर गया था या नहीं।
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