कांग्रेस में मरहम की सियासत, संकट में आए बाबा, भाजपा की बत्ती गुल
राजस्थान की राजनीति के लिए यह हफ्ता किसी हाई-वोल्टेज ड्रामे की स्क्रिप्ट जैसा रहा। कहीं सालों पुरानी सियासी अदावत में सुलह की मीठी बयार बही तो कहीं भ्रष्टाचार के आरोपों के थपेड़ों के बीच एक कद्दावर नेता अपनी ही फौज में अकेला खड़ा नजर आया। बिजली गुल होने से लेकर फर्जी डिग्रियों के खुलासे तक मरुधरा की माटी इस हफ्ते पल-पल रंग बदलती रही।
मानेसर के जख्मों पर दौसा का मरहम
राजस्थान कांग्रेस की सियासत का इतिहास गवाह है कि यहां जब भी शांति दिखती है, वह किसी बड़े तूफान से पहले की खामोशी होती है। लेकिन इस हफ्ते की कहानी थोड़ी जुदा रही। पिछले हफ्ते तक पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयानों से जो चिंगारी भड़कती दिख रही थी, उसे सचिन पायलट के एक सधे हुए बयान ने शांत कर दिया।
सचिन पायलट ने दौसा में बेहद भावुक और रणनीतिक बयान देते हुए कहा-अशोक गहलोत का जितना स्नेह बेटे वैभव गहलोत के प्रति है, उतना ही मुझ पर भी है। इस बयान का जादू कहिए, कुछ ही घंटों में जादूगर कहे जाने वाले अशोक गहलोत के सुर भी पूरी तरह बदल गए।
गहलोत ने तल्खी भुलाकर कहा कि पायलट ने बिल्कुल सही बात कही है, हम उनके घरों में आते-जाते रहे हैं। यहां तक कि उन्होंने 2020 के बहुचर्चित मानेसर प्रकरण पर दी गई अपनी सफाई को भी किसी व्यक्ति विशेष पर हमला न मानकर केवल अपनी स्थिति स्पष्ट करना बताया।
यह केवल दो नेताओं के बयानों का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि कांग्रेस की सोची-समझी डैमेज कंट्रोल रणनीति है। दोनों ही नेता भली-भांति जानते हैं कि अंदरूनी कलह से पार्टी धरातल पर कमजोर होती है। आगामी चुनौतियों को देखते हुए दोनों का नरम पड़ना यह दिखाता है कि फिलहाल कांग्रेस आलाकमान ने इस शीतयुद्ध पर अस्थायी विराम लगाने में सफलता पा ली है।
किरोड़ीलाल का क्या, अपनों की चुप्पी और गैरों का साथ
इस हफ्ते की सबसे चौंकाने वाली सियासी कहानी कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा के इर्द-गिर्द घूमी। खाद-बीज कंपनियों पर हुई छापेमारी में एसीबी (ACB) द्वारा 2.44 करोड़ रुपए की भारी-भरकम रिश्वत राशि जब्त करने के बाद राजस्थान की राजनीति में एक अजीब सा सन्नाटा पसर गया।
आश्चर्य की बात यह है कि जो भाजपा अपने छोटे से छोटे कार्यकर्ता पर आए संकट में पूरी फौज खड़ी कर देती है, वह अपने इतने वरिष्ठ मंत्री के मामले में मौन व्रत धारण किए बैठी नजर आई। संगठन से लेकर कैबिनेट तक किरोड़ीलाल मीणा बिल्कुल अकेले पड़ते दिखाई दे रहे हैं।
पूरी कैबिनेट में केवल शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ही किरोड़ीलाल के बचाव में उतरे। दिलावर ने साफ शब्दों में कहा, अगर किरोड़ीलाल बेईमान हैं तो मैं कभी ईमानदार हो ही नहीं सकता। उन्होंने इस बहाने कांग्रेस के गोविंद सिंह डोटासरा और अशोक गहलोत पर भी तीखे निशाने साधे।
राजनीति में दोस्त कब दुश्मन और दुश्मन कब दोस्त बन जाए, कहा नहीं जा सकता। कल तक किरोड़ीलाल को टीवी पर खरी-खोटी सुनाने वाले आरएलपी सांसद हनुमान बेनीवाल और निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी इस संकट की घड़ी में मीणा के समर्थन में खड़े दिखाई दिए।
बेनीवाल ने तो मुख्यमंत्री से यहां तक कह दिया कि कार्रवाई करनी है तो बाकी 6 दागी मंत्रियों पर भी करो। पिछले 5 सालों तक अकेले दम पर तत्कालीन कांग्रेस सरकार की नाक में दम करने वाले किरोड़ीलाल मीणा का अपनी ही सरकार में अलग-थलग पड़ना कई सवाल खड़े करता है।
पहले भाई की हार पर इस्तीफा और अब इस मामले में संगठन की बेरुखी साफ इशारा करती है कि भाजपा के भीतर अंदरूनी समीकरण बहुत सहज नहीं हैं। हालांकि, किरोड़ीलाल ने भी कानोता में दोबारा छापा मारकर और मीडिया के सामने हाथी चलता रहता है...वाला बयान देकर जता दिया है कि वह इतनी आसानी से बैकफुट पर आने वाले खिलाड़ी नहीं हैं।
अंधेरे में चमकी 12 साल की उपलब्धियां
