PWD की चेतावनी के बाद भी नहीं हुई मरम्मत, गिर गई सरकारी स्कूल की छत
समझें क्या है पूरा मामला
- बीकानेर के सरकारी स्कूल में छत गिरी, PWD ने पहले ही बताया था जर्जर।
- कक्षा-7 की 10 पट्टियां टूटकर गिरीं, गर्मी की छुट्टी के दौरान हुआ हादसा।
- गनीमत रही कि बच्चे नहीं थे, वरना हो सकता था बड़ा हादसा।
- अब एक भी कमरा सुरक्षित नहीं, अब पेड़ों की छाया में पढ़ेंगे बच्चे।
बीकानेर के श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में एक सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल की कक्षा-7 की छत की 10 पट्टियां टूटकर गिर गईं। गर्मी की छुट्टी के दौरान हुए इस हादसे का पता सोमवार सुबह स्कूल खुलने पर चला।
पीडब्लूडी (Public Works Department) पहले ही पूरे भवन को जर्जर और असुरक्षित घोषित कर चुका था। अब स्कूल का एक भी कक्ष बच्चों के बैठने लायक नहीं बचा है। अब बच्चों को खुले में पेड़ों की छाया में पढ़ाया जाएगा और ग्रामीणों ने नए भवन की मांग उठाई है।
छुट्टियों के दौरान गिरी छत, सुबह पता चला
गर्मियों की छुट्टी के बाद सोमवार को स्कूल फिर से खुला। स्टाफ जब कक्षाओं के ताले खोलने पहुंचा तो कक्षा संख्या-7 में छत की 10 पट्टियां टूटकर नीचे गिरी मिलीं। मलबा कमरे में रखी टेबल और कुर्सियों पर गिरा जिससे फर्नीचर भी क्षतिग्रस्त हो गया।
प्रधानाचार्य ने बताया कि गनीमत रही कि उस वक्त स्कूल में बच्चे नहीं थे। अगर छुट्टी नहीं होती तो बड़ा हादसा हो सकता था।
PWD पहले ही दे चुका था चेतावनी
22 जून 2026 को ग्राम सेवा शिविर में सरपंच प्रतिनिधि गिरधारी सिंह ने स्कूल भवन की जर्जर हालत का मुद्दा उठाया था। इसके बाद PWD की टीम ने मौके पर निरीक्षण किया और भवन को जर्जर घोषित कर दिया था।
बावजूद इसके न मरम्मत हुई और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई। अब छत की पट्टियां गिर चुकी हैं और अन्य कमरों में भी बड़ी-बड़ी दरारें आ चुकी हैं।
एक भी कमरा सुरक्षित नहीं
प्रधानाचार्य ने ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखकर पूरी स्थिति से अवगत कराया है। उनका कहना है कि सिर्फ एक कक्ष नहीं, बल्कि स्कूल के सभी कक्ष जर्जर हो चुके हैं। किसी भी कमरे में बच्चों को बैठाकर पढ़ाना खतरनाक है। अन्य कमरों की छत की पट्टियां भी अपनी जगह छोड़ चुकी हैं और कभी भी गिर सकती हैं।
पेड़ की छाया में होगी पढ़ाई
बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए स्कूल प्रबंधन ने फिलहाल खुले में पेड़ों की छाया में पढ़ाई कराने का फैसला किया है। यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी जब तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो जाती। बरसात का मौसम करीब है और ऐसे में खुले में पढ़ाई कितने दिन हो पाएगी, यह बड़ा सवाल है।
ग्रामीणों ने उठाई नए भवन की मांग
घटना की सूचना मिलते ही सरपंच प्रतिनिधि समेत कई ग्रामीण स्कूल पहुंचे। उन्होंने स्थिति का जायजा लिया। ग्रामीणों ने सरकार और शिक्षा विभाग से तीन मांगें रखी हैं।
पहली, तत्काल नए भवन का निर्माण शुरू किया जाए। दूसरी, बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए। तीसरी, जब तक नया भवन न बने, पढ़ाई के लिए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
ये भी पढ़े:-
जमीन ले ली, मुआवजा नहीं दिया, 429 किसान 3 साल से खाली हाथ
केंद्रीय मंत्री भागीरथ की किस्मत चमकी, अपने ही मंत्रालय से ली 99 लाख की सब्सिडी
एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल नीति पर आंदोलन, एम-20 ने संभाला मोर्चा
40% कमीशन कांड के बाद MLALAD नियम सख्त, सरकार ने किए 6 बदलाव