5 जिलाध्यक्षों ने कांग्रेस हाईकमान को भेजी चिट्टी, जानें नीरज डांगी का क्यों हो रहा है विरोध

Ashish Bhardwaj | Jun 05, 2026, 13:16 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान से नीरज डांगी को टिकट देने का कांग्रेस में विरोध हो रहा था। कांग्रेस के 5 जिलाध्यक्षों ने अपनी भावना हाईकमान तक पहुंचाने के लिए साझा पत्र भी लिखा था।

News In Short

  • कांग्रेस में राजस्थान से राज्यसभा के उम्मीदवार नीरज डांगी का हो रहा है विरोध।
  • नीरज डांगी के खिलाफ आलाकमान को लिखा लेटर।
  • दक्षिण राजस्थान के नेताओं ने इस बार प्रतिनिधित्व की मांग की।
  • उदयपुर संभाग को 1980 के बाद से राज्यसभा का अवसर नहीं मिला।
  • अन्य दावेदारों में पवन खेड़ा, डॉ. सीपी जोशी और दिनेश खोड़निया शामिल थे।

News In Detail

कांग्रेस ने राजस्थान से राज्यसभा चुनाव के लिए सांसद नीरज डांगी पर फिर भरोसा जताया है, लेकिन उनका टिकट काटने के लिए एक लॉबी सक्रिय थी। डांगी का विरोध करने के लिए कांग्रेस के कुछ नेता दिल्ली में डेरा जमाए रखे।



टिकट की घोषणा से एक दिन पहले उठापटक जारी रही। मेवाड़-वागड़ के आदिवासी विधायक और जिलाध्यक्षों की मांग थी कि इस बार कांग्रेस से राज्यसभा के लिए उम्मीदवार दक्षिण राजस्थान से होना चाहिए। यह मांग कई दशक से यह मांग उठती रही है। लेकिन इस बार भी निराशा ही हाथ लगी।





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1980 के बाद से नहीं मिला अवसर

नीरज डांगी के विरोध में लामबंद नेताओं का कहना था कि इस बार राज्यसभा में दक्षिण राजस्थान का प्रतिनिधित्व होना चाहिए।



उदयपुर संभाग से आखिरी बार धूलेश्वर मीणा को राज्यसभा भेजा गया था। 1980 के बाद से इस संभाग को किसी कांग्रेस कार्यकर्ता को राज्यसभा जाने का मौका नहीं मिला।



उदयपुर संभाग की उपेक्षा और कांग्रेस का विरोध

चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, उदयपुर, बांसवाड़ा और सलूम्बर के जिला अध्यक्षों ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को साझा पत्र लिखा। इस पत्र पर एआईसीसी सदस्य दिनेश खोड़निया ने भी हस्ताक्षर किए।



पत्र में कहा गया कि पिछले 46 वर्षों से उदयपुर संभाग के किसी कांग्रेस कार्यकर्ता को राज्यसभा जाने का अवसर नहीं मिला। इस क्षेत्र को कांग्रेस का गढ़ माना जाता है, लेकिन नेतृत्व ने अक्सर मारवाड़, शेखावाटी या प्रदेश के बाहर के नेताओं को मौका दिया।



सोशल इंजीनियरिंग में कांग्रेस की कमी

जिला अध्यक्षों ने यह भी कहा कि बीएपी (BAP) के उदय और तीसरी पार्टी (Third Party) के कारण वोटों का बंटवारा हुआ।



बीजेपी (BJP) ने सामान्य और जनजाति वर्ग के कार्यकर्ताओं को राज्यसभा और बोर्ड-निगम में मौके देकर वोट बैंक मजबूत किया। वहीं, कांग्रेस पिछले 46 वर्षों से सोशल इंजीनियरिंग में पिछड़ती रही, जिससे पार्टी का जनाधार कम हुआ।



अन्य दावेदार और आलाकमान की भूमिका

नीरज डांगी के अलावा पवन खेड़ा का नाम भी चर्चा में था। खेड़ा को कर्नाटक से उम्मीदवार बनाया गया। दक्षिण राजस्थान से डॉ. सीपी जोशी और दिनेश खोड़निया भी दावेदार थे। खोड़निया ने पार्टी आलाकमान तक अपनी बात पहुंचाई और सामान्य वर्ग के प्रतिनिधित्व की वकालत की।



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