कोचिंग संस्थानों में झूठ का कारोबार, दो बड़े संस्थानों के विज्ञापनों में मिला फर्जीवाड़ा
News In Short
- राजस्थान के दो बड़े कोचिंग संस्थानों में विज्ञापनों का मिला फर्जीवाड़ा।
- सीसीपीए ने कसा शिकंजा, दोनों कोचिंग संस्थान पर 15 लाख रुपए जुर्माना।
- टेस्ट सीरीज वाले छात्रों को नियमित छात्र बताकर जनता को कर रहे थे गुमराह
- फोटो के साथ छेड़छाड़ और छात्रों के निजी डेटा के दुरुपयोग का आरोप।
- अब विज्ञापनों में छात्र की फोटो के साथ कोर्स का नाम और कोर्स अवधि बताना अनिवार्य।
News In Detail
राजस्थान के कोचिंग संस्थानों में भ्रामक विज्ञापनों का खेल चल रहा है। ऐसे ही मामलों में केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने दो कोचिंग संस्थानों में कुल 15 लाख रुपए जुर्माना लगाया है। महत्वपूर्ण यह है कि मुख्य आयुक्त निधि खरे और आयुक्त अनुपम मिश्रा की अध्यक्षता वाले प्राधिकरण ने स्व:प्रेरित प्रसंज्ञान से दर्ज किए इन मामलों में जांच के बाद ये आदेश दिए हैं।
प्राधिकरण का कहना है कि दोनों संस्थानों ने अपने विज्ञापनों में सफलता के दावों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया और महत्वपूर्ण जानकारियों को जानबूझकर छिपाया। प्राधिकरण ने कोटा के बड़े कोचिंग संस्थान मोशन एजुकेशन पर 10 लाख रुपए और सीकर के करियर लाइन कोचिंग (CLC) पर पांच लाख रुपए जुमाना लगाया है।
फौरन बंद करने होंगे भ्रामक विज्ञापन
प्राधिकरण ने दोनों संस्थानों को अपने-अपने वर्तमान भ्रामक विज्ञापनों को फौरन बंद करने के आदेश दिए हैं। प्राधिकरण के निर्देशानुसार भविष्य में दोनों कोचिंग संस्थान को किसी भी सफल छात्र का विज्ञापन करने पर छात्र का नाम, रैंक और फोटो के साथ-साथ उनके द्वारा लिए गए विशिष्ट कोर्स का नाम और उसकी अवधि स्पष्ट रूप से बतानी होगी।
कोचिंग के नियमित छात्रों का दिया विज्ञापन
प्राधिकरण को जांच में पता चला कि मोशन एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड ने वर्ष 2025 के आईआईटी-जेईई और नीट परिणामों को लेकर अपने विज्ञापनों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर भ्रामक दावे किए थे। उसने नीट के लिए 91.2% और जेईई एडवांस्ड के लिए 51.02% छात्रों के सफल होने का दावा करते हुए 'मोशन है तो सिलेक्शन है' जैसे नारे विज्ञापन में प्रचारित किया।
महानिदेशक (जांच) की जांच में खुलासा हुआ कि विज्ञापन में दिखाए गए अधिकांश छात्र वास्तव में संस्थान के नियमित क्लासरूम प्रोग्राम के बजाय आई-एकलव्या नामक एक ऑनलाइन कोर्स से जुड़े थे। लेकिन इस फैक्ट को विज्ञापन में कहीं भी स्पष्ट नहीं किया गया।
डेटा की भी कर रहे थे चोरी
जांच के दौरान मोशन एजुकेशन द्वारा डेटा के दुरुपयोग और डिजिटल हेरफेर का भी खुलासा हुआ। जांच में पता चला कि संस्थान ने पुरस्कारों और मुफ्त टेस्ट सीरीज के बहाने छात्रों की व्यक्तिगत जानकारी एकत्र की। उनकी सहमति के बिना उनके नाम और फोटो का उपयोग विज्ञापन में किया।
कुछ अभिभावकों ने विज्ञापनों में उनके बच्चों के चेहरों के साथ किसी अन्य व्यक्ति की तस्वीरों का
इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया। कानूनी रुप से ऐसा करना डिजिटल हेरफेर का सबूत है। प्राधिकरण ने संस्थान की ओर से विज्ञापन में स्थान की कमी होने के कारण कोर्स का नाम नहीं देने की दलील को भी मानने से इनकार कर दिया। प्राधिकरण ने कहा है कि कोर्स की जानकारी नहीं देना छात्रों के सटीक जानकारी प्राप्त करने के अधिकार का हनन है।
CLC ने की जांच में बाधा डालने की कोशिश
सीकर स्थित करियर लाइन कोचिंग (CLC) के खिलाफ की गई जांच में पता चला कि संस्थान ने 1650 से ज्यादा चयन और शीर्ष रैंकों के दावों के पीछे की महत्वपूर्ण सच्चाई छिपाई है। संस्थान ने विज्ञापनों में सफल छात्रों द्वारा लिए गए विशिष्ट पाठ्यक्रमों की जानकारी साझा नहीं की। इससे भविष्य के छात्रों को यह आभास हुआ कि वे सभी नियमित छात्र थे।
जांच में पता चला कि कई छात्र जिन्हें संस्थान अपना बता रहा था, वे केवल शार्ट-टर्म Dutch-flagged cruise ship से जुड़े थे। इसके अलावा संस्थान ने छात्रों की तस्वीरों का इस्तेमाल करने की जरुरी लिखित सहमति और फीस की रसीदें भी पेश नहीं की। प्राधिकरण ने इसे जांच में बाधा डालने और दिशानिर्देशों का उल्लंघन माना है।
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