रेप केस में लापरवाही पर 2 DSP के खिलाफ होगा एक्शन; नाबालिग को थाने बुलाकर धमकाने का आरोप
News In Short
- कोर्ट ने रेप केस में पुलिस लापरवाही पर 2 डीएसपी के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए।
- कोर्ट ने माना डीएसपी शिप्रा राजावत और तपेंद्र मीणा ने पॉक्सो एक्ट का उल्लंघन किया।
- अदालत ने ये भी माना कि पुलिस ने न्याय दिलाने के बजाय पीड़िता को ही प्रताड़ित किया।
- उदयपुर में एक महिला ने अपनी 17 साल की बेटी के साथ हुए रेप की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
- महिला ने पुलिस की कार्यप्रणाली से तंग आकर कोर्ट में एफआर पेश कर दी, जो मंजूर हुई।
News In Detail
Udaipur: राजस्थान के उदयपुर की पॉक्सो कोर्ट-2 ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में पुलिस की गंभीर लापरवाही और संवेदनहीनता पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने जांच अधिकारी रहे दो डीएसपी (DSP) शिप्रा राजावत और तपेंद्र मीणा के खिलाफ दंडात्मक और विभागीय कार्रवाई करने के लिए पुलिस के उच्चाधिकारियों को पत्र लिखने का आदेश दिया है। अदालत ने माना कि पुलिस ने न्याय दिलाने के बजाय पीड़िता को ही प्रताड़ित किया।
क्या था मामला?
27 मार्च 2023 को सूरजपोल थाने में एक महिला ने अपनी 17 साल की बेटी के साथ हुए रेप की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप नाथूलाल नामक व्यक्ति पर था। पहले डीएसपी तपेंद्र मीणा और फिर डीएसपी शिप्रा राजावत ने मामले की जांच की। पुलिस ने अंत में इस केस को 'झूठा' करार दिया और कोर्ट में एफआर पेश कर दी।
न्याय के बदले मिला टॉर्चर
सुनवाई के दौरान पीड़िता की मां ने पुलिस के काले चेहरे को बेनकाब किया। उन्होंने कोर्ट को बताया महिला अधिकारी ने उनकी बात सुनने के बजाय बेटी को धमकाया। थाने में नाबालिग को रोककर उसके बयान बदलवा दिए गए। पुलिस की 4 साल की सुस्ती और प्रताड़ना से हारकर मां ने कार्रवाई न करने का फैसला लिया, क्योंकि उन्होंने अब बेटी की शादी कर दी है।
पॉक्सो एक्ट की उड़ाई धज्जियां
न्यायाधीश संजय कुमार भटनागर ने पुलिस की कार्यप्रणाली को पॉक्सो एक्ट के विरुद्ध करार दिया। कोर्ट ने जांच में निम्नलिखित खामियां पाईं:
गिरफ्तारी व मेडिकल में कोताही: पुलिस ने आरोपी को न गिरफ्तार किया और न ही उसका मेडिकल कराया।
साक्ष्यों से खिलवाड़: आरोपी के खून के नमूने तक नहीं लिए गए और मौका नक्शा बनाने में जानबूझकर देरी की गई।
नाबालिग का उत्पीड़न: पॉक्सो नियमों के खिलाफ जाकर नाबालिग को बिना कोर्ट की अनुमति के बार-बार थाने बुलाकर प्रताड़ित किया गया।
एफआर मंजूर, लेकिन अधिकारियों पर गिरेगी गाज
अदालत ने माना कि पुलिस की प्रताड़ना के कारण ही मां को पीछे हटना पड़ा। कोर्ट ने पीड़िता की इच्छा का सम्मान करते हुए केस को बंद (एफआर स्वीकार) तो कर दिया, लेकिन दोनों डीएसपी की लापरवाही को माफ नहीं किया और उनके विरुद्ध दंडात्मक और विभागीय कार्रवाई का आदेश दिया है।
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