बंगाल-असम चुनाव में भाजपा का मारवाड़ी कार्ड, जहां गए राजस्थानी नेता, वहां आए अच्छे परिणाम
News In Short
- सीएम भजनलाल शर्मा ने बंगाल और असम में मारवाड़ी वोट बैंक को भाजपा के पक्ष में किया एकजुट।
- बंगाल में बसे 12 लाख प्रवासी राजस्थानियों को राजस्थान के 50 से नेताओं ने साधा।
- सीएम ने मारवाड़ी समाज को भाजपा सरकार आने पर सुरक्षित माहौल की दी गारंटी
- 2021 के मुकाबले प्रवासी बाहुल्य क्षेत्रों में भाजपा के प्रदर्शन में प्रभावी सुधार।
News In Detail
पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में राजस्थान के नेताओं की भी अहम भूमिका रही है। प्रदेश के नेताओं ने इन राज्यों में अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज करवाई है। भाजपा ने राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को दो अलग-अलग राज्यों में जिम्मेदारी दी थी। मुख्यमंत्री ने असम में संगठन के साथ प्रवास और कार्यकर्ता संवाद के जरिए पार्टी को सक्रिय किया था। पश्चिम बंगाल में उन्होंने बाकायदा रैली निकालकर और बैठक व सभा करके भाजपा के लिए वोट मांगने का काम किया।
भाजपा की जीत में मारवाड़ी कनेक्शन
असम और पश्चिम बंगाल में मारवाड़ियों की बड़ी तादाद है। अधिकांश मारवाड़ी उद्योगपतियों का मुख्य ठिकाना सदियों से कोलकत्ता ही रहा है। बड़े उद्योगपतियों के अलावा वहां लाखों मारवाड़ी परिवार व्यापार व नौकरियां करते हैं।
बंगाल व असम में इनका राजनीति और प्रशासन में अच्छा-खासा दखल है। इस मारवाड़ी वोट बैंक का झुकाव इस बार खुलेआम भाजपा की ओर दिख रहा था। इसी मारवाड़ी वोट बैंक को एकजुट करके अपने पक्ष में करने के लिए भाजपा ने राजस्थान के सीएम भजनलाल शर्मा को प्रमुख भूमिका में भेजा था। शर्मा ने सिलीगुड़ी से लेकर कोलकत्ता में मारवाड़ी समाज के साथ अलग-अलग बैठकें आयोजित कीं और उनसे सीधा संवाद किया।
सुरक्षा की दी गारंटी
सीएम भजनलाल शर्मा ने मारवाड़ी समाज के साथ हुई बैठकों में समाज व व्यापारिक मुद्धों पर चर्चा की। शर्मा ने बंगाल में भाजपा सरकार बनने के बाद देश की आथिर्क प्रगति में प्रमुख भूमिका निभाने वाले मारवाड़ी समाज को सुरक्षित माहौल की गारंटी भी दी थी।
भजनलाल ने जहां-जहां बैठक व प्रचार किया, वहां पार्टी ने 2021 के मुकाबले में प्रभावी प्रदर्शन किया है। कोलकत्ता के अलावा सीएम ने सिलीगुड़ी, हावड़ा उत्तर, बैरकपुर समेत छह विधानसभा क्षेत्रों में सभाओं को संबोधित किया। इन इलाकों में पार्टी को 2021 के मुकाबले बेहतर परिणाम मिले हैं।
राजस्थान के 50 से ज्यादा नेताओं ने संभाला मोर्चा
भाजपा ने पश्चिम बंगाल चुनाव में राजस्थान के 50 से ज्यादा वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों को जिम्मेदारी दी थी। इन नेताओं को उन इलाकों में सक्रिय किया गया जहां बड़ी संख्या में मारवाड़ी और राजस्थानी समुदाय के लोग रहते हैं। विशेषकर कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों में।
10 से 12 लाख प्रवासी राजस्थानी
पश्चिम बंगाल में अनुमानित 10 से 12 लाख प्रवासी राजस्थानी निवास करते हैं। इनमें अधिकांश मारवाड़ी व्यापारी वर्ग से हैं। व्यापार और उद्योग में उनकी मजबूत पकड़ को देखते हुए भाजपा ने इस सामाजिक-आर्थिक नेटवर्क को चुनावी रणनीति का हिस्सा बनाया।
प्रवासी बंगालियों को भी साधा
राजस्थान के जयपुर, जोधपुर और कोटा जैसे शहरों में बड़ी संख्या में बंगाल के मजदूर और कामगार कार्यरत हैं। ऐसे में दोनों राज्यों के बीच मौजूद इस सामाजिक जुड़ाव को राजनीतिक समर्थन में बदलने की कोशिश की गई और रणनीति कामयाब रही।
यह नेता गए थे राजस्थान से
राजस्थान से भेजे गए नेताओं में पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, सांसद सीपी जोशी, पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी, पूर्व मंत्री जितेंद्र गोठवाल, पूर्व विधायक अशोक परनामी, डॉ. मनोज राजोरिया सहित कई नाम शामिल रहे। अतुल भंसाली, विधायक अशोक सैनी, पूर्व प्रदेश मंत्री, वासुदेव चावला, पूर्व प्रदेश मंत्री आदि नेता शामिल थे।
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