उपभोक्ता विवाद: मोतियाबिंद ऑपरेशन में नेग्लिजेंस, अब 6 लाख का मुआवजा देने का आदेश
समझें क्या है पूरा मामला
- मोतियाबिंद ऑपरेशन में लापरवाही, 6 लाख मुआवजे के आदेश।
- ऑपरेशन के बाद बिगड़ी आंख, इंदौर में निकालनी पड़ी।
- उपभोक्ता आयोग ने अस्पताल और डॉक्टर को माना जिम्मेदार।
- सेवा में कमी, मानसिक संताप के 50 हजार अलग से।
- पोस्ट-ऑपरेटिव केयर में लापरवाही, जांच रिपोर्ट में हुआ खुलासा।
झालावाड़ के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग (कंज्यूमर कोर्ट) ने निजी अस्पताल में आंख के मोतियाबिंद का ऑपरेशन बिगड़ने के मामले में सेवा में कमी व लापरवाही मानते हुए परिवादी को 6 लाख रुपए क्षतिपूर्ति राशि देने के आदेश जारी किए हैं।
इसके साथ ही परिवादी को मानसिक संताप के रूप में 50 हजार और परिवाद व्यय के रूप में 20 हजार रुपए अलग से देने के निर्देश दिए हैं।
आयोग ने सुनवाई के दौरान फरियादी तथा बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद निजी अस्पताल और ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर की सेवा में कमी व लापरवाही को जिम्मेदार माना।
क्या है पूरा मामला?
आयोग के सदस्य वीरेंद्र सिंह रावत ने बताया कि झालरापाटन कस्बे के रमेश चंद गुप्ता ने अपनी बाईं आंख में परेशानी होने पर निजी अस्पताल का रुख किया था, जहां जांच के बाद डॉक्टर ने आंख में मोतियाबिंद बताते हुए ऑपरेशन करने की सलाह दी थी।
ऑपरेशन के लिए मरीज को करीब 16 हजार रुपए खर्च बताया गया था। इसके बाद मरीज ने निजी अस्पताल में अपनी आंख का मोतियाबिंद ऑपरेशन करवाया।
ऑपरेशन के बाद बिगड़ी हालत
ऑपरेशन के कुछ ही घंटे बाद मरीज की आंख में तेज दर्द और पीड़ा शुरू हो गई। मरीज ने अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ से शिकायत की और ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर को बुलाने को कहा, लेकिन डॉक्टर उपलब्ध नहीं हुए।
अगले दिन पट्टी खुलने पर भी मरीज को बाईं आंख से दिखाई नहीं दिया और दर्द बना रहा। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने मरीज को कोटा में डॉक्टर को दिखाने की सलाह दी।
इंदौर में निकालनी पड़ी आंख
परिवादी आंख की जांच के लिए कोटा पहुंचा, जहां डॉक्टर ने आंख में गंभीर संक्रमण होना बताया और विशेषज्ञ चिकित्सक ने उपचार की जरूरत बताई।
इसके बाद मरीज की हालत बिगड़ती चली गई और आखिरकार इंदौर के अस्पताल में बाईं आंख का ऑपरेशन कर उसे निकालना पड़ा।इस मामले को लेकर एक शिकायत मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, झालावाड़ के समक्ष भी की गई।
जांच रिपोर्ट में ऑपरेशन के बाद पोस्ट-ऑपरेटिव केयर में लापरवाही के कारण आंख में संक्रमण होने की बात सामने आई और दोषी सर्जन के विरुद्ध कार्रवाई की अनुशंसा की गई।
6 लाख रुपए देने के आदेश
आयोग ने मरीज की आंख के उपचार में बरती गई लापरवाही के चलते 5 लाख रुपए तथा उपचार, परिवहन, अटेंडेंट एवं अन्य खर्चों के लिए 1 लाख रुपए, यानी कुल 6 लाख रुपए दिए जाने के आदेश जारी किए हैं। अस्पताल व डॉक्टर को क्षतिपूर्ति भुगतान का आदेश दिया गया है।
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