विधवा को 9 साल 4 महीने दर‑दर भटकाया, अब उपभोक्ता आयोग ने LIC पर लगाया जुर्माना

Jageshwar prasad | May 25, 2026, 17:08 IST
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Ashish Bhardwaj - 2026-05-25T165750.067
Photograph: (the sootr)

राजस्थान की झुंझुनूं जिला उपभोक्ता आयोग ने LIC को 5.54 लाख रुपए क्लेम राशि, 85 हजार पेनल्टी और 1.5 लाख क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है। एक किसान की विधवा को 9 साल 4 महीने तक इंश्योरेंस क्लेम के लिए दर-दर भटकना पड़ा था।

News In Short

  • किसान की मौत के बाद विधवा को 9 साल तक इंश्योरेंस क्लेम नहीं मिला, LIC पर लगा जुर्माना।
  • उपभोक्ता आयोग ने कहा- प्रीमियम लेते हैं, क्लेम के समय कानूनी पचड़ों में फंसा देते हैं।
  • आयोग ने LIC को साढ़े 5 लाख क्लेम, 85 हजार पेनल्टी और डेढ़ लाख क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया।
  • आयोग अध्यक्ष ने फैसले की कॉपी मुख्य सचिव को भेजकर गाइडलाइन बनाने को कहा।
  • आयोग ने वकीलों से अपील की कि साल में कम से कम एक गरीब का केस मुफ्त लड़ें।

News In Detail

जिला उपभोक्ता आयोग ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को जमकर फटकार लगाई है। आयोग अध्यक्ष मनोज कुमार मील ने कहा कि 9 साल 4 महीने तक किसान की मौत के बाद विधवा महिला को इंश्योरेंस क्लेम के लिए दर-दर भटकना पड़ा। यह पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बनाए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की आत्मा की हत्या करने जैसा है।

आयोग ने LIC पर भारी पेनल्टी लगाते हुए साफ किया कि प्रीमियम लेने के बावजूद क्लेम के वक्त कानूनी पचड़ों में फंसाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

9 साल 4 महीने तक भटकती रही विधवा

यह मामला सहकार जीवन सुरक्षा बीमा योजना में LIC की लापरवाही का है। झुंझुनूं के चुड़ैला ग्राम सेवा सहकारी समिति के 395 किसानों ने इस योजना के तहत बीमा प्रीमियम जमा करवाया था। चुड़ैला निवासी श्योराम ने 14 अगस्त 2012 को पॉलिसी ली थी और वह हर महीने 160 रुपये प्रीमियम जमा कर रहे थे।

17 फरवरी 2013 को श्योराम की मौत हो गई। इसके बाद उनकी पत्नी सजना देवी ने 8 मार्च 2013 को इंश्योरेंस राशि के भुगतान के लिए LIC से संपर्क किया। लेकिन LIC ने टालमटोल करना शुरू कर दिया। कंपनी का कहना था कि श्योराम के नाम की एंट्री ही उनके पास नहीं है। आखिरकार 14 दिसंबर 2016 को सजना देवी ने जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।

आयोग ने क्या कहा?

आयोग ने फैसला सुनाते हुए तीखी टिप्पणी की। आयोग ने कहा कि ग्रामीण और किसान उपभोक्ताओं से योजनाओं के नाम पर समय पर प्रीमियम तो ले लिया जाता है, लेकिन जब क्लेम देने का वक्त आता है तो उन्हें अंतहीन कानूनी पचड़ों और मानसिक प्रताड़ना के जाल में फंसा दिया जाता है।

आयोग अध्यक्ष मनोज कुमार मील ने कहा कि उपभोक्ताओं को जल्दी और आसान न्याय दिलाने के लिए राजीव गांधी के समय उपभोक्ता संरक्षण कानून लाया गया था और 2019 में इस कानून को और मजबूत किया गया। इसके बावजूद एक पीड़ित महिला को 9 साल 4 महीने तक न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ा, जो इस कानून की आत्मा की हत्या करने जैसा है।

LIC को कितना देना होगा?

उपभोक्ता आयोग ने LIC को बीमा क्लेम की राशि 5 लाख 54 हजार 275 रुपए देने को कहा। साथ ही, लगातार 9 साल तक परेशान करने पर 85 हजार रुपए की पेनल्टी और 1.5 लाख रुपए की विशेष क्षतिपूर्ति राशि भी देने का आदेश दिया। यह फैसला सभी बीमा कंपनियों के लिए एक कड़ी चेतावनी माना जा रहा है।

मुख्य सचिव को भेजी फैसले की कॉपी

आयोग अध्यक्ष ने इस फैसले की एक कॉपी सीधे राजस्थान के मुख्य सचिव को भेजी है। इसका उद्देश्य किसानों और मजदूरों जैसे ग्रामीण उपभोक्ताओं से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश बनाना है। आयोग चाहता है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

वकीलों से आयोग की अपील

आयोग अध्यक्ष मनोज कुमार मील ने वकीलों से भी एक बड़ी अपील की है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ता कानून के त्वरित न्याय के सपने को सच करने के लिए वकीलों को आगे आना चाहिए। हर वकील को साल में कम से कम एक मामला किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति के लिए बिल्कुल मुफ्त लड़ना चाहिए। इससे समाज के कमजोर वर्गों को न्याय मिल सकेगा और उनका विश्वास कानूनी व्यवस्था पर बना रहेगा।

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