जनगणना के लिए स्कूलों में अब 50% तक शिक्षक हो सकेंगे रिलीव, जानिए यह फैसला किन शहरों पर होगा लागू?
News In Short
- जनगणना ड्यूटी को लेकर शिक्षा विभाग ने अपने पुराने आदेश में कुछ बदलाव किया
- दो बड़े शहरों के स्कूलों से अब अधिकतम 50 प्रतिशत शिक्षक होंगे कार्यमुक्त।
- पहले 30 प्रतिशत से अधिक शिक्षकों को जनगणना ड्यूटी में नहीं लगाए जाने की थी व्यवस्था।
- जनगणना कार्य निदेशालय ने शिक्षा विभाग को आदेश में छूट देने का किया था अनुरोध।
- दो शहरों के अलावा बाकी जिलों में शिक्षा विभाग का पुराना आदेश यथावत रहेगा लागू।
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Jaipur: राजस्थान में जनगणना कार्यों को गति देने के लिए शिक्षा विभाग ने एक अहम निर्णय लिया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने जयपुर और अजमेर नगर निगम क्षेत्रों के स्कूलों के लिए शिक्षकों की कार्यमुक्ति सीमा में ढील दी है। अब इन विशिष्ट क्षेत्रों के विद्यालयों से अधिकतम 50 प्रतिशत शिक्षकों को जनगणना ड्यूटी के लिए कार्यमुक्त किया जा सकेगा।
पुराने नियमों में संशोधन
माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट द्वारा जारी आदेश के अनुसार इससे पहले 13 मार्च 2026 को जारी एक पत्र के माध्यम से यह व्यवस्था लागू की गई थी कि किसी भी विद्यालय में शैक्षणिक कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए 30 प्रतिशत से अधिक शिक्षकों को जनगणना ड्यूटी में नहीं लगाया जाएगा। यदि संख्या इससे अधिक होती, तो उन्हें कार्यमुक्त करने पर पाबंदी थी।
क्यों लिया गया यह निर्णय?
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जनगणना कार्य निदेशालय ने 7 मई 2026 को एक अनुरोध भेजा था। जनगणना कार्य के महत्व और जयपुर व अजमेर नगर निगम क्षेत्रों में जनशक्ति की आवश्यकता को देखते हुए विभाग ने पूर्व में जारी निर्देशों में आंशिक संशोधन किया है।
मुख्य बदलाव और शर्तें
शिक्षा विभाग ने इस छूट के साथ कुछ महत्वपूर्ण शर्तें भी लागू की हैं। शिक्षकों की संख्या 30% से बढ़ाकर 50% करने का यह नियम केवल नगर निगम जयपुर एवं नगर निगम अजमेर के अंतर्गत आने वाले विद्यालयों पर ही लागू होगा।
राजस्थान के अन्य सभी जिलों के लिए पूर्व में निर्धारित 30 प्रतिशत की सीमा ही लागू रहेगी। वहां नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
निदेशालय ने विशेष रूप से निर्देशित किया है कि जनगणना में ड्यूटी इस प्रकार लगाई जाए कि विद्यालयों में विद्यार्थियों का शिक्षण कार्य बाधित न हो। प्रशासन को यह संतुलन बनाना होगा कि जनगणना का राष्ट्रीय कार्य भी पूरा हो और छात्रों की पढ़ाई का नुकसान भी न हो।
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