जयपुर के भाजपा प्रदेश मुख्यालय में इस हफ्ते एक ऐसा वाकया हुआ, जिसने संगठन की मुस्तैदी की पोल खोलकर रख दी। केंद्र सरकार के 12 साल पूरे होने पर बड़ी शान से रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई गई थी। मंच पर खुद राज्य के ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर भी मौजूद थे।
लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। महज 15 मिनट के भीतर तीन बार बिजली गुल हो गई। हीरापुरा ग्रिड सब-स्टेशन में फॉल्ट क्या आया, भाजपा का तथाकथित हाई-टेक दफ्तर घोर अंधेरे में डूब गया। हद तो तब हो गई जब यह पता चला कि इतने बड़े कार्यालय में एक जनरेटर सेट तक की व्यवस्था नहीं थी। अंततः रेल मंत्री को टीवी कैमरों की फ्लैशलाइट की रोशनी में और हाथ वाले लाउडस्पीकर के सहारे देश के विकास का ब्यौरा देना पड़ा।
यह घटना जितनी हास्यास्पद थी, उतनी ही सरकार के लिए शर्मिंदा करने वाली भी। ऊर्जा मंत्री की मौजूदगी में बिजली का इस तरह बार-बार जाना और बैकअप व्यवस्था का न होना प्रशासनिक ढिलाई को उजागर करता है। हालांकि रेल मंत्री ने स्थिति को बखूबी संभाला, लेकिन विपक्ष को बैठे-बिठाए सरकार की बिजली व्यवस्था पर तंज कसने का एक बड़ा मुद्दा मिल गया।
तीन राज्य, एक सत्र और तीन डिग्रियां
बांसवाड़ा के बागीदौरा से भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के विधायक जयकृष्ण पटेल इस हफ्ते एक बार फिर कानून के शिकंजे में कसते दिखे। स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने उन पर फर्जी डिग्री के सहारे सरकारी शिक्षक बनने और 5 साल तक वेतन उठाने का संगीन मामला दर्ज किया है।
पटेल साहब का शैक्षणिक चमत्कार ऐसा था कि उन्होंने साल 2007 में एक ही समय में तीन अलग-अलग राज्यों राजस्थान (सुखाड़िया यूनिवर्सिटी), सिक्किम (EIILM यूनिवर्सिटी) और गुजरात (कालोरेक्स टीचर्स यूनिवर्सिटी) से बीए (BA) की डिग्रियां हासिल कर लीं। मजे की बात यह है कि जिन दो बाहरी यूनिवर्सिटीज से उन्होंने डिग्रियां लीं, उन्हें यूजीसी ने फर्जीवाड़ा करने के कारण 2015 में ही बंद कर दिया था।
जयकृष्ण पटेल का विवादों से पुराना नाता है। इससे पहले वे विधानसभा में खान से जुड़े सवाल वापस लेने के बदले 2.50 करोड़ रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोचे जा चुके हैं। एक जनप्रतिनिधि का इस तरह के गंभीर फर्जीवाड़े में लिप्त होना वागड़ अंचल की राजनीति के लिए एक बड़ा झटका है। SOG की यह कार्रवाई प्रदेश में फर्जी डिग्रियों के खिलाफ चल रहे अभियान को और मजबूती देगी।
बयाना में विधायक से भिड़ी ईओ सस्पेंड
भरतपुर के बयाना में इस हफ्ते ब्यूरोक्रेसी और पॉलिटिकल पावर की आपसी जंग सड़क पर आ गई। एक सरकारी समीक्षा बैठक के दौरान स्थानीय निर्दलीय विधायक ऋतु बनावत और नगर पालिका की अधिशासी अधिकारी (EO) अनीता कुमारी के बीच तीखी झड़प हो गई।
विवाद तब बढ़ा जब विधायक ने सफाई के टेंडर एक ही फर्म को बार-बार दिए जाने पर सवाल उठाए। बात इतनी बढ़ी कि माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया। नतीजतन, विधायक बनावत की मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को लिखी चिट्ठी और भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद सरकार ने तुरंत एक्शन लेते हुए ईओ अनीता कुमारी को सस्पेंड कर दिया।
यह घटना राजस्थान में अक्सर देखने को मिलने वाले विधायक बनाम अधिकारी के टकराव का ताजा उदाहरण है। हालांकि इस मामले में सरकार ने तुरंत विधायक के पक्ष को तवज्जो देकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि जनप्रतिनिधियों की अनदेखी और विकास कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अगले हफ्ते फिर मिलेंगे एक नई चिट्ठी के साथ!
ये खबर भी पढे़:-
विधायक से तकरार के बाद EO को किया सस्पेंड, समीक्षा बैठक में हुई थी नोकझोंक
किरोड़ीलाल पड़े भाजपा में अलग-थलग, जानिए सियासत की पूरी कहानी?
BJP कार्यालय में बिजली गुल, रेल मंत्री को कैमरों की रोशनी में देना पड़ा संबोधन
पायलट पर गहलोत के सुर नरम पड़े, क्या कांग्रेस में सचमुच सुलह हो गई?