4 लाख मजदूर, 6500 फैक्ट्रियां, आखिर क्यों विरोध प्रदर्शन में सुलग रही राजस्थान की सबसे बड़ी उद्योग नगरी
सुनील जैन@ भिवाड़ी
कहानी शुरू होती है सुनीता देवी से। सुनीता महज़ एक नाम नहीं, बल्कि राजस्थान की सबसे बड़ी उद्योग नगरी भिवाड़ी के उन 4 लाख अनस्किल्ड मजदूरों का चेहरा है, जो देश की तरक्की के पहियों में तेल डालने का काम करते हैं। पिछले महीने तक सुनीता को 11,500 रुपए वेतन मिलता था। तीन बच्चों की मां के लिए यह रकम पहले ही कम थी, लेकिन अब तो कम शब्द भी छोटा पड़ने लगा है।
पश्चिमी एशिया के युद्ध ने मीलों दूर बैठी सुनीता की रसोई को आग लगा दी है। वह बताती हैं, पहले जो 3 किलो का गैस सिलेंडर 200 रुपए में आता था, अब वह 1,500 रुपए का हो गया है। मैं 8 घंटे काम करती हूं, 60 रुपए ओवरटाइम मिलता है। इतने में हम जिएं या बच्चों को पालें?
हरियाणा से फूटी चिंगारी
भिवाड़ी में विरोध की आग तब भड़की, जब पड़ोसी राज्य हरियाणा ने न्यूनतम मजदूरी में 35 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी कर दी। हरियाणा में अब एक अकुशल मजदूर को 15,220 रुपए मिल रहे हैं, जबकि महज कुछ किलोमीटर दूर राजस्थान के भिवाड़ी में वही मजदूर 7,450 रुपए पर टिका है।
यह अंतर सिर्फ आंकड़ों का नहीं, बल्कि थाली की रोटी का है। भिवाड़ी के मजदूरों का कहना है कि जब काम एक जैसा है, तो दाम में इतना बड़ा फर्क क्यों?
फैक्ट्रियों के बंद गेट और मजदूरों का दर्द
भिवाड़ी राजस्थान का विशाल औद्योगिक हब है। यहां 6,500 यूनिट्स हैं जो ऑटोमोबाइल से लेकर फार्मा तक का सामान बनाती हैं। यहां काम करने वाले 60 फीसदी मजदूर बाहरी राज्यों से आए हैं।
उनकी शिकायतें सिर्फ पैसों तक सीमित नहीं हैं। मजदूरों का आरोप है कि फैक्ट्री मालिकों द्वारा गाली-गलौज और मौखिक दुर्व्यवहार आम बात है। एक मजदूर ने बताया, मेरी शिफ्ट सुबह 6 बजे से दोपहर 2 बजे तक है, लेकिन हमें जबरन बिना ओवरटाइम के देर तक रोका जाता है। रहने की खराब स्थिति और बुनियादी सुविधाओं की कमी ने असंतोष को चरम पर पहुंचा दिया है।
मालिकों की अपनी मजबूरी?
दूसरी तरफ, फैक्ट्री मालिक भी खुद को घिरा हुआ महसूस कर रहे हैं। भिवाड़ी मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष जसबीर सिंह राणा का तर्क अलग है। उनका कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ ने व्यापार को प्रभावित किया है। ईरान-अमेरिका युद्ध की वजह से ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं। उनका दावा है कि वे मजदूरों को समय पर पैसा और खाना दे रहे हैं।
हालत इतनी खराब है कि एसोसिएशन ने मजदूरों को 600 गैस सिलेंडर बांटे हैं, ताकि विरोध शांत हो, लेकिन यह ऊंट के मुंह में जीरे जैसा है।
प्रशासन की वेट एंड वॉच नीति
भिवाड़ी के एडिशनल एसपी अतुल साहू का कहना है कि स्थिति शांतिपूर्ण है और वे लगातार बैठकों के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, डिप्टी लेबर कमिश्नर प्रज्ञा शामरा ने स्वीकार किया है कि राजस्थान में मजदूरी बढ़ाना अब अति आवश्यक हो गया है। सरकार को रिपोर्ट भेज दी गई है, लेकिन सवाल वही है-कब?
ऐसे शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन
जैसे-जैसे पश्चिम एशिया युद्ध के कारण रसोई गैस की कीमतें बढ़ रही हैं, राजस्थान के औद्योगिक शहर भिवाड़ी में पिछले एक हफ्ते से सैकड़ों श्रमिक वेतन वृद्धि की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि आंदोलन जारी था, लेकिन हरियाणा सरकार द्वारा न्यूनतम वेतन में 35 प्रतिशत की वृद्धि करने के निर्णय के बाद यह और तेज हो गया, जिससे यहाँ भी इसी तरह के उपायों की मांग उठने लगी है।
श्रमिकों के आरोपों में खराब कामकाजी परिस्थितियों से लेकर फैक्ट्री मालिकों द्वारा दुर्व्यवहार और डराने-धमकाने तक की बातें शामिल हैं। जबकि कुछ फैक्ट्री प्रबंधन वेतन बढ़ाने पर सहमत हो गए हैं, अन्य के साथ बातचीत अभी भी जारी है।
मजदूरों का दर्द-कोई हमारी नहीं सुनता
भिवाड़ी में चार साल से काम कर रहे एक श्रमिक ने कहा, हमने कई बार वेतन वृद्धि के लिए कहा है लेकिन कोई हमारी नहीं सुनता। मुझे 14,000 रुपये मिलते हैं और मेरी शिफ्ट सुबह 6 बजे से दोपहर 2 बजे तक है, लेकिन वे हमसे बिना ओवरटाइम भुगतान के ज्यादा देर तक काम कराते हैं। गाली-गलौज सामान्य बात है। अगर हम अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण नहीं कर सकते, तो काम करने का क्या मतलब है?
प्रशासन ने नोएडा जैसी हिंसा की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए पुलिस टुकड़ियां तैनात की हैं। हालांकि, भिवाड़ी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अतुल साहू ने कहा कि विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे हैं और पुलिस ने श्रमिकों के मुद्दों को सुलझाने के लिए विभिन्न फैक्ट्री संघों के साथ बैठकें की हैं।
विरोध प्रदर्शन का कारण क्या है?
भिवाड़ी एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र है, जहां 6,500 इकाइयां हैं। यहां मुख्य रूप से ऑटोमोटिव, इंजीनियरिंग, फार्मास्यूटिकल्स और मैन्युफैक्चरिंग पर इकाइयां केंद्रित हैं। यहां 4 लाख से अधिक अकुशल श्रमिक हैं, जिनमें से 60 प्रतिशत राजस्थान के बाहर से हैं।
फैक्ट्री मालिकों का कहना है कि इनमें से 40 से 50 प्रतिशत श्रमिक अनुबंध के आधार पर रखे गए हैं। राजस्थान के कानूनों के अनुसार न्यूनतम वेतन इस प्रकार है:
अकुशल श्रमिक: 7,410 रुपये प्रति माह
अर्ध-कुशल: 7,722 रुपये प्रति माह
कुशल: 8,034 रुपये प्रति माह
अत्यधिक कुशल: 9,334 रुपये प्रति माह
फिलहाल, भिवाड़ी में आंदोलन थमता नहीं दिख रहा है। हालांकि, पुलिस प्रशासन का कहना है कि विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण है। हम मजदूर संगठनों और फैक्ट्री संघों से बातचीत कर रहे हैं।
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