कैंसर मरीजों को मिलेगी टेलीमेडिसिन सुविधा, नहीं लगाने पड़ेंगे जयपुर के चक्कर
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान में हर साल मिल रहे 40-45 हजार नए कैंसर मरीज।
- अब जयपुर के चक्कर नहीं, जिले में मिलेगा टेलीमेडिसिन इलाज।
- क्योंकि अर्ली डिटेक्शन से कैंसर को पूरी तरह हराया जा सकता है।
- मोटापा, प्रदूषण और बदलती जीवनशैली बढ़ा रही कैंसर का खतरा।
- दुनिया में हर पांचवां व्यक्ति होगा कैंसर से प्रभावित।
राजस्थान में हर साल 40 से 45 हजार नए कैंसर मरीज सामने आ रहे हैं। इसीलिए कैंसर अब सिर्फ उम्रदराज लोगों की बीमारी नहीं रह गई है। आजकल यह किसी भी उम्र में देखने को मिल रहा है।
कैंसर के इलाज के लिए मरीज को एसएमएस अस्पताल, स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट या निजी अस्पताल जाना पड़ता है। इसी बीच राहत की खबर यह है कि अगस्त से जिलों में ही टेलीमेडिसिन के जरिए इलाज मिलना शुरू हो जाएगा।
हर दिन 4,300 से ज्यादा नए मरीज
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद, यानी ICMR (Indian Council of Medical Research) की राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री के अनुसार देश में 2025 में करीब 15.7 लाख नए कैंसर मरीज सामने आने का अनुमान है। इसका मतलब है कि रोजाना औसतन 4,300 से ज्यादा लोग कैंसर की चपेट में आ रहे हैं।
राजस्थान में एकीकृत कैंसर रजिस्ट्री शुरू करने की तैयारी भी इसी वजह से हो रही है। इससे हर जिले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।
हाल ही जारी ग्लोबल स्टेटस रिपोर्ट ऑन कैंसर 2026 के अनुसार दुनियाभर में हर साल करीब 2.06 करोड़ नए कैंसर मरीज सामने आ रहे हैं। साल 2050 तक यह आंकड़ा 3.5 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है।
जल्द पहचान से मिली नई जिंदगी
कई मरीजों की कहानियां उम्मीद जगाती हैं। जयपुर की 35 साल की एक युवती की समय रहते पहचान हुई थी। अर्ली डिटेक्शन से कैंसर का उपचार पूरी तरह सफल रहा और आज वह सुखी वैवाहिक जीवन जी रही है।
टोंक जिले की एक 70 साल की महिला को 10 साल पहले शुरुआती स्तर पर ब्लड कैंसर का पता चला था। इलाज के बाद अब वह कुछ दवाइयों के सहारे सामान्य जीवन जी रही है। ऐसे उदाहरण बताते हैं कि जल्द पहचान से कैंसर को हराया जा सकता है।
किन कैंसर का खतरा सबसे ज्यादा
पुरुषों में मुंह, फेफड़ों, ब्लड और भोजन नली के कैंसर के मामले ज्यादा देखे जा रहे हैं। महिलाओं में स्तन और गर्भाशय ग्रीवा यानी सर्वाइकल कैंसर प्रमुख हैं। वहीं दोनों में कोलोरेक्टल और रक्त संबंधी कैंसर की समस्या सामने आ रही है।
मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, प्रदूषण और बदलती जीवनशैली इसके नए जोखिम कारक बन रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्क्रीनिंग और शुरुआती जांच की कमी भी बड़ी समस्या है। इस वजह से कई मरीज देरी से अस्पताल पहुंचते हैं।
देर से पहचान से बढ़ता है खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश मरीज तीसरे या चौथे चरण में अस्पताल पहुंचते हैं। उनका कहना है कि स्तन, गर्भाशय ग्रीवा, मुंह और बड़ी आंत जैसे कैंसर की शुरुआती अवस्था में पहचान होने पर इलाज की सफलता कई गुना बढ़ जाती है।
पॉपुलेशन बेस कैंसर रजिस्ट्री, यानी PBCR सभी नए मामलों का वैज्ञानिक रिकॉर्ड तैयार करती है। इसी के आधार पर बेहतर इलाज सुविधाओं की योजना बनाई जा सकती है।
अब जिले में ही मिलेगा इलाज
प्रदेश के कैंसर मरीजों को अगस्त महीने से बड़ी राहत मिलने जा रही है। अब उन्हें बार-बार जयपुर आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। जिलों के मेडिकल कॉलेजों में टेलीमेडिसिन के जरिए एसएमएस मेडिकल बोर्ड के विशेषज्ञ चिकित्सकों की राय उपलब्ध कराई जाएगी।
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने बताया कि नई कैंसर गाइडलाइन लागू कर दी गई है। उनके अनुसार इससे इलाज प्रक्रिया अधिक सरल और मरीज-केंद्रित बनेगी। यह जानकारी सोमवार को शासन सचिवालय में हुई RGHS समीक्षा बैठक में दी गई।
FAQ
- कैंसर से बचाव के लिए सबसे जरूरी उपाय क्या है?
विशेषज्ञों के अनुसार शुरुआती जांच सबसे बड़ी जीत है। तंबाकू नियंत्रण से एक-तिहाई कैंसर रोके जा सकते हैं। स्क्रीनिंग बढ़ाने और जिला स्तर तक कैंसर रजिस्ट्री विकसित करने की भी जरूरत है। - टेलीमेडिसिन सुविधा क्या है?
टेलीमेडिसिन सुविधा एक ऐसी डिजिटल चिकित्सा सेवा है, जिसके माध्यम से डॉक्टर और मरीज अस्पताल में व्यक्तिगत रूप से मिले बिना इंटरनेट, वीडियो कॉल, ऑडियो कॉल या टेक्स्ट मैसेज के जरिए दूर से ही परामर्श, निदान और इलाज प्राप्त करते हैं। यह सुविधा विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के लोगों के लिए वरदान है।
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