कच्चा दूध और अधपका मांस खाने से फैल रहा ब्रुसेला, केकड़ी में बच्चे हुए संक्रमित

Jageshwar prasad | Aug 09, 2026, 15:40 IST
केकड़ी में स्कूली बच्चों में ब्रुसेला का प्रकोप
अजमेर में स्कूली बच्चों में ब्रुसेला संक्रमण से तेज बुखार के मामले सामने आए। दो बच्चे अजमेर के निजी अस्पताल और एक बालिका जयपुर रेफर। पीएमओ ने कच्चे दूध और आवारा मवेशियों को वजह बताया।

समझें क्या है पूरा मामला

  • केकड़ी में स्कूली बच्चों में ब्रुसेला का प्रकोप।
  • कच्चा दूध और आवारा पशु बने वजह।
  • एक बालिका जयपुर रेफर, दो अजमेर में भर्ती।
  • 20 दिन से ज्यादा बुखार हो तभी कराएं जांच।
  • जूनोटिक बीमारी है ब्रुसेला, पशुओं से इंसानों में।

अजमेर जिले के केकड़ी क्षेत्र में बच्चों में तेज बुखार के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। जांच में पता चला है कि इन बच्चों में ब्रुसेला (Brucella) संक्रमण के कारण बुखार हो रहा है। अब तक तीन से अधिक बच्चों में यह संक्रमण पाया गया है।



पीड़ित बच्चे क्षेत्र के निजी और सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी हैं। केकड़ी राजकीय जिला अस्पताल के पीएमओ (PMO – Principal Medical Officer) डॉ. राजेंद्र मौर्य ने बताया कि यह संक्रमण गंभीर नहीं है लेकिन इसके प्रति जागरूकता की सख्त जरूरत है।



क्या है ब्रुसेला संक्रमण?

ब्रुसेला एक जूनोटिक (Zoonotic) बीमारी है, यानी यह संक्रमित पशुओं से इंसानों में फैलती है। कच्चा दूध पीने, अधपका मांस खाने और संक्रमित भेड़, बकरी, गाय या भैंस के संपर्क में आने से यह बीमारी इंसानों में आती है। इस संक्रमण में लंबे समय तक तेज बुखार बना रहता है।



ब्रुसेला संक्रमण


कब करानी चाहिए जांच?

डॉ. मौर्य ने बताया कि यदि बुखार 4 से 5 दिन में ठीक हो जाता है तो जांच की जरूरत नहीं है। लेकिन यदि 20 से 25 दिन तक बुखार बना रहे तो ब्रुसेला जांच करानी चाहिए।



इस जांच की सुविधा अभी केकड़ी और अजमेर में उपलब्ध नहीं है। जांच दिल्ली और जयपुर जैसे महानगरों में होती है और यह महंगी भी होती है।



तीन बच्चे प्रभावित, एक जयपुर रेफर

दो बच्चों को परिजन इलाज के लिए अजमेर के निजी अस्पताल लाए जहां उनकी जांच में ब्रुसेला संक्रमण की पुष्टि हुई। केकड़ी जिला अस्पताल में भर्ती एक बालिका की भी ब्रुसेला जांच पॉजिटिव आई। बालिका तीन दिन केकड़ी अस्पताल में भर्ती रही और बाद में परिजन उसे इलाज के लिए जयपुर ले गए।



आवारा पशु और कच्चा दूध बड़ी वजह

डॉ. मौर्य ने कहा कि शहर और कस्बों की सड़कों पर घूमने वाले आवारा पशु, विशेषकर गोवंश, इस संक्रमण का बड़ा स्रोत बन सकते हैं। उन्होंने पशुपालन विभाग से आग्रह किया कि संक्रमित मवेशियों का उपचार और वैक्सीनेशन कराया जाए। आवारा पशुओं को कांजी हाउस या गौशाला में रखना चाहिए।



ब्रुसेला से बचाव के उपाय

कच्चा दूध न पिएं, हमेशा उबला हुआ या पाश्चुरीकृत दूध इस्तेमाल करें। मांस पूरी तरह पकाकर ही खाएं। संक्रमित पशुओं के संपर्क से बचें। बुखार 20 दिन से अधिक रहने पर डॉक्टर से संपर्क करें।



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