प्रसूताओं की मौत मामले में ऑक्सीटोसिन को क्लीनचिट, लापरवाही को माना जिम्मेदार
Jageshwar prasad | Jul 06, 2026, 13:27 IST
कोटा प्रसूता मौत: ऑक्सीटोसिन को क्लीनचिट, लापरवाही जिम्मेदार
राजस्थान के कोटा में 5 प्रसूताओं की मौत के लिए अस्पतालों की लापरवाही को जिम्मेदार माना है। यह तथ्य जांच के लिए गठित पैनल की रिपोर्ट में उजागर हुआ है। रिपोर्ट में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन को क्लीन चिट दी गई है।
समझें क्या है पूरा मामला
- कोटा में 5 प्रसूताओं की मौत के लिए अस्पतालों की लापरवाही को जिम्मेदार माना।
- जांच के लिए गठित पैनल ने अपनी रिपोर्ट में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन को दी क्लीनचिट।
- जांच रिपोर्ट में कहा कि ऑक्सीटोसिन की अनुपस्थिति मौत के लिए जिम्मेदार नहीं।
- रिपोर्ट के अनुसार उच्च जोखिम वाली गर्भधारण के प्रबंधन में प्रक्रियात्मक कमियां पाई गईं।
इस मामले की जांच के लिए 8 सदस्यों की एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई गई थी। इस कमेटी में एम्स (AIIMS) के डॉक्टर भी शामिल थे।
जांच रिपोर्ट में माना गया कि महिलाओं की मौत की वजह ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन नहीं था। जांच में उच्च जोखिम वाली गर्भधारण के प्रबंधन में प्रक्रियात्मक कमियों को जिम्मेदार ठहराया गया है।
पहले था दवा पर शक
शुरुआत में शक जताया गया था कि डिलीवरी के समय दिया जाने वाला ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन खराब था। इसके बाद सरकार ने इंजेक्शन की जांच कराई।
जांच में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन फेल था। यानी उसमें दवा के आवश्यक कंटेट नहीं थे। इसके बाद इस इंजेक्शन की सप्लाई पर बैन लगा दिया था। और संबंधित कंपनी का लाइसेंस रद्द कर दिया गया था। एक्सपर्ट कमेटी ने कहा है कि मौतों के लिए दवा जिम्मेदार नहीं थी।
मौत के कई कारण गिनाए
समिति का मानना है कि सक्रिय फार्मास्युटिकल घटक (API) ऑक्सीटोसिन की अनुपस्थिति को मृत्यु दर के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है।
जांच में सामने आईं ये बड़ी लापरवाहियां
इन्फेक्शन कंट्रोल फेल
गंभीर मरीजों की खराब मॉनिटरिंग
कागजी कार्रवाई में खानापूर्ति
छपे-छपाए पर्चों का इस्तेमाल
खून और दवाओं के रख-रखाव में कमी
सभी महिलाओं की मौत के कारण अलग थे
वहीं न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में एक महिला की मौत फेफड़ों में खून का थक्का जमने से हुई। एक अन्य महिला की मौत किडनी फेल होने के कारण हुई थी।
तीन शहरों में आए मामले सामने
बीकानेर के पीबीएम हॉस्पिटलमें जून में दो और प्रसूताओं की मौतें हुईं। छह महिलाओं की किडनी फेल हो गई थी।
जून में ही जोधपुर के जिला पावटा अस्पताल में सिजेरियन कराने के बाद दो महिलाओं की तबीयत बिगड़ गई। अधिकारियों ने इन मौतों के बीच किसी भी संबंध से इनकार किया है।
अस्पताल में आते हैं गंभीर केस
रिपोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि अगर अस्पताल प्रशासन सजग रहता तो कई महिलाओं की जान बचाई जा सकती थी। कमेटी ने अब अस्पतालों को अपने नियमों में तुरंत सुधार करने के लिए सुधार लाने को कहा है।
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