29 किलो सोना, 973 किलो चांदी बरसों से मालखाने में बंद, कैग ने उठाए सवाल
समझें क्या है पूरा मामला
- सरकारी तिजोरी में पड़ा है 64 करोड़ का सोना-चांदी।
- अपराधियों से जब्त कीमती धातु बन रही है कबाड़।
- 29 किलो सोना और 973 किलो पर कैग ने उठाई आपत्ति।
- कैग ने कहा- नीलाम करो, रखरखाव का खर्च बढ़ रहा है।
- कोर्ट ने राजकीय संपत्ति घोषित की, फिर भी निस्तारण नहीं।
राजस्थान सरकार की तिजोरी में 64.44 करोड़ रुपए का सोना और चांदी पड़ा हुआ है। यह सोना-चांदी अपराधियों से जब्त किया गया था और कोर्ट ने इसे राजकीय संपत्ति घोषित कर दिया था।
कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इसका नियमानुसार निस्तारण नहीं हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, मई 2025 तक भी कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। कैग ने सरकार से इन कीमती धातुओं की नीलामी करने को कहा है।
कैग ने उठाई गंभीर आपत्ति
कैग ने पहली बार ऐसी जानकारी साझा की है। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस और प्रवर्तन एजेंसियों ने यह जब्ती की थी। कोर्ट ने इसे राजकीय संपत्ति घोषित कर दिया था। इसके बावजूद नियमानुसार कार्रवाई नहीं हुई।
वित्त विभाग ने इनकी वैल्यूएशन करवा ली है। लेकिन मई 2025 तक निस्तारण नहीं किया गया। कैग ने इसे गंभीर मानते हुए सरकार से जरूरी कार्रवाई की सिफारिश की है। उन्होंने साफ कहा है कि इस सोने-चांदी की नीलामी की जानी चाहिए।
कोर्ट ने की थी राजकीय संपत्ति घोषित
राजस्थान कोषागार नियमावली-2012 के तहत कोषालय जयपुर को रिजर्व कोषागार घोषित किया गया है। सामान्य और आपराधिक मामलों में कोर्ट की ओर से राजकीय संपत्ति घोषित सामान यहीं जमा किए जाते हैं। यहां सोना, चांदी, हीरे और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं रखी जाती हैं।
वित्त विभाग ने इन वस्तुओं को दो श्रेणियों में बांटा है। पहली कैटेगरी में पुरातात्विक महत्व की वस्तुएं हैं। इन्हें पुरातत्व विभाग को सौंपा जाना चाहिए। दूसरी कैटेगरी में सोना-चांदी है, जिसे मुंबई की टकसाल में भेजकर शुद्ध धातु में बदलना है।
नियमों का उल्लंघन
कैग ने पाया कि पुरातात्विक वस्तुओं को छोड़कर बाकी सोना-चांदी का वैल्यूएशन तो हो गया था। लेकिन नियमानुसार निस्तारण नहीं किया गया। इस पर कैग ने निदेशक कोष एवं लेखा को सिफारिश की है।
कैग ने कहा है कि राज्य सरकार को सक्षम स्तर से निर्देश जारी करने चाहिए। कोषाधिकारी जयपुर के सुरक्षित कक्ष में रखे सोने-चांदी का नियमानुसार निस्तारण कराया जाए। इसके लिए नीलामी की प्रक्रिया अपनानी होगी।
रखरखाव का बढ़ता खर्च
कैग ने एक और अहम बात उठाई है। समय से निस्तारण नहीं होने से सरकार पर सुरक्षा और रखरखाव का खर्च बढ़ रहा है। इससे सरकार को नुकसान हो रहा है। इन कीमती धातुओं को सुरक्षित रखने के लिए विशेष व्यवस्था की जाती है, जिस पर पैसा खर्च हो रहा है।
कैग का कहना है कि नियमों के अनुसार, पुरातात्विक महत्व की सामग्री पुरातत्व विभाग को सौंपनी होती है। वहीं अन्य बहुमूल्य सामग्री को टकसाल भेजकर शुद्ध धातु में बदलना और मॉनेटाइज करना होता है। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।
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