ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) पर CAG ने राजस्थान सरकार से मांगा अगले 10 साल का रोडमैप
News In Short
- CAG ने राजस्थान सरकार से OPS के लिए 10 साल का वित्तीय रोडमैप मांगा।
- सरकार को OPS का बोझ और राजस्व-खर्च का संतुलन स्पष्ट करने का निर्देश।
- 15 जून तक राजस्थान सरकार को CAG के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी रिपोर्ट।
- CAG की रिपोर्ट का आधार FRBM एक्ट की अनुपालना का भी है।
- राजस्थान में OPS लागू होने के बाद पड़ने वाले आर्थिक बोझ पर चर्चा तेज।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान में ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। लेकिन इस बार यह चर्चा चुनावी गलियारों में नहीं, बल्कि सरकारी फाइलों और आर्थिक आंकड़ों के बीच छिड़ी है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) को लेकर राजस्थान सरकार को एक नोटिस जारी कर अगले 10 वर्षों का वित्तीय रोडमैप मांगा है।
CAG का सवाल
CAG ने शनिवार को जारी इस नोटिस में राजस्थान सरकार से स्पष्ट पूछा है कि OPS लागू होने के बाद अगले एक दशक में राज्य के बजट पर कितना बोझ पड़ेगा। रिपोर्ट में सरकार को तीन मुख्य बिंदुओं पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी:
अनुमानित बोझ: अगले 10 सालों में पेंशन भुगतान के लिए कितनी अतिरिक्त राशि की आवश्यकता होगी?
राजस्व बनाम खर्च: क्या राज्य की मौजूदा आय इस भारी-भरकम खर्च को वहन करने में सक्षम है?
वित्तीय संतुलन: पेंशन का बढ़ता बोझ अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं और बुनियादी ढांचे के विकास पर कितना नकारात्मक प्रभाव डाल रहा?
FRBM एक्ट के अनुरूप राजकोषीय अनुशासन लाना
यह नोटिस कोई साधारण पूछताछ नहीं है, बल्कि वित्तीय जिम्मेदारी एवं बजट प्रबंधन अधिनियम (FRBM Act) के तहत की गई एक कार्रवाई है। क्योंकि FRBM कानून राज्यों के लिए एक वित्तीय लक्ष्मण रेखा की तरह है। यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी राज्य अपनी क्षमता से अधिक खर्च न करे और कर्ज के दलदल में न फंसे।
इसे संसद में अगस्त 2003 में पारित किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य राजकोषीय अनुशासन लाना और सार्वजनिक वित्त के प्रबंधन को बेहतर बनाना है।
15 जून की डेडलाइन
CAG ने इस विस्तृत रिपोर्ट को जमा करने के लिए 15 जून तक का समय दिया है। सरकार को अब अपनी आर्थिक स्थिति की रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। यदि रिपोर्ट में वित्तीय असंतुलन की पुष्टि होती है, तो राज्य के लिए केंद्र से मिलने वाली मदद और कर्ज लेने की सीमा पर भी असर पड़ सकता है।
क्यों छिड़ी है ह बहस?
गौरतलब है कि साल 2022 में राजस्थान ने देशभर में सुर्खियां बटोरी थीं जब तत्कालीन सरकार ने NPS को हटाकर वापस OPS लागू कर दिया था। तब से ही अर्थशास्त्रियों के बीच दो गुट बन गए थे - एक जो इसे कर्मचारियों का हक मान रहे थे और दूसरे जो इसे भविष्य की पीढ़ी पर आर्थिक बोझ करार दे रहे थे। इस रिपोर्ट के आने के बाद यह साफ हो जाएगा कि राजस्थान का खजाना OPS को चलाने में सक्षम है या नहीं।
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