अरावली की तबाही पर हाईकोर्ट का चाबुक, पहाड़ियों को निगल गए होटल, कटघरे में सरकार
Mukesh Sharma | Aug 01, 2026, 16:56 IST
अरावली पर होटल
राजस्थान हाई कोर्ट ने उदयपुर की अरावली पहाड़ियों पर अंधाधुंध व्यावसायिक निर्माण पर राज्य सरकार को फटकार लगाई है। कोर्ट ने 2018 की हिल पॉलिसी और पर्यावरण अनदेखी पर नाराजगी जताते हुए निर्माण मंजूरियां देने वाले अधिकारियों व संबंधित एजेंसी को तलब किया है।
समझें क्या है पूरा मामला
- पहाड़ गायब, होटल तैयार, उदयपुर की ऐतिहासिक पहाड़ियों और मगरियों का अस्तित्व दांव पर।
- 2018 की हिल पॉलिसी कठघरे में, बिना विशेषज्ञों की सलाह बाहरी एजेंसी से तैयार नीति पर सवाल।
- पब्लिक ट्रस्ट से खिलवाड़,अदालत ने पर्यावरण तबाही पर जताई गहरी चिंता,मांगा हिसाब।
- अफसरों और एजेंसियों पर शिकंजा,निर्माण मंजूरी देने वाले अधिकारियों व मसौदा बनाने वालों के नाम तलब।
कोर्ट ने कहा कि उदयपुर के पहाड़ों और मगरियों को इस बेरहमी से काटा जा रहा है कि उनका अस्तित्व ही खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है। पहाड़ों की जगह होटलों ने ले ली है। जिस शहर को झीलों, पहाड़ियों और वन्यजीव अभयारण्यों के लिए जाना जाता था, उसे नीतिगत लापरवाही ने दयनीय स्थिति में धकेल दिया गया है।कोर्ट ने बसंत होटल्स प्राइवेट लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई के दौरान उक्त टिप्पणियां की हैं।
याचिकाकर्ता का तर्क था कि उसने 2018 की नीति के तहत सभी आवश्यक सरकारी अनुमतियां प्राप्त कर ली थीं और भारी निवेश किया था। इसलिए उस पर नई हिल पॉलिसी 2024 या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई लागू नहीं होनी चाहिए। हालांकि, कोर्ट की ओर से नियुक्त कमिश्नरों की रिपोर्ट और हवाई तस्वीरों ने पहाड़ियों के व्यावसायिक शोषण की भयावह तस्वीर पेश कर दी।
लगता है प्राईवेट कंपनी से तैयार करवाई पॉलिसी
पब्लिक ट्रस्ट डॉक्ट्रिन का उल्लंघन है
सरकार के बताने पर कि मामले में झील संरक्षण समिति की जनहित याचिका लंबित चल रही है। कोर्ट ने इस मामले को झील संरक्षण समिति की जनहित याचिका के साथ सूचीबद्ध करने व संबंधित खंडपीठ में भेजने को कहा है। इस पीआईएल में 2024 की नीति को रद्द करने और एक विशेषज्ञ राज्य स्तरीय पहाड़ी संरक्षण प्राधिकरण के गठन की मांग की है।
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