पिता को बेटे का आखिरी सैल्यूट, शहीद का दर्जा देने पर अड़े रहे लोग

Ashish Bhardwaj | Aug 01, 2026, 19:45 IST
बीआरओ जवान जगवीर रेपसवाल
राजस्थान में चूरू के सादुलपुर में बीआरओ जवान जगवीर रेपसवाल का अंतिम संस्कार हुआ। 13 साल के बेटे राहुल ने पिता को मुखाग्नि दी। शहीद दर्जे की मांग पर परिजनों ने 6 घंटे धरना दिया था। सहमति बनने के बाद 9 किलोमीटर की तिरंगा यात्रा निकाली गई।

समझें क्या है पूरा मामला

  • BRO जवान जगवीर को बेटे ने दी अंतिम विदाई।
  • 13 साल के राहुल ने पिता को दी मुखाग्नि।
  • शहीद दर्जे की मांग पर 6 घंटे चला धरना।
  • सहमति के बाद निकली 9 किलोमीटर तिरंगा यात्रा।
  • अरुणाचल में पत्थर गिरने से हुई थी जवान की मौत।

राजस्थान में चूरू के सादुलपुर में भावुक कर देने वाला दृश्य देखने को मिला। बीआरओ जवान जगवीर रेपसवाल (40) का अंतिम संस्कार हुआ। उनके 13 साल के बेटे राहुल ने पिता को मुखाग्नि दी। इससे पहले परिजनों ने शहीद का दर्जा देने की मांग को लेकर 6 घंटे धरना दिया था। मांगों पर सहमति बनने के बाद जवान के पैतृक गांव तक तिरंगा यात्रा निकाली गई।



जगवीर अरुणाचल प्रदेश में तैनात थे। पहाड़ी क्षेत्र में बचाव कार्य के दौरान उनके ऊपर पत्थर गिरने से उनकी मौत हो गई थी।



बेटे ने दी आखिरी विदाई

श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार से पहले एक मार्मिक पल देखने को मिला। बेटे राहुल ने पिता को पुष्पचक्र अर्पित किया। इसके बाद उसने पिता को आखिरी सैल्यूट दिया। यह देखकर वहां मौजूद हर कोई भावुक हो गया। राहुल की आंखों से आंसू थम नहीं रहे थे।



कैसे हुई थी जगवीर की मौत

जगवीर बीआरओ यानी बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (BRO – Border Roads Organisation) से जुड़े थे। वे जनरल रिजर्व इंजीनियर फोर्स यानी ग्रीफ (GREF – General Reserve Engineer Force) में तैनात थे। उनकी तैनाती अरुणाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्र में थी।



हादसे के वक्त वे बचाव दल के साथ काम कर रहे थे। इसी दौरान उनके ऊपर अचानक पत्थर गिर गया। इस हादसे में उनकी मौके पर ही मौत हो गई।



शव पहुंचते ही शुरू हुआ धरना

जवान का शव शनिवार सुबह सादुलपुर शहीद स्मारक पहुंचा। शव पहुंचते ही परिजनों ने बड़ा फैसला लिया। उन्होंने पार्थिव देह लेने से इनकार कर दिया। परिजन सुबह 9 बजे से ही धरने पर बैठ गए थे।



परिजनों की एक ही मांग थी। वे जगवीर को शहीद का दर्जा दिए जाने की मांग कर रहे थे। यह धरना करीब 6 घंटे तक चला। आखिरकार दोपहर 3 बजे मांगों पर सहमति बन सकी।



ग्रामीणों ने दी थी रास्ता जाम करने की चेतावनी

सुबह से ही ग्रामीण भी धरने में शामिल हो गए थे। वे भी मांगों को लेकर प्रदर्शन करने लगे थे। मौके पर स्थिति को देखते हुए प्रशासन भी सक्रिय हो गया।



सादुलपुर विधायक मनोज न्यांगली मौके पर पहुंचे। एसडीएम मनोज खेमदा और थानाधिकारी राजेश सिहाग भी वहां मौजूद रहे। कई अन्य अधिकारी भी लोगों को समझाने पहुंचे। इसके बावजूद ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे। उन्होंने मांगें नहीं मानने पर रास्ता जाम करने की चेतावनी दे दी।



विधायक ने मंत्री से की बात

विधायक मनोज न्यांगली ने मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने सैनिक कल्याण मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ से सीधी बात की। इसके बाद विधायक ने जिला कलेक्टर से भी संपर्क किया।



विधायक ने ग्रामीणों की ओर से आधे घंटे का अल्टीमेटम भी दिया। कुछ ही देर में बड़ी खबर आई। मांगों पर सहमति बन गई और प्रदर्शन खत्म कर दिया गया।



निकली 9 किलोमीटर की तिरंगा यात्रा

सहमति बनने के बाद माहौल बदल गया। सादुलपुर से जवान के पैतृक गांव लंबोर तक तिरंगा यात्रा निकाली गई। यह यात्रा करीब 9 किलोमीटर लंबी थी। इसी यात्रा के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हुई।



भाजपा नेता देवेंद्र झाझड़िया ने भी परिजनों से बातचीत में अहम भूमिका निभाई। उनकी मौजूदगी में ही मांगों पर मौखिक सहमति बनी थी।



ग्रीफ जवानों को नहीं मिलता शहीद दर्जा

इस पूरे मामले में एक बड़ा मुद्दा सामने आया है। भूतपूर्व सैनिक संघ के पूर्व अध्यक्ष जगत सिंह ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ग्रीफ के जवानों को फौज की बाकी सुविधाएं तो मिलती हैं। लेकिन उन्हें शहीद का दर्जा नहीं दिया जाता। यही वजह थी कि परिजन इस मांग को लेकर अड़े रहे।



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